RSS ने बरेली में ढूंढ लिया विकल्प मौलाना शाहबुद्दीन रज़वी, ‘तौकीर रज़ा जेल में तैल’

RSS ने बरेली में ढूंढ लिया विकल्प मौलाना शाहबुद्दीन रज़वी, ‘तौकीर रज़ा जेल में तैल’

RSS बीजेपी और आरएसएस ने बरेलवी मुसलमानों का नया नेतृत्व खोज लिया है। इनका नाम है मौलाना शाहबुद्दीन रजवी। इनका नाम है शाहबुद्दीन रजवी। प्रदेश और केंद्र सरकार के लिए सिर दर्द बने तौकीर रज़ा खान की गिरफ्तारी के बाद से महसूस किया जा रहा था कि बरेलवी फिरके मुसलमानों का नेतृत्व ऐसे हाथों में जाए जो सरकार के सकारात्मक कामों में अडंगा न अटकाए। पाकिस्तान परस्त नारों को हवा न दे और पाकिस्तानी तंजीम तहरीक-ए-लब्बैक का एजेंडा भारत में लागू न होने दे।

तौकीर न मुसलमानों के न सरकार के

उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने के बाद तौकीर रजा ने  सरकार से सुविधाएं और तरफदारियां तो खूब हांसिल कीं लेकिन काम सरकार के खिलाफ किया। तीन तलाक, अवैध मदरसा और वक्फ बोर्ड संशोधन पर सरकार के विरोध के अलावा तौकीर रज़ा ने आई लव मुहम्मद पोस्टर विवाद का अंतर्राष्ट्रीयकरण करने का प्रयास किया। तौकीर रज़ा ने हिंदू-मुस्लिमों के बीच सांप्रदायिक सद्भाव बढ़ाने की जगह ऐसे बयान दिए जिससे आपस में दुश्मनी ज्यादा बढ़ गई।

‘मौलाना’ नहीं हैं तौकीर 

तौकीर रज़ा खान की शैक्षिक योग्यता के बारे में ज्यादा जानकारी सार्वजनतिक तौर पर उपलब्ध नहीं है फिर भी वो खुद को ‘मौलाना’ कहलवाना पसंद करते थे। क्यों कि मुसलमानों में मौलाना उसे कहते हैं जिसने आलिम का दर्जा हासिल किया हो और वो जो कहेगा वो इस्लामी किताबों के अनुसार अकाट्य होगा। बस इसी बात का फायदा तौकीर रजा उठाते रहे और बरेलवी सुन्नी मुसलमानों को बरगलाते रहे।

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तौकीर रज़ा

संतोष गंगवार का हाथ हठते ही जेल पहुंचे तौकीर

कहा तो यह भी जाता है कि तौकीर रजा पर बीजेपी के दिग्गज नेता (अब झारखण्ड के महामहिम राज्यपाल) संतोष गंगवार का वरदहस्त रहा। इसलिए सरकार की खिलाफत के बावजूद वो वीवीआईपी बने रहे। पुलिस-प्रशासन के अधिकारी तौकीर रजा की चापलूसी में ही लगे रहते थे। संतोष गंगवार को झारखण्ड राज्यपाल बनाए जाने के बाद स्थितियां बदलीं और तौकीर रजा जेल में मेहमानवाजी का लुत्फ उठा रहे हैं।

बरेलवी सुन्नी मुसलमानों में पैठ बना रहा आरएसएस

बरेलवी सुन्नी मुसलमानों के सियासी नेतृत्व के मुद्दे पर वैक्यूम क्रिएट न हो इसलिए नया नेतृत्व खड़ा करने की कोशिशें तो काफी पहले से की जा रहीं थीं लेकिन अब वो धरातल पर दिखाई देने लगीं है। बीजेपी और संघ के शीर्ष नेतृत्व ने बरेलवी सुन्नी मुसलमानों के नए नेतृत्व के तौर पर शाहबुद्दीन रजवी के नाम पर मुहर भी लगा दी। इस बात का प्रमाण मौलाना शाहबुद्दीन रजवी की आरएसएस के राष्ट्रीय जन संपर्क प्रमुख रामलाल से मुलाकात को बताया जा रहा है।

मौलाना शाहबुद्दीन रजवी से दोनों छोर पर फायदा

मूलतः बहराइच के रहने वाले मौलान शाहबुद्दीन रजवी को बरेलवी सुन्नी मुसलमानों का नया सरताज बनाने से बीजेपी को पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुसलमानों में पैठ गहरी बनाने का मौका मिलेगा। बरेली में हुई इस मुलाकात को सियासत के बड़े फलक पर देखा जा रहा है।

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मौलाना शाहबुद्दीन रजवी ने रामलाल को दी अपनी किताब तारीख-ए-इस्लाम

बहरहाल, रबरेली के दो दिवसीय दौरे पर बरेली आये आरएसएस के जन सम्पर्क प्रमुख रामलाल से  आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शाहबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने उनसे मुलाकात की, और अपनी लिखी हुई किताब “तारीख-ए-इस्लाम” पेश की। मौलाना शाहबुद्दीन ने उनको बताया कि इस किताब में पैग़म्बरे इस्लाम के जन्म से लेकर आजतक के इस्लामी आंदोलन को विस्तार से लिखा गया है। संघ के राष्ट्रीय जन संपर्क प्रमुख रामलाल ने मौलाना की लेखनीय मेहनत को सराहा। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी किताब लिखना बहुत कठिन काम है, आपने इस कठिन काम को करके लोगो के लिए आसानी पैदा कर दी।

मौलाना शाहबुद्दीन और रामलाल ने मुसलमानों के मसलहों पर की चर्चा

मुस्लिम जमात के प्रवक्ता डाँ अनवर रज़ा कादरी ने बताया कि इन दोनों लोगो के दरमियान देश और प्रदेश के विभिन्न मसाइल पर चर्चा हुई। अल्पसंख्यकों के दरमियान शिक्षा को बढ़ावा देने, मानवता के लिए काम करने, देश की रक्षा और सुरक्षा को ध्यान मे रखकर आपसी भाईचारा को बढ़ावा देने पर मंथन हुआ।

आला हज़रत के उर्स के दौरान मौलाना शाहबुद्दीन और रामलाल की मुलाकात की दुनिया भर में चर्चा

संघ के जनसंपर्क प्रमुख रामलाल से मौलाना शाहबुद्दीन की मुलाकात ऐसे मौके पर हुई है जब कि बरेली में आला हज़रत का सालाना उर्स चल रहा है। इस उर्स में देश-विदेश के हजारों लोग शामिल होते हैं। इस मुलाकात का संदेश देश ही नहीं विदेशों में बैठे मुसलमानों तक गया है कि संघ या बीजेपी हिंदू या मुसलमानों में कोई फर्क नहीं समझती है।

देवबंदियों को सांप सूंघा तो कट्टरपंथी बरेलवियों ने भी नाक सिकोड़ी

हालांकि, दीमाग पर कट्टरपंथी सोच का ताला लगाए बैठे कुछ कठमुल्लापंथी बरेलवी मुसलानों को यह मुलाकात बिल्कुल भी रास नहीं आई है। हालांकि, देवबंदी मुसलमानों के रहनुमाओं नेअभी तक मौलाना शाहुबुद्दीन रिजवी और संघ पदाधिकारी रामलाल की मुलाकात पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। ध्यान रहे, संघ के वर्तमान राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख रामलाल बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री भी रह चुके हैं।

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