Akhilesh Cheats Muslims:’अखिलेश पर न करें भरोसा-बदलेंगे रंग’ राहुल गांधी को बरेली के मौलाना की सख्त चेतावनी

Akhilesh Cheats Muslims:’अखिलेश पर न करें भरोसा-बदलेंगे रंग’ राहुल गांधी को बरेली के मौलाना की सख्त चेतावनी

देश की सियासत में विपक्षी एकजुटता के दावों के बीच उत्तर प्रदेश के बरेली से एक बहुत बड़ी राजनीतिक हलचल सामने आ रही है। दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में हुई अपोजीशन पार्टियों की हाई-प्रोफाइल बैठक के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने इंडिया गठबंधन की आंतरिक राजनीति पर तीखा प्रहार किया है।

इस पूरे घटनाक्रम में Akhilesh Cheats Muslims का यह रुख उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे चुका है। मौलाना ने साफ तौर पर कांग्रेस आलाकमान और राहुल गांधी को समाजवादी पार्टी के मुखिया से दूरी बनाने और सतर्क रहने की खुली नसीहत दे डाली है।

विपक्षी गठबंधन के हुजूम से मुसलमान गायब

दिल्ली की बैठक पर अपनी बेहद सख्त और बेबाक प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मौलाना ने सीधे तौर पर विपक्षी दलों की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस बड़े सियासी मोड़ पर Akhilesh Cheats Muslims की यह गूंज इसलिए भी अहम है क्योंकि उन्होंने आरोप लगाया कि इंडिया गठबंधन के इस पूरे हुजूम में से मुसलमान पूरी तरह गायब था।

मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने निराशा जताते हुए कहा कि इतनी महत्वपूर्ण बैठक में देश की किसी भी काबिले-जिक्र मुस्लिम राजनीतिक पार्टी या बड़े मुस्लिम चेहरे को आमंत्रित तक नहीं किया गया। उन्होंने इसे मुस्लिम मतदाताओं के साथ छलावा करार दिया है, जो हर चुनाव में इन धर्मनिरपेक्ष दलों के लिए एकमुश्त वोट बैंक की तरह खड़े रहते हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के एजेंडे पर भी उठाए तीखे सवाल

विपक्षी दलों की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को आड़े हाथों लेते हुए Akhilesh Cheats Muslims वाला मौलाना रज़वी का यह हमला और भी तीखा हो गया। मौलाना ने कहा कि जो लोग दिन-रात देश से सांप्रदायिकता को खत्म करने और भाईचारा बहाल करने की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, उन्होंने अपनी इस महत्वपूर्ण साझा गुफ्तगू और एजेंडे में ‘सांप्रदायिकता’ जैसे बुनियादी शब्द का इस्तेमाल तक करना जरूरी नहीं समझा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आज देश के जो जमीनी हालात हैं, उसमें सामाजिक भाईचारा, कौमी एकता और यकजहती की सबसे शदीद जरूरत है। लेकिन विपक्षी गठबंधन इस मोर्चे पर पूरी तरह से विफल और दिशाहीन दिखाई दे रहा है।

तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों का दिया हवाला

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के आपसी रिश्तों की परतें खोलते हुए Akhilesh Cheats Muslims की कॉल  ने अतीत की रणनीतिक गलतियों को जनता के सामने रखा।

मौलाना ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और खासतौर पर राहुल गांधी को याद दिलाते हुए कहा कि उन्हें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के पिछले विधानसभा चुनावों को कभी नहीं भूलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अगर अखिलेश यादव ने उन तीनों राज्यों के चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ अपनी समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी खड़े नहीं किए होते, तो कांग्रेस को इतना बड़ा राजनीतिक नुकसान कभी नहीं उठाना पड़ता। विशेषकर मुस्लिम बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में प्रत्याशी खड़े करके मतों का विभाजन कराया गया।

मौलाना ने आंकड़ों के साथ अपनी बात रखते हुए कहा कि सपा के इस कदम के कारण ही मतों का ध्रुवीकरण हुआ।

अंततः इन तीनों महत्वपूर्ण राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पूर्ण बहुमत की सरकारें बन गईं। इसलिए, आज राहुल गांधी और पूरी कांग्रेस लीडरशिप को ठंडे दिमाग से इस गंभीर विषय पर आत्ममंथन और विचार-विमर्श करना होगा। गठबंधन के दौर में भी अखिलेश यादव ने उस वक्त आखिर एलायंस का धर्म क्यों नहीं निभाया?

भविष्य के यूपी चुनाव को लेकर राहुल गांधी को खास मशवरा

आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के मद्देनजर Akhilesh Cheats Muslims वाला यह बयान कांग्रेस के लिए एक बड़े अलार्म की तरह है। मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने राहुल गांधी को बेहद स्पष्ट शब्दों में निजी मशवरा दिया है। उन्होंने कहा है कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव कतई भरोसा करने लायक व्यक्ति नहीं हैं। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व को सचेत किया कि अभी तो गठबंधन की बातें बहुत अच्छी लग रही हैं।

लेकिन भविष्य में जब उत्तर प्रदेश के चुनावी समर में सीटों के बंटवारे और उम्मीदवारों के नामों की तक्सीम का असली वक्त करीब आएगा, तब पूरी दुनिया देखेगी। अखिलेश यादव किस तरह से अपना रंग बदलते नजर आते हैं, इसका अंदाजा कांग्रेस को जल्द हो जाएगा।

मुस्लिम समाज के राजनीतिक भविष्य पर नई बहस

इस पूरे विवाद के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर मुस्लिम समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और उसकी हिस्सेदारी को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।

बरेली से आई Akhilesh Cheats Muslims की यह बेबाक टिप्पणी यह साबित करती है कि मुस्लिम समाज अब केवल वोट बैंक बनकर रहने को तैयार नहीं है। मौलाना का मानना है कि धर्मनिरपेक्षता का ढोंग करने वाले दल केवल चुनाव जीतने के लिए मुसलमानों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन जब सत्ता या संगठन में उचित हिस्सेदारी देने की बात आती है, तो उन्हें हाशिए पर धकेल दिया जाता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि Akhilesh Cheats Muslims का यह सियासी तीर आने वाले दिनों में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों के तालमेल के दौरान एक बड़ा गतिरोध पैदा कर सकता है।

अगर कांग्रेस ने मौलाना की Akhilesh Cheats Muslims वाली चेतावनी को गंभीरता से लिया, तो उत्तर प्रदेश में इंडिया गठबंधन के भीतर एक बड़ा आंतरिक कलह और दरार देखने को मिल सकती है। फिलहाल, बरेली के इस बड़े धार्मिक और सामाजिक नेता मौलाना शाहबुद्दीन रज़वी के Akhilesh Cheats Muslims वाले बयान ने उत्तर प्रदेश की पारंपरिक राजनीति में एक बड़ा भूचाल ला दिया है।

अब देखना यह होगा कि Akhilesh Cheats Muslims वाले बरेली के मौलाना के बयान  पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के आला नेताओं की क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है।

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