PoK Crisis: POK और POGB में नरसंहार कर रही है पाक फौज, बरेली के मौलाना रज़वी की UNO से दखल की मांग

PoK Crisis: POK और POGB में नरसंहार कर रही है पाक फौज, बरेली के मौलाना रज़वी की UNO से दखल की मांग

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात पूरी तरह से बेकाबू हो चुके हैं। इस समय वहां पैदा हुआ PoK Crisis एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। बुनियादी अधिकारों और आसमान छूती महंगाई के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही बेकसूर आवाम पर पाकिस्तानी सेना की बर्बरता की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।

इस गंभीर PoK Crisis और बिगड़ते हालातों को देखते हुए भारत के प्रसिद्ध सूफी संगठन ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से इस पूरे मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है।

मानवाधिकारों का गंभीर हनन और बढ़ता भू-राजनीतिक संकट

मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने बरेली से एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाले हर इंसान का यह बुनियादी अधिकार है कि वह अपने दमन के खिलाफ आवाज बुलंद करे। मौजूदा PoK Crisis इसी दमनकारी नीति का परिणाम है, जिसने अब एक मानवीय त्रासदी का रूप ले लिया है।

“पीओके की जनता पिछले कई दिनों से आटे, बिजली और अन्य आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के खिलाफ शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन कर रही थी। लेकिन पाकिस्तानी हुकूमत ने इस PoK Crisis को सुलझाने के बजाय वहां की लोकतांत्रिक आवाज को दबाने के लिए क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं।” – मौलाना बरेलवी

स्थानीय सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से बताया गया है कि इस PoK Crisis के दौरान पाकिस्तानी सेना की हिंसा इस कदर बढ़ चुकी है कि फौज ने अपने ही नागरिकों पर सीधे स्वचालित (ऑटोमैटिक) हथियारों से गोलियां चला दी हैं।

सेना की बर्बरता: 100 से ज्यादा निर्दोष नागरिकों की मौत

इस खूनी संघर्ष और क्रूर सैन्य कार्रवाई के कारण PoK Crisis में हताहतों की संख्या तेजी से बढ़ी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक लगभग 100 से ज्यादा निर्दोष नागरिकों की जान जा चुकी है। इस त्रासदी का सबसे दुखद पहलू यह है कि मरने वालों में एक दर्जन से अधिक मासूम बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं, जो इस गहरे PoK Crisis की विभीषिका को बयां करता है।

मौलाना बरेलवी ने वैश्विक मंचों की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) से एक विशेष जांच दल को तुरंत प्रभावित क्षेत्र में भेजने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि जब तक कोई स्वतंत्र वैश्विक संस्था वहां का दौरा नहीं करेगी, तब तक इस PoK Crisis की भयावहता दुनिया के सामने नहीं आ पाएगी।

अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से निष्पक्ष और फौरी जांच की मांग

आल इंडिया मुस्लिम जमात के प्रमुख ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को तुरंत वहां के विभिन्न जिलों का दौरा करना चाहिए। ऐसा करने से ही इस PoK Crisis की असली ग्राउंड रियलिटी और पाकिस्तानी फौज की दमनकारी नीतियों का सही तौर पर अंदाजा लगाया जा सकेगा।

मौलाना ने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और वैश्विक संस्थाओं को इस PoK Crisis की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करनी चाहिए। वहां की पीड़ित जनता की समस्याओं और गंभीर मुश्किलात का फौरी तौर पर समाधान निकाला जाना बेहद जरूरी है, अन्यथा यह PoK Crisis पूरे दक्षिण एशिया की शांति को प्रभावित कर सकता है।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन बनाम सैन्य तानाशाही

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीओके की आवाम लंबे समय से आर्थिक तंगहाली और पाकिस्तानी हुकूमत के सौतेले व्यवहार से परेशान है। जब उनके पास जीवित रहने के साधन खत्म होने लगे, तो उन्होंने सड़कों पर उतरकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन का रास्ता चुना, लेकिन उनके इस कदम को एक भयानक PoK Crisis में तब्दील कर दिया गया।

पाकिस्तान की सेना ने इस जन-आंदोलन को एक कड़े सैन्य क्रैकडाउन के जरिए कुचलने का प्रयास किया है, जिससे यह PoK Crisis और अधिक गहरा गया है। वर्तमान में विभिन्न इलाकों में कर्फ्यू जैसे हालात हैं, इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह ठप कर दी गई हैं, और स्थानीय मीडिया पर पूरी तरह से सेंसरशिप लागू है ताकि इस PoK Crisis से जुड़ी सेना के जुल्म की दास्तान बाहर न जा सके।

वैश्विक समुदाय से मौलाना बरेलवी की अंतिम अपील

अपने बयान के समापन में मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने पाकिस्तानी प्रशासन के अत्यधिक आक्रामक और तानाशाही रवैये की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने वैश्विक नेताओं से इस PoK Crisis पर तुरंत संज्ञान लेने का अनुरोध किया।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप की मांग को पुरजोर तरीके से दोहराते हुए कहा कि यदि विश्व समुदाय ने इस भीषण PoK Crisis पर अब भी चुप्पी साधे रखी, तो पीओके में मौतों का यह आंकड़ा और भयानक रूप ले सकता है। बेकसूर नागरिकों, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र को पाकिस्तान पर कड़ा कूटनीतिक दबाव बनाना चाहिए और इस PoK Crisis के तहत जारी रक्तपात को तुरंत रुकवाना चाहिए।

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