W Bengal Election 2026 मतदान के बीच चुनाव आयोग को SC ने दिया झटका

W Bengal Election 2026 मतदान के बीच चुनाव आयोग को SC ने दिया झटका

W Bengal Election 2026 पश्चिम बंगाल चुनाव के पहले चरण के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट ने निर्वाचन आयोग के आदेश पर रोक लगा दी है। निर्वाचन आयोग के निर्देश पर पुलिस ने उपद्रव की आशंका के मद्देनजर कुछ लोगों के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई के आदेश जारी किए थे। निर्वाचन आयोग के इन आदेशों के खिलाफ मोहम्मद दानिश नाम के याची ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई और आदेशों को निरस्त करने की गुहार लगाई।

कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्था सारथी सेन की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि  मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय पहुंचे लोगों को पुलिस पर्यवेक्षक ने संदिग्द्ध उपद्रवी मानकर कार्रवाई की है। इसलिए आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाती है।

साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह स्थगन आदेश किसी व्यक्ति द्वारा कोई अपराध करने पर होने वाली कार्रवाई पर प्रभावी नहीं होगा।

दरअसल, पश्चिम बंगाल पुलिस ने राज्य के 21 जिलों के 800 ऐसे लोगों की सूची बनाकर निरोधात्मक कार्रवाई के निर्देश जारी किए थे जिन पर चुनाव के दौरान उपद्रव करने की आशंका थी। याचिकार्ता ने कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा कि इन 800 लोगों में कुछ राजनीतक दलों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी शामिल हैं। अगर उन पर निरोधात्मक कार्रवाई होती है तो चुनाव प्रचार आदि के उनके मौलिक अधिकारों का हनन हो सकता है।

वरिष्ठ एडवोकेट कल्याण बंदोपाध्याय ने कोर्ट में दलील दी कि चुनाव आयोग की शक्तियां सीमित हैं। आयोग किसी नागरिक को उसके नागरिक कानूनों से वंचित नहीं कर सकता। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि सूची में शामिल किसी व्यक्ति पर कोई अपराध पंजीकृत है पुलिस उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।

निर्वाचन आयोग की ओर से पेश हुए वकील डीएस नायडू ने कहा कि आयोग चुनावों के शांतिपूर्वक कराने के लिए बाध्य है इसलिए संदिग्ध उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश आयोग दे सकता है। इस पर बेंच ने कहा कि चुनाव-संबंधी अपराध बीएनएस और लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 में निर्धारित हैं। निर्वाचन अधिकारी अपने विवेक से कार्रवाई के लिए सक्षम है मगर  अनावश्यक किसी के जनाधिकारों पर रोक नहीं लगाई जानी चाहिए। इसीके साथ अदालत ने आयोग से हलफनामा मांगा और याचिका को पांच हफ्ते बाद लिस्ट करने के आदेश पारित किए।

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