Arvind Kejriwal के खिलाफ कंटेम्प्ट याचिका दायर हो गई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस याचिका पर नोटिस भी जारी कर दिए हैं। दिल्ली हाईकोर्ट की सिटिंग जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की निष्ठा पर अरविंद केजरीवाल ने भरी कोर्ट में न केवल आरोप लगाए बल्कि न्याय न मिलने की आशंका जताते हुए उनसे केस छोड़ देने की भी मांग कर डाली थी। इसके अलावा कोर्ट की कार्यवाही को बिना अनुमति सोशल मीडिया पर सर्कुलेट करने पर भी हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। हाईकोर्ट ने सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से वीडियो हटाने के भी निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से यह जानकारी भी मांगी है कि सबसे पहले यह वीडियो किसने जारी किया था
दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस वी कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खण्डपीठ ने कहा कि इस तरह की रिकॉर्डिंग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियमों का उल्लंघन करती हैं और सोशल मीडिया पर इनकी अनुमति नहीं दी जा सकती। अधिवक्ता वैभव सिंह की ओर से दायर याचिका पर अदालत ने अरविंद केजरीवाल, आप नेताओं, दिग्विजय सिंह और पत्रकार रवीश कुमार को नोटिस भी जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई अब 6 जुलाई को होगी। पहले इस केस को जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस कारिया की पीठ के सामने सूचीबद्ध किया गया था, लेकिन जस्टिस कारिया ने खुद को अलग कर लिया तो दूसरी बेंच के सामने भेजा गया।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि अदालत की अनुमति के बिना कार्यवाही की रिकॉर्डिंग और इनका प्रकाशन-प्रसारण नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि 13 अप्रैल की कार्यवाही को न सिर्फ रिकॉर्ड किया गया बल्कि सोशल मीडिया पर प्रसारित भी किया गया। आम आदमी पार्टी के नेताओं और अन्य के द्वारा साझा किए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसे शेयर करना भी अपलोड करने के बराबर है। उन्होंने कहा कि अदालत की कार्यवाही को स्कैंडलाइज करने के लिए ऐसा किया गया। दिग्विजय सिंह के पोस्ट को पढ़कर भी सुनाया गया। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि केवल उन हिस्सों को साझा किया गया जिनका राजनीतिक अजेंडा है। कार्यवाही के कुछ हिस्सों को साझा करने के पीछे वृहत साजिश है।
फेसबुक और इंस्ट्राग्राम को संचालित करने वाली कंपनी मेटा और यूट्यूब की पैरेंट कंपनी गूगल के वकील भी सुनवाई में शामिल हुए। अदालत ने पूछा कि क्या यह पता लगाना संभव है सबसे पहले किसने वीडियो को अपलोड किया। मेटा की ओर से बताया गया कि इसके लिए कोई मैकेनिज्म नहीं है। गूगल की ओर से बताया गया कि रजिस्ट्रार जनरल की तरफ से 13 यूआरएल दिए गए थे जिन्हें डिलीट किया जा चुका है। मेटा ने कहा कि जब भी कोई अवैध कॉन्टेंट होता है तो एजेंसी संवाद करती है।