Arvind Kejriwal: नक्सलियों-आतंकियों से ज्यादा खतरनाक अरविंद केजरीवाल

Arvind Kejriwal: नक्सलियों-आतंकियों से ज्यादा खतरनाक अरविंद केजरीवाल

Arvind Kejriwal भारतीय राजनीति के इतिहास में अरविंद केजरीवाल का उदय एक ‘नैतिक विकल्प’ के रूप में हुआ था। भ्रष्टाचार के विरुद्ध अन्ना हजारे के आंदोलन की कोख से जन्मे इस नेतृत्व ने ‘स्वराज’ और ‘पारदर्शिता’ का सपना दिखाया था। किंतु, लगभग डेढ़ दशक से अधिक के कालखंड में अरविंद केजरीवाल की करतूतों पर गौर करने पर चलता है कि यह शख्स बेहद खतरनाक है। इसके कारनामे डरावने और परिणाम भयभीत करने वाले हैं। अरविंद केजरीवाल ने सत्ता में रहते हुए सियासी अराजकता को पाला-पोषा और अब न्यायपालिका की अस्मिता पर कुठाराघात शुरू कर दिया है।
राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरी न होने से केजरीवाल कुण्ठाग्रस्त है। उसकी मानसिकता पढ़े-लिखे चालाक अपराधी जैसी हो गई है। केजरीवाल को लगता है कि वो जो कुछ कह रहा है बस उतना ही सच और वास्तविक है। दिल्ली हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर अभियान भी आपराधिक प्रवृत्ति को ही दिखाता है। क्या अरविंद केजरीवाल की मंशा भारतीय न्याय व्यवस्था के खिलाफ जनाक्रोश पैदा करना नहीं है। क्या अरविंद केजरीवाल की इस मंशा के पीछे नेपाल के जेन जी आंदोलन जैसे हालात पैदा करने की नहीं है। क्या अरविंद केजरीवाल की यह मंशा भी नहीं है कि लोग उग्र और उत्तेजित हो जाएं और फिर आंदोलन की आड़ में न्यायालयों को आग के हवाले कर दिया जाए।

Arvind Kejriwal
Arvind Kejriwal

…और फिर देश में कानून-व्यस्था भंग होने का बहाना दिखा विदेशी ताकतों को हस्तक्षेप का मौका दिया जाए और अंत में वही कि सरकार गिरा दी जाए…देश के बड़े नेताओं को देश से भागने पर मजबूर किया जाए या उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए? क्या यह सब नहीं चाहते हैं केजरीवाल।
इन सारे सवालों का जवाब है- हां, केजरीवाल की मंशा यही है।

मक्कार सियासी रणनीतिकार

केजरीवाल के क्रियाकलाप किसी सुधारवादी राजनेता के नहीं बल्कि एक ऐसे धूर्त और मक्कार रणनीतिकार की प्रतीत होती है, जिसका एकमात्र लक्ष्य सत्ता को अपनी मुट्ठी में बंद कर तानाशाही तरीके से चलाना है। जहां वो खुद राजा हो और खुद ही न्यायाधीश भी। अरविंद केजरीवाल का लक्ष्य देश की हर लोकतांत्रिक संस्था का विनाश करना है। केजरीवाल का यह अभियान राजनीतिक गलियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की रक्ष- न्यायपालिका- के विरुद्ध भी शुरू हो चुका है। अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के बहाने पूरी भीषण युद्ध  की रणीनीति के तहत न्यायपालिका के अपमान का पहला मोर्चा खोल दिया है।

Arvind Kejriwal
Arvind Kejriwal

शुरू से लेकर अब तक अरविंद केजरीवाल की कारगुजारियों पर निगाह डालते हैं-

अराजकता का आगाज

अरविंद केजरीवाल की राजनीति की शुरुआत ही ‘अविश्वास’ और घमण्ड पूर्वक नियम-कानून तोड़ने से हुई थी। 28 दिसंबर 2013 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद उन्होंने दिल्ली पुलिस के विरुद्ध धरने की धमकी दी। आजाद भारत के इतिहास में यह किसी भी राज्य के मुखिया के तौप पर पहला घोर अराजकतावादी और विरोध के लोकतांत्रिक अधिकार की आड़ में लोकतंत्र को लांछित करने वाला कारनामा था।

रेलभवन के सामने धरना

गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व से ठीक पहले 20-21 जनवरी 2014 को जब एक निर्वाचितमुख्यमंत्री अपनी पूरी कैबिनेट के साथ, संसद भवन से चंद कदम दूर, रेल भवन के बाहर सड़क पर धरना देकर बैठा वो भारतीय लोकतंत्र के लिए सबसे काला दिन था। कानून-व्यवस्था और राजनीतिक मर्यादा की बात उठी, तो केजरीवाल ने खुलेआम ऐलान किया कि हाँ, मैं अराजकतावादी हूँ।

अराजक राजनीति का ब्लू प्रिंट

यह केवल एक वाक्य नहीं था, बल्कि अरविंद केजरीवाल की आने वाली राजनीति का ब्लूप्रिंट था। एक मुख्यमंत्री का केंद्र सरकार के साथ बगावत का ऐलान करना और सुरक्षा व्यवस्था को ठप करना यह साबित करने के लिए पर्याप्त था कि उन्हें संविधान की सीमाओं से चिढ़ है। उसे देश के मान-सम्मान की चिंता नहीं है। केंद्र में उस समय यूपीए की सरकार थी। मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस पर जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे मुख्य अतिथि थे। भारत की राष्ट्रीय राजधानी शहर दिल्ली के अराजक मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तस्बीरें दुनियाभर के टेलिविजन और अखबारों की सुर्खियां बनीं थीं।

प्रशासनिक अपरिपक्वता

इससे पहले 11 जनवरी 2014 को अरविंद केजरीवाल का जनता दरवार की उस भीड़तंत्र वाली मानसिकता और प्रशासनिक अपरिपक्वता का उदाहरण था, जहाँ वे संस्थागत समाधान के बजाय अराजक भीड़ के माध्यम से न्याय का दिखावा करना चाहते थे। जनता दरबार में भगदड़ मची, अव्यवस्था हुई और अंततः इसे रद्द करना पड़ा, जो उनकी प्रशासनिक अक्षमता का पहला बड़ा प्रमाण बना।

Arvind Kejriwal
Arvind Kejriwal

न्यायपालिका के विरुद्ध युद्ध

न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा प्रकरण केजरीवाल की राजनीति का सबसे खतरनाक मोड़ है। अरविंद केजरीवाल व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए न्यायपालिका को अपमानित कर रहे हैं। जब तक अदालतें उनके पक्ष में निर्णय देती हैं, वे लोकतंत्र की दुहाई देते हैं, लेकिन जैसे ही कानून अपना काम करता है, वे न्यायाधीशों के चरित्र हनन पर उतर आते हैं।

अप्रैल 2024 का फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने जब केजरीवाल की गिरफ्तारी को कानूनी रूप से वैध ठहराया, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि कानून किसी भी व्यक्ति के लिए अलग नहीं हो सकता, चाहे वह मुख्यमंत्री ही क्यों न हो। इस फैसले ने केजरीवाल के ‘विक्टिम कार्ड’ को ध्वस्त कर दिया था।

केजरीवाल का ईको सिस्टम

न्यायपालिका को डराने का अभियान: इस फैसले के तुरंत बाद, केजरीवाल के अराजक इको सिस्टम ने सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा के विरुद्ध एक सुनियोजित और घृणित अभियान छेड़ दिया। उनकी मंशा पर सवाल उठाना, उनके पुराने फैसलों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना और उन्हें ‘पक्षपाती’ सिद्ध करना—यह सब न्यायपालिका के विरुद्ध एक प्रकार का “बौद्धिक आतंकवाद” है। केजरीवाल का यह अराजकतावादी अभियान यह बतता है कि यदि कोई न्यायाधीश उनके विरुद्ध जाएगा, तो उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित किया जाएगा।

राष्ट्रविरोधी तत्वों का संरक्षण और तुष्टिकरण

एक ओर केजरीवाल खुद को ‘कट्टर देशभक्त’ कहते हैं, वहीं दूसरी ओर उनके कार्य भारत की अखंडता को चुनौती देने वाली ताकतों के साथ खड़े दिखाई देते हैं।आतंकी देवेंद्र पाल सिंह भुल्लर की पैरवी करने से अरविंद केजरीवाल पीछे नहीं हटे? 27 जनवरी 2014 को मुख्यमंत्री के रूप में केजरीवाल ने तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पत्र लिखकर 1993 के दिल्ली बम धमाकों के दोषी भुल्लर की रिहाई की सिफारिश की। 9 मासूमों के हत्यारे के प्रति यह सहानुभूति केवल और केवल पंजाब के कट्टरपंथी तत्वों को खुश करने की एक घिनौनी कोशिश थी।

Arvind Kejriwal
Arvind Kejriwal

गणतंत्र दिवस पर हिंसा और लाल किले का अपमान 

2021 में कृषि कानूनों के विरोध के नाम पर जिस तरह दिल्ली को महीनों तक बंधक बनाया गया, उसमें केजरीवाल सरकार की भूमिका एक मूक दर्शक की नहीं, बल्कि एक सहायक की रही। 26 जनवरी 2021 को लाल किले की प्राचीर पर तिरंगे का अपमान करने वालों और खालिस्तानी झंडा फहराने की कोशिश करने वालों का अप्रत्यक्ष समर्थन करना केजरीवाल के अराजकतावादी चरित्र का विस्तार था।

विदेशी फंडिंग और एनआईए की जांच

2024 में तत्कालनी दिल्ली के उपराज्यपाल ने अरविंद केजरीवाल को खालिस्तानी तत्वों से फंडिंग के आरोपों की एनआईए जांच के निर्देश दिए। जिससे ने यह स्पष्ट होता है कि सत्ता प्राप्ति के लिए केजरीवाल किसी भी हद तक जा सकते हैं। राष्ट्रविरोधी ताकतों से हाथ मिलाना उनके कथित ‘स्वराज’ का असली और भयावह चेहरा है।

टेक्सपेयर के पैसों से बना शीश महल 

केजरीवाल ने दिल्ली को विकास के बजाय केवल ‘विवाद’ का केंद्र बना दिया। 2015 से 2018 के बीच उन्होंने उपराज्यपाल और केंद्र सरकार के साथ निरंतर युद्ध की स्थिति बनाए रखी।

जून 2018 का एलजी हाउस धरना

उपराज्यपाल के आवास पर 9 दिनों तक अपनी पूरी कैबिनेट के साथ सोफे पर बैठना प्रशासनिक इतिहास की सबसे हास्यास्पद घटना थी। इस दौरान सरकारी काम ठप रहा, फाइलें रुकी रहीं, लेकिन केजरीवाल अपनी अराजकतावादी छवि को चमकाने में व्यस्त रहे।

शीश महल घोटाला (2023-24)

सादगी का ढोंग करने वाले नेता का असली रंग तब दिखा जब मुख्यमंत्री आवास के नवीनीकरण पर 45-50 करोड़ रुपये खर्च करने की बात सामने आई। वियतनामी मार्बल, 8-8 लाख के पर्दे और विलासिता के अन्य सामानों ने यह सिद्ध कर दिया कि ‘आम आदमी’ के नाम पर केजरीवाल ने अपना एक शाही और सामंती साम्राज्य खड़ा कर लिया है।

 

Arvind Kejriwal
Arvind Kejriwal

शराब घोटाला: सत्ता का मोह और संवैधानिक पतन

भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने का दावा करने वाली पार्टी का स्वयं भ्रष्टाचार के दलदल में धंस जाना केजरीवाल की अराजक राजनीति की सबसे घिनौना चेहरा है।

ईडी के 9 समनों की अवहेलना

जनवरी 2024 तक केजरीवाल ने जांच एजेंसियों के 9 समन को ‘राजनीतिक’ बताकर ठुकरा दिया। यह कानून के शासन का खुला उल्लंघन था। एक मुख्यमंत्री द्वारा जांच से भागना यह दर्शाता है कि उन्हें भारत के संविधान और कानून पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं था।

जेल से सरकार चलाने की जिद

21 मार्च 2024 को गिरफ्तारी के बाद केजरीवाल ने जो किया, वह विश्व के किसी भी सभ्य लोकतंत्र में सबसे बड़ा लांछन है। उन्होंने जेल में रहते हुए भी मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं छोड़ी। तिहाड़ जेल से आदेश पारित करना और दिल्ली की सत्ता को बंधक बना लेना एक संवैधानिक तख्तापलट जैसा कृत्य था। यह सत्ता के प्रति उनके उस मोह को दर्शाता है जहाँ उनके लिए पद, लोक-लाज और नैतिकता से कहीं ऊपर है।

arvind kejriwal
arvind kejriwal

केजरीवाल के  अराजक तंत्र को कुछ बिंदुओं में इस तरह समझें-

  • अरविंद केजरीवाल की यात्रा ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ से शुरू होकर ‘इंडिया अगेंस्ट इंस्टीट्यूशंस’ पर पहुँच गई है।
  • उन्होंने संसद का अपमान किया जब उन्होंने कृषि कानूनों को विधानसभा में फाड़ा।
  • उन्होंने कार्यपालिका का अपमान किया जब उन्होंने मुख्य सचिव के साथ दुर्व्यवहार किया।
  • उन्होंने संविधान का अपमान किया जब उन्होंने जेल से सरकार चलाने की कोशिश की।
  • और अब वे न्यायपालिका का अपमान कर रहे हैं क्योंकि वे कानून की पकड़ में हैं, मगर

 

केजरीवाल का सियासी मॉडल एक संस्थागत दीमक की तरह है जो धीरे-धीरे हमारे लोकतंत्र की नींव को खोखला कर रहा है। न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा के विरुद्ध उनका अभियान केवल एक न्यायाधीश का विरोध नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्र न्यायपालिका को अपनी राजनीतिक इच्छाशक्ति के आगे झुकाने का एक कुत्सित प्रयास है।

केजरीवाल के विषय में तथ्य, तारीखें और उनके निर्णय- चाहे वह भुल्लर की रिहाई का पत्र हो, लाल किले के दंगाइयों का समर्थन हो, या शराब घोटाले में लिप्तता हो- सभी एक ही दिशा में इशारा करते हैं कि अरविंद केजरीवाल भारत के लोकतंत्र में अराजकता के सबसे बड़े असुर हैं। यदि आज इन शक्तियों को नहीं रोका गया, तो आने वाले समय में कोई भी संवैधानिक संस्था सुरक्षित नहीं रहेगी। भारत की जनता ही नहीं मौजूदा सरकरा को भी यह समझना होगा कि अधिकारों की बात करने वाला हर व्यक्ति लोकतान्त्रिक नहीं होता। कुछ लोग केवल लोकतंत्र की सीढ़ी चढ़कर लोकतंत्र को ही गिराने का काम करते हैं।

Arvind Kejriwal
Arvind Kejriwal

वो तारीखें जब-जब अरविंद केजरीवाल ने भारतीय लोकतंत्र और संस्थाओं को अपमानित कियाः

28 दिसंबर 2013: सीएम पद की शपथ और तुरंत टकराव की शुरुआत।

20-21 जनवरी 2014: रेल भवन धरना, खुद को ‘अराजकतावादी’ घोषित किया।

27 जनवरी 2014: आतंकी देवेंद्र पाल सिंह भुल्लर की रिहाई हेतु राष्ट्रपति को पत्र।

14 फरवरी 2014: 49 दिनों के बाद इस्तीफा।

जून 2018: एलजी हाउस में 9 दिनों का धरना।

26 जनवरी 2021: लाल किले पर हिंसा, अराजक तत्वों को नैतिक समर्थन।

21 मार्च 2024: शराब घोटाले में ईडी द्वारा गिरफ्तारी।

9 अप्रैल 2024: न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा द्वारा गिरफ्तारी को वैध ठहराना।

17 सितंबर 2024: विवशता में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा।

06 अप्रैल 2026: दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में रिक्युजल पिटीशन पर इन परसन बहस और कोर्ट पर आरोप

15 अप्रैल 2026: नए हलफनामे और कोर्ट पर नए आरोप

16 अप्रैल 2026: वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इन परसन बहस के दौरान कोर्ट पर ब्लंट एलिगेशन

20 अप्रैल 2026 को पिटीशन खारिज होने के 27 अप्रैल को अरविंद केजरीवाल का सोशल मीडिया पर न्यायपालिका विश्वसनीयता और निष्पक्षता के खिलाफ अभियान। बयान दिया- कोर्ट पर विश्वास नहीं, न्याय मिलने की उम्मीद नहीं। आरोप जिस जज के वकील बेटे-बेटी केंद्र सरकार के पैनल पर हों, उससे निष्पक्ष सुनवाई उम्मीद नहीं की जा सकती।

पंजाब सरकार में आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान अमृत पाल सिंह का उदय, पंजाब में फिर से देश विरोधी तत्वों को प्रश्रय, सिखों का बड़े पैमाने पर क्रिश्चियन कन्वर्सन की घटना आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की बदौलत नहीं हैं तो किसकी बदौलत है।

अफवाहें तो यह भी उड़ीं थीं कि अरविंद केजरीवाल आजाद खालिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं। इसलिए वो संसद में खालिस्तान परस्त लोगों को संसद में भेजना चाहते थे। 23 फरवरी 2023 को अमृतसर जिले के अजनाला थाने में अमृतपाल का तांडव किसे याद नहीं है। किस की शह पर हुआ था सब। वांछित आतंकी गुरपंत सिंह पन्नू का खुलासा कौन भूल सकता है।

 

Yagdutta Rajeev Avatar

RAJEEV SHARMA
Media Strategist | Content Architect
G 24, G Block, Sector 12, NOIDA - 201301
Mobile: +91 9968329365 | Email: stv.rajeevsharma@gmail.com

PROFILE
A high-impact Media Professional with over 25 years of distinguished career in National News Networks. Expert in Newsroom Transformation, Editorial Governance, and Multi-platform Content Strategy. Proven track record of leading large editorial teams (Input/Output), conceptualizing high-TRP programming, and driving digital convergence for major media houses.

CORE COMPETENCIES & LEADERSHIP
• Editorial Strategy: Expert in defining the editorial tone, ensuring journalistic integrity, and managing complex newsroom operations.
• Broadcasting Excellence: Seasoned Prime-time Anchor with a command over political, legal, and investigative discourse.
• Operational Excellence: Specialized in Octopus Newsroom and Vizrt workflows for high-efficiency broadcasting.
• Media Branding: Skilled in program scheduling, minute-to-minute planning, and brand positioning to maximize viewership.

PROFESSIONAL LEADERSHIP JOURNEY
Zee Media (National)
Executive Producer – Output * Strategic Oversight: Orchestrated news output for a national audience, ensuring seamless integration of breaking news and feature programming.
• Workflow Optimization: Modernized story creation processes to enhance newsroom agility and broadcast quality.
APN News Channel
Input Head
• News Intelligence: Directed the network’s news-gathering machinery, leading investigative teams to secure exclusive and high-impact stories.
News 24 (Hindi Digital) - BAG Network
Editorial Consultant * Digital Transformation: Provided strategic counsel on content diversification and digital-first editorial approaches to capture evolving news audiences.
ITV Network (India News)
Editor: Legally Speaking
• Niche Programming: Conceptualized and led editorial content for specialized legal segments, enhancing the network’s thought-leadership profile.
Sadhna News
Editor – Output
• Channel Launch & Execution: Spearheaded news operations for the UP/UK channel from inception, establishing it as a credible regional voice.

• Flagship Anchor: Hosted high-profile shows like "Press Club" and "Rajrang," driving viewer engagement through analytical depth.
S1 News Channel
Editor
• Organizational Leadership: Held full administrative and editorial accountability for the channel, managing a diverse workforce and newsroom budget.
• Public Affairs: Hosted "Special Agenda" and "Savdhan," focusing on critical social and political issues.

TRAINING & EDUCATION
• Conflict & Sensitive Reporting: Trained by Thomson Foundation, Conflict Area (Insurgency or War Time) and HIV/AIDS Reporting.
• Academic: MA & Postgraduate Diploma in Journalism.

TECHNICAL & INDUSTRY FOOTPRINT
• Technology: Advanced proficiency in Octopus Newsroom and Vizrt
ecosystem.
• Print Legacy: Significant editorial contributions to Amar Ujala, Aaj, and
Rashtriya Sahara.
• Mentorship: Consultant and faculty at Massco Media, shaping the next generation of journalists.

Personal Philosophy: “Let’s shoot for the moon, even if we miss, we shall land somewhere among the stars!”

Sd/-

(RAJEEV SHARMA) NOIDA. Dt.

Fact Checked & Editorial Guidelines
Reviewed by: Subject Matter Experts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *