Twisha Death Mystery मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बहुचर्चित और हाई-प्रोफाइल त्विषाशर्मा मौत (Twisha Death Mystery) मामले में न्यायपालिका के इतिहास का एक बेहद असाधारण और ऐतिहासिक घटनाक्रम सामने आया है। जबलपुर हाईकोर्ट ने बुधवार देर रात एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए मामले की मुख्य आरोपी और मृतका की सास, रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत को सिरे से रद्द करने का फैसला सुनाया।
हाईकोर्ट ने रात में ही सुनाया दिया फैसला
बुधवार को दिन में उच्च न्यायालय में दोनों पक्षों (अभियोजन, सीबीआई, पीड़ित पक्ष और आरोपी पक्ष) के बीच बेहद तीखी बहस चली थी। इसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। आमतौर पर अदालती कार्यप्रणाली के अनुसार, वर्किंग आवर्स (कार्यकाल के घंटे) समाप्त होने के बाद सुरक्षित रखे गए फैसलों को अगले किसी कार्यदिवस (वर्किंग डे) में सुनाया जाता है। परंतु, इस मामले की संवेदनशीलता, गुरुता और तात्कालिकता को देखते हुए हाईकोर्ट ने सुबह होने या अगले वर्किंग डे का इंतजार नहीं किया और रात में ही अपना 17 पन्नों का विस्तृत आदेश जारी कर दिया। कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, यह अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है। दरअसल, अगले दिन गुरुवार को ईद के त्योहार की राजकीय छुट्टी होने के कारण अदालतें बंद रहनी थीं, इसी बात को दृष्टिगत रखते हुए माननीय न्यायमूर्ति ने न्याय की गति को थमने नहीं दिया और रात में ही आदेश पारित कर दिया।
गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार कर सकती है सीबीआई
Twisha Death Mystery मामले में सास गिरिबाला सिंह की अंतरिम जमानत पर अदालत ने अपने 17 पृष्ठों के कड़े आदेश में स्पष्ट शब्दों में कहा कि मामले की गंभीरता, रिकॉर्ड पर मौजूद चश्मदीद सबूतों, परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी पक्ष को किसी भी प्रकार की न्यायिक राहत या ढील देना कतई उचित नहीं था। हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद अब केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) के पास पूर्व जज गिरिबाला सिंह को सलाखों के पीछे भेजने का कानूनी रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है और एजेंसी उन्हें किसी भी क्षण गिरफ्तार कर सकती है।
ट्रायल कोर्ट पर गंभीर सवाल
Twisha Death Mystery मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट-सत्र न्यायालय) द्वारा पूर्व में आरोपी गिरिबाला सिंह को दी गई राहत और उसकी कार्यप्रणाली पर बेहद तीखे व गंभीर सवाल उठाए। उच्च न्यायालय ने बेहद सख्त रुख अख्तियार करते हुए टिप्पणी की कि निचली अदालत ने केस डायरी, पुलिस डायरी और उपलब्ध महत्वपूर्ण साक्ष्यों का सही व पारदर्शी तरीके से परीक्षण और मूल्यांकन नहीं किया था। महज दो दिनों के भीतर जिस जल्दबाजी में निचली अदालत से राहत दी गई थी, उसने न्याय की मूल भावना को आहत किया।
त्विषा के शरीर पर चोटों के निशान पर सवाल
हाईकोर्ट के आदेश में Twisha Death Mystery पर इस बात का विशेष तौर पर उल्लेख किया गया कि मृतका त्विषाशर्मा के शरीर पर मृत्यु से पूर्व की चोटों के कई गंभीर और संदिग्ध निशान पाए गए थे। इन चोटों के संदर्भ में जब आरोपी पक्ष से सवाल किए गए, तो उनके पास कोई संतोषजनक, तार्किक या वैज्ञानिक जवाब नहीं था। अदालत ने रेखांकित किया कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री और दस्तावेजी सबूतों के आधार पर यह बिल्कुल नहीं कहा जा सकता कि प्रताड़ना या अपराध के आरोप केवल पति समर्थ सिंह तक ही सीमित हैं; इसमें सास गिरिबाला सिंह की भूमिका की भी गहनता से हिरासत में जांच होनी आवश्यक है।
शीर्ष वकीलों के बीच चली लंबी बहस
बुधवार को जबलपुर उच्च न्यायालय में Twisha Death Mystery को लेकर देश और प्रदेश के शीर्ष कानूनी दिग्गजों के बीच ज़बरदस्त कानूनी दांव-पेच देखने को मिले। मध्य प्रदेश सरकार और राज्य अभियोजन की ओर से स्वयं महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कमान संभाली और जमानत का कड़ा विरोध किया। वहीं, मृतका त्विषा शर्मा के पीड़ित परिवार की ओर से देश के विख्यात और वरिष्ठ फौजदारी वकील सिद्धार्थ लूथरा ने अपनी दलीलें पेश कीं। उन्होंने अदालत को बताया कि मृतका को शादी के महज कुछ महीनों के भीतर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया और साक्ष्यों को प्रभावित करने के लिए आरोपी पक्ष के प्रभाव का इस्तेमाल किया जा रहा है।
दूसरी तरफ, आरोपी पूर्व जज गिरिबाला सिंह के पक्ष को मजबूती से रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने अपनी दलीलें रखीं। उन्होंने गिरिबाला सिंह की लंबी न्यायिक सेवा, उनकी उम्र और मामले में उनकी सीधे तौर पर संलिप्तता न होने का दावा करते हुए जमानत बरकरार रखने की पुरज़ोर गुहार लगाई। दोनों पक्षों की अत्यंत तीखी, विस्तृत और मैराथन दलीलों को घंटों सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अंततः देर रात को अपना अंतिम फैसला सुनाया, जिसने रक्षात्मक रुख अपनाए बैठे आरोपी खेमे को हिलाकर रख दिया।
सीबीआई की कस्टडी में है पति समर्थ सिंह
Twisha Death Mystery मामले में मुख्य आरोपी बनाए गए त्विषाशर्मा के पति समर्थ सिंह को लेकर भी कानूनी शिकंजा पूरी तरह कस चुका है। मध्य प्रदेश सरकार की विशेष अनुशंसा और केंद्र की हरी झंडी के बाद इस हाई-प्रोफाइल मामले की कमान पूर्ण रूप से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अपने हाथों में ले ली है। सीबीआई ने सोमवार को इस मामले में नई एफआईआर (भारतीय न्याय संहिता की दहेज हत्या और क्रूरता से संबंधित धाराओं के तहत) दर्ज की थी।
बुधवार को भोपाल की संबंधित मजिस्ट्रेट अदालत में औपचारिक न्यायिक कार्यवाही पूरी करने के बाद आरोपी पति समर्थ सिंह की कस्टडी आधिकारिक तौर पर सीबीआई को सौंप दी गई। अदालत ने समर्थ सिंह को 29 मई तक सीबीआई की विशेष रिमांड पर भेज दिया है।
कस्टडी मिलते ही सीबीआई ने समर्थ सिंह को कटारा हिल्स स्थित उसी निवास स्थान पर ले जाकर ‘क्राइम सीन रीक्रिएट’ कराया। सीबीआई ने इससे पहले घटना स्थल का निरीक्षण किया त्विषा के शव मिलने के जगह से कुछ सबूत भी जुटाए हैं। अब इनका वैज्ञानिक परीक्षण कराने के लिए सीएफएसएल लैब भेज दिया गया है।
घटनाक्रम- Twisha Death Mystery
यह पूरा मामला भोपाल के पॉश इलाके कटारा हिल्स का है, जहाँ बीती 12 मई 2026 की रात को नोएडा की रहने वाली पूर्व मिस पुणे, मॉडल और अभिनेत्री त्विषा शर्मा की उनके ससुराल में बेहद संदिग्ध और रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी। समर्थ और त्विषा की शादी दिसंबर 2025 को हुई थी। यानी शादी के महज पांच महीने के भीतर ही त्विषाकी जिंदगी का दर्दनाक अंत हो गया। पीड़ित पक्ष का दावा है कि घटना की रात यानी 12 मई को रात 9:41 बजे त्विषाने अपनी मां को फोन किया था, जिसमें वह बेहद डरी और सहमी हुई थी। उस आखिरी फोन कॉल के बैकग्राउंड में उनके पति समर्थ सिंह के ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने और विवाद करने की आवाजें आ रही थीं, जिसके तुरंत बाद फोन अचानक कट गया। इसके बाद जब परिवार ने दोबारा संपर्क साधने की कोशिश की, तो फोन नहीं उठा। बाद में रात करीब 10:20 बजे पति समर्थ सिंह, त्विषाको अचेत अवस्था में एम्स भोपाल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के उपरांत उन्हें मृत घोषित कर दिया।
दहेज के आरोप की जांच के लिए मेट्रिमोनियल साइट से भी हो पूछताछ
त्विषाकी मौत की खबर मिलते ही उनके मायके पक्ष में कोहराम मच गया। ससुराल पक्ष (पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह) इस पूरी घटना को शुरू से ही एक सामान्य डिप्रेशन और अवसाद के चलते की गई ‘आत्महत्या’ का दावा कर रहा है। समर्थ के नजदीकी सूत्रों का दावा है कि त्विषा और समर्थ की शादी लव या अरेंज मैरिज न होकर एक वैवाहिक साइट के माध्यम से हुई शादी थी। मतलब यह कि त्विषा और समर्थ ने खूब सोच समझ कर शादी की थी। शादी के समय या बाद में दहेज की कोई बात नहीं थी। समर्थ के समर्थकों का यह भी कहना है कि सीबीआई को दहेज के आरोपों के लिए उस मेट्रिमोनियल साइट की जांच करनी चाहिए जिसने दोनों को पहली बार मिलवाया था।
त्विषा के मायके वालों ने लगाए हैं पैसे मांगने के आरोप
इसके विपरीत, त्विषाके मायके पक्ष (पिता, भाई और मां) ने ससुराल वालों के दावों को सिरे से खारिज करते हुए सीधे तौर पर इसे सोची-समझी ‘निर्मम हत्या’ और ‘दहेज हत्या’ का मामला बताया है। मायके पक्ष का आरोप है कि शादी के विदाई के वक्त से ही सास गिरिबाला सिंह द्वारा रुपयों की मांग की जा रही थी और लगातार कीमती सामान व नकदी के लिए त्विषाको प्रताड़ित किया जा रहा था।
दिल्ली एम्स की टीम द्वारा दोबारा पोस्टमार्टम और भदभदा घाट पर अंतिम संस्कार
Twisha Death Mystery मामले में स्थानीय पुलिस प्रशासन की शुरुआती जांच पर जब पीड़ित परिवार ने गंभीर सवाल उठाए और शव परीक्षण (पोस्टमार्टम) की निष्पक्षता पर संदेह व्यक्त किया, तो मामला मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय तक पहुंचा। उच्च न्यायालय के सख्त एवं विशेष दिशा-निर्देशों के बाद देश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान, दिल्ली एम्स के फॉरेंसिक विशेषज्ञों की एक विशेष टीम को चार्टर्ड विमान से भोपाल भेजा गया। 24 मई को भोपाल एम्स के भीतर दिल्ली एम्स के डॉक्टरों की इस विशेषज्ञ टीम ने त्विषाशर्मा के पार्थिव शरीर का दोबारा (सेकंड पोस्टमार्टम) बेहद सूक्ष्मता और आधुनिक तकनीकों के साथ किया।
इस अत्यंत जटिल कानूनी और चिकित्सकीय प्रक्रिया के पूरे होने के बाद, त्विषाकी मौत (Twisha Death Mystery) के ठीक 12 दिन बाद शव परिजनों को सौंपा जा सका। 24 मई की ढलती शाम को भोपाल के भदभदा शमशान घाट पर गमगीन और भारी माहौल में त्विषाशर्मा का अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। त्विषाके भाई, भारतीय सेना में कार्यरत मेजर हर्षित शर्मा ने नम आंखों से अपनी लाडली बहन को मुखाग्नि दी। इस दौरान शमशान घाट पर मौजूद हर आंख नम थी और वहां उपस्थित लोग लगातार त्विषाके लिए न्याय की मांग कर रहे थे।
समर्थ और मां गिरिबाला सिंह को आमने-सामने बैठाकर हो सकती है पूछताछ
त्विषा शर्मा के भाई मेजर हर्षित शर्मा और उनके कानूनी प्रतिनिधि अंकुर पांडे के मुताबिक, Twisha Death Mystery मामले में शुरुआत से ही रसूखदार आरोपी पक्ष द्वारा अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर जांच को दबाने का प्रयास किया गया। यही कारण था कि पीड़ित परिवार को न्याय मांगने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री से मुलाकात करनी पड़ी थी, जिसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे अविलंब सीबीआई को सौंपा गया।
अब चूंकि हाईकोर्ट से पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत पूरी तरह निरस्त हो चुकी है, सीबीआई की एक विशेष विंग गिरिबाला सिंह की धरपकड़ के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। सीबीआई के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी का अगला कदम बेहद रणनीतिक होने वाला है। एजेंसी आरोपी पति समर्थ सिंह और उनकी मां गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार करने के बाद दोनों को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करने की विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर चुकी है। डॉक्टरों की शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह साफ हो चुका है कि भले ही मौत का तात्कालिक कारण फांसी लगाना हो सकता है लेकि त्विषाके शरीर पर ब्लंट ऑबजेक्ट से वार किए जाने के कई गंभीर एंटीमॉर्टम निशान मौजूद थे।
सीबीआई अब दोनों आरोपियों के बयानों में आने वाले विरोधाभास, कॉल डिटेल्स, डिलीट किए गए डिजिटल डेटा और एम्स की अंतिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट के वैज्ञानिक निष्कर्षों को आपस में मिलाकर संदिग्ध मौत के पीछे छिपे असली सच और साज़िश के चेहरे को बेनकाब करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
सुप्रीम कोर्ट में SLP दाखिल कर सकते हैं गिरिबाला के वकील
कानून के जानकारों का कहना है कि त्विषा और समर्थ की शादी अरेंज मैैरिज नहीं थी। समर्थ की मां पूर्व जज हैं इसलिए उन्होंने त्विषा की संदिग्ध मौत की जानकारी खुद पुलिस को त्विषा के घर वालों को दी। अगर पति और सास गिरिबाला में अपराध बोध होता तो वो जांच के लिए उपलब्ध होने के बजाए भूमिगत हो सकते थे। गिरिबाला सिंह, सीनियर सिटिजन और कानून की जानकार हैं इसलिए उन्होंने एफआईआर दर्ज होने के बाद अग्रिम जमानत लेकर जांच का सामना करने का फैसला किया। इन सभी तर्कों के आधार पर गिरिबाला सिंह के वकील सुप्रीम कोर्ट में जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दे सकते हैं। गिरिबाला सिंह के वकील इस तथ्य को भी एसएलपी में रख सकते हैं कि हाईकोर्ट ने फैसला सुनाने में अतिरिक्त सतर्कता और जल्दबाजी दिखाई है। गिरिबाला सिंह सीबीआई जांच में सहयोग कर रही हैं और कानून का सामना करने को तैयार हैं। गिरिबाला सिंह न तो भोपाल छोड़ जा रही है और न सीबीआई का सामना करने से डर रही है तो फिर हाईकोर्ट का देर रात फैसला सुनाने का फैसला चौंकाने वाला है।
