Operation Lotus: राघव चड्ढा प्लस 6! निगाहें पंजाब पर निशाना झारखण्ड पर

Operation Lotus: राघव चड्ढा प्लस 6! निगाहें पंजाब पर निशाना झारखण्ड पर

Operation Lotus: राज्यसभा सासंद राघव चड्ढा समेत कुल सात सांसदों के बीजेपी में शामिल हो जाने के ऐलान ने इंडी गठबंधन की चूलें हिला दीं हैं। कहा जा रहा है कि इस बगावत का असर सभी गैर एनडीए सरकार वाले राज्यों पर पड़ सकता है। महिला आरक्षण बिल गिराए जाने से क्षुब्ध इंडी गठबंधन के सांसद भी बगावत कर सकते हैं। कांग्रेस के साथ-साथ राष्ट्रीय जनता दल जैसी पार्टियों के शीर्ष नेता लगातार अपने-अपने सांसदों से संपर्क साध रहे हैं और उनकी मिजाजपुर्सी में जुटे हुए हैं। कांग्रेस को डर है कि कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल से आने वाले राज्यसभा सांसद बगावत का झण्डा उठा सकते हैं। तो वहीं तेजस्वी यादव को खौफ सता रहा है कि बगावत की बहती गंगा में कहीं उनके सांसद बीजेपी के खेमे में न जाकर बैठ जाएं। तेजस्वी यादव तो इतना नर्वस हो चुके हैं कि उन्होंने मीडिया से कहा कि जो डर गया या जो बिक गया वो बीजेपी के साथ चला गया।

सबसे ज्यादा संवेदनशील तो झारखण्ड बना हुआ है। जमीन घोटाले में ईडी की कार्रवाई और जेल जाने के बावजूद चीफ मिनिस्टर हेमंत सोरेन के संपर्क मोटा भाई से लगातार बने हुए हैं। झारखण्ड में किस दिन-किस समय ऑप्रेशन लोटस हो जाए कोई नहीं जानता। राज्यपाल संतोष गंगवार से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुलाकात शिष्टाचार के नाते होती हैं लेकिन संदेश वाहक बहुत सी खबरें इधर से उधर पहुंचा रहे हैं। झारखण्ड में विधानसभा का सत्ता पलटने का गणित और भी बहुत आसान है। हेमंत सोरेन 34 विधायकों के साथ मुख्यमंत्री हैं। उन्हें कांग्रेस के 16 विधायकों का समर्थन है। वहीं बीजेपी के पास 21 विधायक हैं। हालांकि 24 अप्रैल को आई सियासी सुनामी के बाद 245 सदस्यों वाले उच्च सदन राज्यसभा में अब एनडीए को बहुमत हासिल हो चुका है।

झारखण्ड की सियासत पर नजर रखने वाले लोग कहते हैं कि हेमंत सोरेन के लिए कांग्रेस के साथ स्थिति सहज नहीं है। गठबंधन की यह तकलीफ अब सिर्फ अंदरूनी खींचतान नहीं, बल्कि राजनीतिक स्वायत्तता और सत्ता-संतुलन का सवाल बन चुकी है। झारखण्ड में

हेमंत सरकार कांग्रेस की बैसाखियों पर है। कांग्रेस आलाकमान जानता है कि अगर हेमंत पर ज्यादा दबाव बनाया तो वो बीजेपी के साथ जा सकते हैं लेकिन झारखण्ड राज्य का कांग्रेसी नेतृत्व का व्यवहार झारखण्ड सरकार के झुंझलाहट का कारण बनता रहा है। नीतिगत फैसलों में दखल और संगठनात्मक दबाव ने हेमंत सोरेन को असहज कर रखा है। हाल ही में महिला आरक्षण बिल संसद में पास न होने का दुष्परिणाम हेमंत को झेलना पड़ सकता है। क्योंकि बीजेपी सभी राज्यों में तूफानी गति से इस मसलह को उठा रही है। हेमंत को डर है कि कांग्रेस यानी इंडी गठबंधन के साथ रहने से कहीं उनकी जमीन ही न खिसक जाए।

इससे पहले एनडीए शिबु सोरेन को भारत रत्न देकर हेमंत सोरेन के प्रति अपनी सद्भावना प्रकट कर चुका है। हेमंत सोरेन पर एनडीए खासतौर पर नरेंद्र मोदी और अमित शाह का एक अहसान भी है। मौजूदा सियासी हालात ऐसे हैं कि वो अहसान भी चुका सकते हैं और महिला आरक्षण के सहारे कांग्रेस से पीछा छुड़ा सकते हैं।

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