Crime: रीवा जिले के चर्चित एवं विवादित जिला कांग्रेस पदाधिकारी अरुण गौतम उर्फ “कमांडो” ने अपने विरुद्ध शासकीय कार्य में बाधा डालने के आरोप में दर्ज प्रकरण के लगभग एक माह बाद सुहागी थाने में आत्मसमर्पण कर दिया। बताया जा रहा है कि जिला न्यायालय तथा उच्च न्यायालय खंडपीठ जबलपुर द्वारा उसके पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए अग्रिम जमानत आवेदन निरस्त किए जाने के बाद उसने समर्पण किया।
अरुण गौतम उर्फ कमांडो के विरुद्ध मध्यप्रदेश के रीवा जिले सहित उत्तरप्रदेश के प्रयागराज के विभिन्न थानों में कई गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज बताए जाते हैं। पूर्व में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत भी कार्रवाई हो चुकी है। रीवा जिले के सुहागी एवं चाकघाट थानों में भी उसके विरुद्ध प्रकरण दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
बताया जाता है कि आत्मसमर्पण के बाद अरुण गौतम ने फेसबुक एवं सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अपने समर्थकों से परिवहन विभाग के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान को जारी रखने की अपील की।
विभागीय सूत्रों का आरोप है कि भ्रष्टाचार के मुद्दे की आड़ में शासन एवं सरकार की छवि धूमिल करने, ब्लैकमेलिंग तथा दलाली जैसे कार्य किए जा रहे थे। विभागीय हलकों में यह चर्चा भी है कि पिछले चार महीनों के भीतर लग्जरी वाहन फॉर्च्यूनर एवं इनोवा की खरीदी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक अरुण गौतम भविष्य में त्योंथर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक बनने की राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखता है। आरोप है कि परिवहन विभाग के चेकप्वाइंटों एवं मोटर व्हीकल एक्ट के पालन को लेकर चलाए गए तथाकथित “ऑपरेशन” के माध्यम से न केवल मध्यप्रदेश बल्कि सीमावर्ती राज्यों में भी कानून व्यवस्था प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा था।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इससे परिवहन विभाग के राजस्व पर भी असर पड़ा और विगत पांच महीनों में करोड़ों रुपये के ई-चालान की वसूली प्रभावित हुई।
बताया जाता है कि चेकप्वाइंटों पर तथाकथित भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी के आरोप लगाते हुए अरुण गौतम एवं उसके समर्थकों द्वारा कई बार विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ अभद्रता, धौंसपट्टी तथा मारपीट जैसी घटनाएं भी की गईं। चाकघाट चेकप्वाइंट के समीप झोपड़ी में आगजनी की घटना भी उस समय समाचारों की सुर्खियों में रही थी। इन घटनाओं के बाद विभागीय अधिकारी-कर्मचारी भय के माहौल में कार्य करने को मजबूर बताए जा रहे थे, जबकि परिवहन माफिया बेखौफ होकर सक्रिय हो गया था।
सूत्रों के अनुसार कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बनते जा रहे अरुण गौतम उर्फ कमांडो एवं उसके समर्थकों के विरुद्ध अब पुलिस-प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। बताया जा रहा है कि उसके विरुद्ध जिलाबदर की कार्रवाई भी की गई है। वहीं उसकी पत्नी एवं दोनों बेटों द्वारा भावुक अपील किए जाने की चर्चा भी सामने आई है।