HAM Foundation सूर्य के तीखे तेवर और भीषण गर्मी के चलते न केवल इंसान, बल्कि पशु, पक्षी भी व्याकुल हैं। बढ़ते तापमान के कारण जल स्रोत सूखने लगे हैं, जिससे बेजुबान जीव बूंद-बूंद पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं। इसी संवेदनशीलता को समझते हुए हम फाउंडेशन के साथियों द्वारा नगर के विभिन्न स्थानों पर पक्षियों और आवारा जानवरों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था की गई है।
पेड़ों पर लटकाए सकोरे, सडक़ों पर रखे जलपात्र
फाउंडेशन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मिलकर नगर के प्रमुख चौराहों, उद्यानों और सडक़ किनारे पेड़ों पर मिट्टी के कटोरे सकोरे बांधे, साथ ही जमीन पर बड़े मिट्टी के बर्तन रखे गए, ताकि गौवंश और अन्य जानवर अपनी प्यास बुझा सकें। इस कार्य में मुख्य रूप से जिला महामंत्री नितिन जैन, शहर अध्यक्ष विवेक विक्की ऐड़े, शुभम जायसवाल, कालू जेठवानी, पंकज जैन, चेम्पो लिमजे, मयूर जायसवाल, अनुराग जैन, शशांक जायसवाल, रोशन गोखले, ओमप्रकाश लांजेवार और आशीष राहंगडाले सहित अन्य साथियों का सक्रिय सहयोग रहा।
गर्मियों में जल का महत्व
भीषण गर्मी के दौरान पक्षियों और जानवरों के लिए पानी का महत्व जीवन और मृत्यु के बीच की कड़ी बन जाता हैं। डिहाइड्रेशन से बचाव- पक्षियों का मेटाबॉलिज्म बहुत तेज होता है, गर्मी में शरीर का पानी सूखने से उनकी तत्काल मृत्यु हो सकती है।
प्राकृतिक जलस्रोतों का अभाव
शहरीकरण के कारण प्राकृतिक तालाब और गड्ढे सूख चुके हैं, ऐसे में ये कृत्रिम जलपात्र ही उनका एकमात्र सहारा हैं। पक्षी हमारे पर्यावरण का अभिन्न अंग हैं। उनकी रक्षा करना हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है। इंसान तो मांगकर पानी पी सकता है, लेकिन ये बेजुबान अपनी प्यास भी व्यक्त नहीं कर सकते। हम फाउंडेशन की यह छोटी सी कोशिश इन जीवों को नया जीवन देने का एक प्रयास है।
