CBI Action त्विषा की सास पूर्व जज गिरिबाला सिंह गिरफ्तार, सीबीआई कोर्ट में पेश कर मांगेगी रिमांड

CBI Action त्विषा की सास पूर्व जज गिरिबाला सिंह गिरफ्तार, सीबीआई कोर्ट में पेश कर मांगेगी रिमांड

CBI Action मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से लेकर देश की शीर्ष जांच एजेंसी तक को हिलाकर रख देने वाले बहुचर्चित ‘ट्विशा शर्मा डेथ मिस्ट्री’ (Twisha Death Case) में आखिरका सीबीआई ने आपेक्षित कदम उठाते हुए गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार कर ही लिया। सीबीआई गिरिबाला सिहं को मेडिकल के लिए लेकर जाएगी और फिर उन्हें ड्यूटी मैजिस्ट्रेट के सामने पेश कर रिमांड की मांग करेगी। उम्मीद है कि सीबीआई को गिरिबाला सिंह की रिमांड मिल जाएगी।

गिरफ्तारी से ठीक पहले कटारा हिल्स स्थित उनके आवास पर सीबीआई की टीम ने करीब चार घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान पूर्व जज जांच में लगातार असहयोग करती रहीं, जिसके बाद उनके रसूख और प्रभाव को दरकिनार करते हुए जांच एजेंसी ने उन्हें हिरासत में ले लिया। 33 वर्षीय एक्टर और मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के इस मामले ने अब एक बेहद गंभीर और रोंगटे खड़े कर देने वाले आपराधिक षड्यंत्र का रूप ले लिया है।

हाईकोर्ट का आदेश और CBI का शिकंजा

28 मई 2026 की सुबह तक पूर्व जिला जज और वर्तमान में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की अध्यक्ष गिरिबाला सिंह को सत्र न्यायालय से मिली अग्रिम जमानत का सुरक्षा कवच हासिल था। लेकिन बुधवार देर रात मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस देवनारायण मिश्र की एकल पीठ ने राज्य सरकार और ट्विशा के माता-पिता की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इस अग्रिम जमानत को खारिज (Quash) कर दिया।

हाईकोर्ट का आदेश सार्वजनिक होते ही दिल्ली से आई सीबीआई की स्पेशल क्राइम यूनिट (SC-III) ने बिना एक पल गंवाए अपनी रणनीति तैयार की। गुरुवार दोपहर को सीबीआई की एक भारी-भरकम टीम भोपाल के पॉश इलाके कटारा हिल्स स्थित गिरिबाला सिंह के बंगले पर धमक पड़ी।

पूछताछ की इनसाइड स्टोरी: सूत्रों के अनुसार, बंद कमरे में जब सीबीआई के अधिकारियों ने पूर्व जज के सामने सवालों की फेहरिस्त रखी, तो वे अपनी न्यायिक पृष्ठभूमि का हवाला देकर जांच भटकाने की कोशिश करने लगीं। सीबीआई ने उनसे मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर जवाब मांगे:

  • ट्विशा के शरीर पर मिले चोट के निशान कैसे आए?
  • घटना की रात आखिरी 20 मिनट में ऐसा क्या हुआ कि फोन कटना और मौत की खबर आना एक साथ हुआ?
  • क्या रसूख का इस्तेमाल कर सबूतों से छेड़छाड़ की गई?

लगभग चार घंटे तक चली इस मैराथन पूछताछ में गिरिबाला सिंह के जवाबों में भारी विरोधाभास देखने को मिला। उनके लगातार असहयोग और कस्टोडियल इंटेरोगेशन (हिरासत में पूछताछ) की जरूरत को देखते हुए सीबीआई ने उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया।

12 मई के आखिरी 20 मिनट का रहस्य

ट्विशा शर्मा की मौत १२ मई २०२६ की रात को भोपाल के कटारा हिल्स थाना क्षेत्र स्थित उनके ससुराल में हुई थी। ट्विशा के परिवार द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर (नंबर 133/2026) के मुताबिक, उस रात जो कुछ हुआ वह किसी खौफनाक थ्रिलर फिल्म जैसा था।

शाम से ही ट्विशा परेशान थीं। रात के करीब 9:41 बजे ट्विशा अपने फोन पर दिल्ली में मौजूद अपनी मां राशि शर्मा से बात कर रही थीं। बातचीत के दौरान ही अचानक बैकग्राउंड में उनके पति समर्थ सिंह (Samarth Singh) के चिल्लाने की आवाज आने लगी। समर्थ बेहद आक्रामक लहजे में ट्विशा से पूछ रहा था कि “तुम किससे बात कर रही हो?” और कुछ दस्तावेजों की मांग कर रहा था। विवाद इतना बढ़ा कि फोन अचानक कट गया।

इसके बाद अगले 20  मिनट तक ट्विशा का फोन लगातार ‘अनरीचेबल’ या अनुत्तरित आता रहा। घबराकर ट्विशा की मां ने अपनी समधन गिरिबाला सिंह के नंबर पर कॉल किया। आरोप है कि गिरिबाला सिंह ने बेहद ठंडे और क्रूर लहजे में फोन उठाया और सिर्फ इतना कहा— वह अब इस दुनिया में नहीं है” (She is no more) और कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया।

इसके ठीक बाद, रात लगभग 10 बज कर 20 मिनट पर पति समर्थ सिंह ट्विशा को लेकर एम्स (AIIMS) भोपाल पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों को बताया गया कि ट्विशा ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है। आधी रात को एम्स के डॉक्टर कार्तिक ने पुलिस को इस संदिग्ध मौत की सूचना दी।

आत्महत्या का दावा बनाम हत्या की थ्योरी: पोस्टमार्टम और चैट के खुलासे

शुरुआत में ससुराल पक्ष ने इसे विशुद्ध रूप से डिप्रेशन और आत्महत्या का मामला बताने की पूरी कोशिश की। पूर्व जज का परिवार होने के कारण स्थानीय भोपाल पुलिस पर भी जांच में ढिलाई बरतने और आरोपियों को बचाने के गंभीर आरोप लगे। मृतका के पिता नवनिधि शर्मा लगातार आरोप लगाते रहे कि उनकी बेटी की हत्या की गई है और रसूख के दम पर इसे सुसाइड का रूप दिया जा रहा है।

लेकिन जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट (Post-Mortem Report) और मेडिकल क्वेरी रिपोर्ट सामने आई, तो मामले की पूरी दिशा ही बदल गई।

शरीर पर मिले 6 अन्य चोटों के निशान

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण ‘एंटीमॉर्टम हैंगिंग’ (फांसी लगाने से पहले या उस दौरान) बताया गया था, लेकिन इसके साथ ही ट्विशा के शरीर पर 6 अन्य गंभीर चोटों के निशान पाए गए। इनमें से चार चोटें उसके बाएं हाथ पर थीं, एक चोट अनामिका उंगली (Ring Finger) पर और एक गहरी चोट उसके सिर पर थी। मेडिकल एक्सपर्ट्स की क्वेरी रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि ये चोटें फांसी के फंदे से शव को उतारने या अस्पताल ले जाने के दौरान नहीं लग सकती थीं। ये चोटें सीधे तौर पर मौत से ठीक पहले हुए कड़े संघर्ष (Scuffle) की गवाही दे रही थीं।

अबॉर्शन  की थ्योरी में सच क्या

सीबीआई ने जब कोर्ट में दलीलें दीं, तो अदालत भी सन्न रह गई। जांच एजेंसी ने ट्विशा के डिलीट किए जा चुके व्हाट्सएप चैट्स (WhatsApp Chats) को रिकवर किया। इन चैट्स से खुलासा हुआ कि शादी के बाद से ही ट्विशा को दहेज के लिए लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। उनके ससुराल वालों का कहना था कि जो दहेज दिया गया है, वह उनके ‘जज वाले स्टेटस और स्टैंडर्ड’ के मुताबिक नहीं है।

इससे भी ज्यादा चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि जब ट्विशा गर्भवती (Pregnant) हुईं, तो सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह ने उनके चरित्र पर शक करना शुरू कर दिया। उन पर आरोप लगाए गए कि यह बच्चा समर्थ का नहीं है। सीबीआई के मुताबिक, ट्विशा को मानसिक रूप से इस कदर तोड़ा गया कि उन्हें जबरन गर्भपात (Forced Abortion) कराने के लिए मजबूर किया गया। मौत से कुछ दिन पहले ट्विशा ने अपने माता-पिता को भेजे संदेशों में लिखा था कि “मेरा यहां दम घुट रहा है, मुझे यहां से ले जाओ।”

 जल्दबाजी में बेल और सबूतों से छेड़छाड़

ट्विशा के माता-पिता की तरफ से कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा और राज्य सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि किस तरह इस मामले में न्याय व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश की गई।

12 मई को मौत होती है, लेकिन रसूख के कारण पुलिस तीन दिनों तक एफआईआर दर्ज नहीं करती। इस बीच, 14 मई को ही गिरिबाला सिंह अग्रिम जमानत की अर्जी लगा देती हैं और 15 मई को भोपाल की सत्र अदालत बिना डायरी का ठीक से अवलोकन किए, बिना आरोपी को एक भी दिन जांच में शामिल किए, ‘हड़बड़ी’ में अग्रिम जमानत मंजूर कर लेती है।

एसआईटी के गंभीर आरोप: जमानत मिलने के बाद पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने न तो जांच पुलिस का सहयोग किया और न ही कोई पछतावा दिखाया। उल्टा, उन्होंने सोशल मीडिया पर ट्विशा के चरित्र को बदनाम करने के लिए एक ‘चुनिंदा और एडिटेड वीडियो क्लिप’ लीक कर दी, ताकि पब्लिक नैरेटिव और गवाहों को प्रभावित किया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और आगे की राह

स्थानीय पुलिस की जांच में साफ तौर पर दिख रहे पक्षपात को देखते हुए ट्विशा के परिवार ने न्याय की गुहार लगाई। आखिरकार, सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद 25 मई 2026 को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने इस मामले को अपने हाथों में लिया और दिल्ली में नए सिरे से भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।

सीबीआई ने इस मामले में अब तक दो बड़ी गिरफ्तारियां की हैं। पहला  पति समर्थ सिंह जिसे स्थानीय कोर्ट ने पहले ही सीबीआई की कस्टडी रिमांड में भेज दिया है। बुधवार को सीबीआई की टीम समर्थ को उसी कटारा हिल्स वाले बंगले पर लेकर गई थी, जहां क्राइम सीन को री-क्रिएट (Crime Scene Re-creation) किया गया। दूसरी  सास गिरिबाला सिंह जिनकी चार घंटे की पूछताछ के बाद आज गिरफ्तारी हो चुकी है।

आगे क्या? गिरफ्तारी के बाद अब सीबीआई गिरिबाला सिंह को भोपाल की सक्षम अदालत में पेश कर उनकी पुलिस रिमांड की मांग करेगी। चूंकि समर्थ सिंह पहले से ही २९ मई तक सीबीआई की रिमांड पर है, जांच एजेंसी अब मां और बेटे को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ कर सकती है।

गिरिबाला सिंह को झटके पे झटका

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का वो आदेश जो आधी रात बाद दिया गया 

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