Jabalpur Bargi Dam रातभर चला रेस्क्यू, 23 को बचाया, 9 की मौत, तलाश जारी

Jabalpur Bargi Dam रातभर चला रेस्क्यू, 23 को बचाया, 9 की मौत, तलाश जारी

Jabalpur Bargi Dam नर्मदा नदी पर बने जबलपुर के बरगी डैम में गुरुवार की शाम को हुए हादसे में 23 पर्यटकों को बचा लिया गया है। शाम से शुरु हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन सुबह तक जारी रहा है। रेस्क्यू में एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों के साथ स्थानीय पुलिस प्रशासन की टीमें भी जुटी रहीं। घटना स्थल पर राज्य के मंत्री राकेश सिंह, विधायक नीरज सिंह, जिलाधिकारी राघवेंद्र सिंह और एसपी सम्पत कुमार भी रात भर घटना स्थल पर बचाव ऑपरेशन को दिशा निर्देश देते रहे।

इस हादसे के बारे में प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि गुरुवार की शाम अचानक 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली आंधी ने शांत पानी में सुनामी जैसी लहरें पैदा कर दीं।हमें लगा कि यह केवल सामान्य आंधी है, लेकिन देखते ही देखते लहरें क्रूज की खिड़कियों तक आने लगीं। चालक ने नाव को मोड़ने और किनारे लगाने की कोशिश की, लेकिन हवा का दबाव इतना अधिक था कि क्रूज एक तरफ झुक गया और देखते ही देखते पानी में समा गया।

रात भर डटे रहे डीएम-एसपी

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय मछुआरे अपनी नावों के साथ मौके पर पहुंचे, जिन्होंने शुरुआती दौर में कई लोगों को पानी से बाहर निकाला। इसके बाद जबलपुर से जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक भारी पुलिस बल और रेस्क्यू टीमों के साथ घटना स्थल पर पहुंचे।

 

एनडीआरएफ ने संभाला मोर्चा

एनडीआरएफ की टीम ने मोर्चा संभालते ही अत्याधुनिक उपकरणों का उपयोग शुरू किया। रात का अंधेरा और बांध का गहरा पानी सबसे बड़ी बाधा बना। बचाव दल ने हाई-मास्ट लाइट्स और फ्लड लाइट्स की मदद से सर्च ऑपरेशन जारी रखा। शुक्रवार सुबह की सबसे बड़ी कामयाबी यह रही कि गैस कटर की मदद से क्रूज के उन हिस्सों को काटा गया जहाँ हवा के दबाव (Air Pockets) के कारण कुछ यात्रियों के फंसे होने की आशंका थी। अब तक कुल 23 लोगों को अस्पताल पहुँचाया गया है, जिनमें से अधिकांश की स्थिति अब खतरे से बाहर है।

लाइफ जैकेट क्यों नहीं दी गई

जैसे-जैसे हादसे की परतें खुल रही हैं, प्रबंधन और क्रूज ऑपरेटरों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हादसे में बचे कुछ पर्यटकों ने आरोप लगाया कि क्रूज पर सवार सभी पर्यटकों को लाइफ जैकेट नहीं दी गई थीं।  नर्मदा जी में क्रूज भेजने से पहले हर यात्री लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य होता है। प्रशासन ने कहा है कि रेस्क्यू पूरा होने के बाद इस बात की तह तक जाया जाएगा कि सभी यात्रियों को लाइफ जैकेट क्यों नहीं दी गईं थीं।

क्रूज में तैनात नहीं थे ट्रेंड गोताखोर

प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आ रही है कि क्रूज की स्वीकृत लगभग 70 यात्रियों की थी। हादसे के समय क्रूज में 40 लोग सवार थे। पानी में किसी अनहोनी से बचाने के लिए क्रूज पर गोताखोर तैनात नहीं थे। क्रूज का पायलट क्रूज को बीच पानी में ले गया लेकिन जैसे ही तूफान ने जोर पकड़ा तो वो हड़बड़ा गया। उसने क्रूज को जल्दबाजी में मोड़ने की कोशिश की। हड़बड़ाहट में सैलानी टकरा गए और क्रूज की एक तरफ लुढ़क गए। जिससे मुड़ते समय क्रूज का संतुलन गड़बड़ाया और डूबता चला गया।

चेतावनी की अनदेखी

प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि जब मौसम विभाग ने पहले ही आंधी-तूफान का ‘येलो अलर्ट’ जारी किया था तो इसके बावजूद क्रूज को गहरे पानी में ले जाने की अनुमति क्यों दी गई?

मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख की फौरी राहत

मुख्यमंत्री ने इस घटना को “अत्यंत हृदयविदारक” बताते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। जबलपुर कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में क्रूज ऑपरेटर और पर्यटन विभाग के लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्कम कार्रवाई के अलावा गैर इरादतन हत्या का मुकदमा भी दर्ज करवाया जा सकता है।

इससे पहले  गुरुवार देर रात  लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने स्वयं मौके पर पहुंचे और उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन की कमान खुद संभाली। उन्होंने मीडिया से चर्चा में कहा, “हमारी पहली प्राथमिकता लापता लोगों को ढूंढना है। यह समय राजनीति का नहीं बल्कि उन परिवारों के साथ खड़े होने का है जिन्होंने अपनों को खोया है।”