Saudi Arab ईरान-अमेरिका के बीच युद्धविराम की नौटंकी के बहाने शांतिदूत बनने चले पाकिस्तान के सामने आगे कुआं पीछे खाई वाली स्थिति आ गई है। अमेरिका के दबाव में आईएमएफ पाकिस्तान को नया बेल आउट पैकेज देने को तो तैयार हो गया है लेकिन आईएमएफ ने इतनी शर्ते जोड़ दी हैं कि उनको पूरा करते-करते पाकिस्तान की सरकारों का तेल निकल जाएगा।
आईएमएफ की शर्तें लागू करने से पाकिस्तान में सुरसा की तरह बढ़ेगी मंहगाई
अब हालात ये हैं कि अगर कंगाल पाकिस्तान आईएमएफ की शर्तों पर साइन नहीं करता तो एक दिन भी देश चलाना मुश्किल हो जाएगा और अगर साइन करता है तो इतनी 15 प्रतिशत से ऊपर जा सकती है। पाकिस्तानियों की परचेजिंग कैपेसिटी और कम हो जाएगी। अवाम पर बिजली और गैस के लिए पहले से ज्यादा पैसे चुकाने पड़ेंगे। गैस की कीमतों में बढ़ोतरी तो जुलाई से हो जाएगी और बिजली कीमतें जनवरी 2027 में बढ़ानी ही पड़ेंगी। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी करनी पड़ेगी। आईएमएफ की शर्तो के मुताबिक पाकिस्तान का सरकार को टैक्स कलेक्शन बढ़ाना होगा, जिसका सीधा असर रोजमर्रा की वस्तुओं जैसे आटा, दाल, और चीनी की कीमतों पर पड़ेगा।
बेईमान हैं पाकिस्तान के नेता और अफसर, संपत्तियों की सार्वजनिक घोषणा करनी होगा
आईएमएफ की शर्त के मुताबिक सभी प्रांतों में समान कृषि आयकर कानून लागू करने की शर्त से कृषि इनपुट लागत बढ़ेगी, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी आ सकती है। आईएमएफ को पाकिस्तान के अफसरों और नेताओं की नेकनीयती पर जरा भी भरोसा नहीं है इसलिए एक प्रमुख शर्त यह जोड़ी गई है कि केंद्र सरकार के जितने भी बड़े अफसर और नेता हैं उन्हें इसी साल दिसंबर तक अपनी आय और संपत्ति की सार्वजनिक घोषणा करनी होगी।
एनएसईजेड को खत्म करना होगा, नया एनएसईडजेड नहीं बना सकेंगी पाकिस्तान सरकार
आईएमएफ ने पाकिस्तान से यह भी कहा है एनएसईजेड के नाम पर जो लूट मची हुई है उसे तत्काल बंद करना होगा। यानी पाकिस्तान में अब कोई नया एनएसईजेड नहीं बनेगा और जो पुराने हैं उन्हें भी तत्काल बंद करना होगा। इसके लिए एक अथॉरिटी बनानी होगी जो पुराने एनएसईजेड को क्रमबद्ध तरीके से बंद करेगी
टैक्स में दी जा रही छूट की सुविधा खत्म करनी होगी तब मिलेगा नया कर्जा
इसका मकसद मौजूदा टैक्स छूट जैसी सुविधाओं को धीरे-धीरे खत्म करना और मुनाफे के आधार पर मिलने वाली राहत की जगह लागत के आधार पर राहत देना है। आईएमएफ ने और बात को लेकर चिंता जताई गई है कि सरकार कराची में 6000 एकड़ जमीन एसईजेड डेवलपर्स को बिना किसी शुल्क के लीज पर देने की योजना बना रही है। आईएमएफ ने साफ तौर पर कहा है कि अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान को आर्थिक पैकेज रोक दिया जाएगा।
पारदर्शी नहीं पाकिस्तान सरकार की कार्यप्रणाली
अक्टूबर 2024 में आईएमएफ ने कहा था कि पाकिस्तान ने रियल एस्टेट, कृषि, मैन्युफैक्चरिंग और ऊर्जा क्षेत्र को छूट देने की जो प्रणाली विकसित की है वो जो पारदर्शी नहीं है। इसके अलावा स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एसईजेड) की संख्या भी काफी बढ़ गई है। इसलिए शर्त रखी गई है कि मौजूदा एसईजेड को अगले दस साल में धीरे-धीरे खत्म किया जाएगा और नए एसईजेड नहीं बनाए जाएंगे। एक और नई शर्त यह है कि बिजनेस माहौल को बेहतर बनाने के लिए एक रेगुलेटरी रजिस्ट्री बनाई जाए।
नए कर्ज लेने से पहले पुरानी शर्तों को पूरा करे पाकिस्तान सरकार
आईएमएफ ने पाकिस्तान सरकार को याद दिलाया है कि अक्टूबर 2024 की शर्तों में शामिल था कि सरकार केंद्र और राज्यों के स्तर पर होने वाली सभी सरकारी खरीद में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करनी होगी। इसके लिए वर्ल्ड बैंक की मदद से बनाए गए इलेक्ट्रॉनिक पाकिस्तान एक्विजिशन एंड डिस्पोजल सिस्टम (ई-पैड्स) सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। जो कि पाकिस्तान ने अभी तक लागू नहीं किया है
विदेशी मुद्रा भण्डार में कमी के दबाव से जूझ रहा है पाकिस्तान
आईएमएफ ने इस बात पर चिंता जताई है कि पाकिस्तान पर इस समय विदेशी भण्डार बहुत कम होने का दबाव भी है। हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने पाकिस्तान से अपने 3.5 अरब डॉलर के जमा पैसे वापस ले लिए थे जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर तुरंत दबाव बढ़ गया। हालांकि सऊदी अरब ने पाकिस्तान को आठ बिलियन डॉलर की फौरी राहत देने से महंगाई कुछ कम हुई है, लेकिन ब्याज दरों ने पाकिस्तान के उद्योगपतियों और बिजनैसमैन का कचूमर निकला जा रहा है। इससे निवेश और निर्यात दोनों प्रभावित हो रहे हैं, और अर्थव्यवस्था धीमी रफ्तार में फंसी हुई है। कुल मिलाकर, पाकिस्तान की बाहरी आर्थिक स्थिति अभी भी काफी कमजोर बनी हुई है।
अमेरिका-ईरान के बीच दलाली से भी आसिम मुनीर और शहबाज के हाथ खाली
अमेरिका और ईरान के बीच दलाली कर पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहाबाज शरीफ ने पैसा कमाने की बात सोची थी। आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ ने काफी झूठ और सच भी बोला लेकिन ऐसा लग रहा है कि ईरान अपने हितों का बलिदान देने को राजी नहीं है। इसलिए पाकिस्तान की कथित शांतिदूत बनने की साजिश भी नाकामयाब होती दिखाई दे रही है। अब पाकिस्तान के सामने एक ही रास्ता बचा है कि वो अपनी अवाम पर टैक्सों का बोझ और बढाए और आईएमएफ के डाक्युमेंट पर साइन करे ताकि सरकारी अफसरों और कर्मचारियों को महीने के आखिर में तनख्वाह दी जा सके।