PM Modi ने गंगटोक में फुटबॉल खेली, कोलकाता में खेला हो गया, ममता दीदी देखती रह गई

PM Modi ने गंगटोक में फुटबॉल खेली, कोलकाता में खेला हो गया, ममता दीदी देखती रह गई

PM Modi ने खेला कर दिया। पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘फुटबॉल’ केवल एक खेल नहीं, बल्कि एक भावना है। 2021 के विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी ने ‘खेला होबे’ (खेल होगा) का नारा देकर बीजेपी को घेरा था। लेकिन 2026 के इस चुनावी रण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा दांव चला है जिसने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के रणनीतिकारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

गंगटोक में मोदी का ‘फुटबॉल अवतार’

गंगटोक में 28 अप्रैल की सुबह युवाओं के साथ फुटबॉल खेलकर, ममता दीदी के साथ खेला कर दिया। 2022 के चुनाव में ममता दीदी, फुटबॉल लेकर बीजेपी को चुनौती देती और बोलती थी खेला होबे..। पांच साल बाद इस बार मतदान से ठीक 24 घण्टे पहले पीएम मोदी ने युवाओं के साथ फुटबॉल खेलकर खेला कर दिया है।

सुबह-सुबह सिक्किम की ठंडी हवाओं के बीच जब पीएम मोदी ट्रैकसूट पहनकर मैदान में उतरे, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि उनकी हर किक का सीधा असर कोलकाता की गलियों में होगा। यह केवल एक खेल नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक चाल थी, जिसका उद्देश्य बंगाल के युवाओं को एक सीधा संदेश देना था।

फुटबॉल: बंगाल की आत्मा और पीएम का कनेक्शन

फुटबॉल को प. बंगाल की आत्मा कहा जाता है। प. बंगाल में 500 से ज्यादा फुटबॉल क्लब हैं। मोहन बागान और ईस्ट बंगाल जैसे क्लबों की प्रतिद्वंद्विता बंगाल के घर-घर की कहानी है। पीएम मोदी बखूबी जानते हैं कि बंगाल के युवाओं को जोड़ने का सबसे आसान रास्ता उनके जुनून यानी फुटबॉल से होकर गुजरता है।

29 अप्रैल को कोलकाता में मतदान है। अकेले कोलकाता में सवा सौ से ज्यादा फुटबॉल क्लब हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि फुटबॉल प. बंगाल के युवाओं के दिल में है। मतदान से ठीक एक दिन पहले फुटबॉल के मैदान पर पसीना बहाते प्रधानमंत्री की तस्वीरें बंगाल के उन इलाकों में पहुंच रही हैं, जहां फुटबॉल की चर्चा राजनीति से ज्यादा होती है।

दिल से दिल का रिश्ता और वायरल मीम्स

पीएम मोदी ने प. बंगाल के युवाओं के दिल से दिल का रिश्ता जोड़ने के लिए ही फुटबॉल खेली थी। इसका असर भी देखा जा रहा है। पीएम मोदी के फुटबॉल खेलते हुए मीम प. बंगाल में वायरल हैं। सोशल मीडिया पर जहां एक तरफ ममता बनर्जी का ‘व्हीलचेयर पर फुटबॉल उछालना’ याद किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पीएम मोदी का युवाओं के साथ मैदान पर सक्रिय होना एक नई ऊर्जा के रूप में देखा जा रहा है। बंगाल के युवा व्हाट्सएप ग्रुप्स और फेसबुक पर इन तस्वीरों को ‘असली खेला’ बताकर शेयर कर रहे हैं।

‘खेला होबे’ बनाम ‘विकास होबे’

ममता बनर्जी का ‘खेला होबे’ नारा 2021 में जीत का मंत्र बना था, लेकिन 2026 में बीजेपी ने इसे विकास और स्पोर्ट्स कल्चर से जोड़ दिया है। पीएम मोदी ने गंगटोक की पिच से यह संदेश दिया है कि राजनीति केवल बयानों का खेल नहीं है, बल्कि युवाओं के साथ उनके स्तर पर जाकर जुड़ने का नाम है।

कोलकाता की सभी सीटों पर होने वाले मतदान से पहले यह ‘विजुअल मैसेजिंग’ बीजेपी के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। उत्तर कोलकाता और दक्षिण कोलकाता की गलियों में, जहां फुटबॉल क्लबों का भारी प्रभाव है, वहां पीएम मोदी की इस पहल को एक सकारात्मक ‘स्पोर्ट्समैन स्पिरिट’ के रूप में देखा जा रहा है।

कोलकाता मतदान और युवाओं का रुझान

विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल का साइलेंट वोटर, खासकर पहली बार मतदान करने वाला युवा, प्रतीकों को बहुत गहराई से देखता है। कोलकाता के सवा सौ क्लबों से जुड़े हजारों फुटबॉल प्रेमी युवाओं के लिए पीएम का यह कदम उन्हें करीब महसूस कराने वाला है। जब पीएम मोदी फुटबॉल को किक मारते हैं, तो वह बंगाल की उस पहचान को अपना रहे होते हैं जिस पर अब तक टीएमसी का एकाधिकार माना जाता था।

क्या पीएम मोदी ने ममता दीदी के गोल पोस्ट पर बॉल दाग दी

29 अप्रैल का दिन बंगाल की राजनीति के लिए निर्णायक है। पीएम मोदी ने मतदान से ठीक 24 घंटे पहले फुटबॉल खेलकर अपनी पिच तैयार कर ली है। अब देखना यह होगा कि कल जब बंगाल का मतदाता पोलिंग बूथ पर जाएगा, तो उसके दिमाग में ममता बनर्जी का ‘खेला’ होगा या पीएम मोदी का यह ‘फुटबॉल गोल’।

Rajeev Sharma Avatar

Rajeev Sharma

Chief Editor & CEO PhD, LLB
Fact Checked & Editorial Guidelines
Reviewed by: Subject Matter Experts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *