District Hospital बरेली के जिला अस्पताल के अफसरों की संवेदनहीनता पर उप मुख्यमंत्री-स्वास्थ्यमंत्री बृजेश पाठक ने संज्ञान ले लिया है। इस बारे में रविवार शाम को ट्विटर पर उन्होंने संकेत दे दिए हैं कि कार्रवाई का स्तर हाईलेवल होगा। पहले देखते हैं स्वास्थय मंत्री पाठक के ट्विटर संदेश में ऐसा क्या लिखा है जिससे बरेली के सीनियर मेडिकल अफसरों में खलबली मच गई है। उपमुख्यमंत्री ने कहा है कि …. यदि शासन स्तर पर किसी के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता हो तो उसके प्रस्ताव सहित आख्या एक सप्ताह के अंदर शासन को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। गरीब, असहायों की सेवा हमारी सरकार की शीर्ष प्राथमिकता और प्रतिबद्धता है, प्रदेश के हर व्यक्ति को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना हमारी जिम्मेदारी है, मरीज मेरे लिए ईश्वर का रूप हैं उनकी सेवा में किसी भी प्रकार की लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसा करने वाले दोषियों विरुद्ध कठोर से कठोर कार्यवाही जाएगी। दरअसल, स्वास्थ्य सेवाओं के क्लास वन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन से अनुमति लेनी होती है। यही वो वजह है जिससे बरेली के सीनियर मेडिकल अफसरों की चिंता बढ़ गई है। ऐसा भी बताया जाता है कि सीएमओ-सीएमएस स्तर के अधिकारी अब डेमेज कंट्रोल में लग गए हैं। जिला अस्पताल के तमाम कर्मचारियों को लगाया गया है कि किसी भी तरह उस व्यक्ति को खोजा जाए और उसे संतुष्ट किया जाए और ऐन-केन लखनऊ से जांच कमेटी के आने से पहले उससे लिखवा कर ले लिया जाए कि अब वो खुश है, और जिला अस्पताल के किसी भी कर्मचारी और अधिकारी से कोई शिकायत नहीं है।
जिला अस्पताल, बरेली में बुजुर्ग महिला को इलाज न मिलने तथा ठेले पर महिला मरीज को ले जाने संबंधी वायरल खबर का तत्काल संज्ञान लेते हुए मेरे द्वारा प्रकरण की गंभीरता के दृष्टिगत स्वास्थ्य महानिदेशालय स्तर के किसी वरिष्ठ अधिकारी को मौके पर भेज कर पूरे मामले की जांच करने, दोषियों के…
— Brajesh Pathak (@brajeshpathakup) May 10, 2026
अपुष्ट सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि बरेली जिला अस्पताल की इस घटना पर स्वास्थ्य मंत्री ने बरेली के डीएम से भी जानकारी ली है। इस कथित कम्युनिकेशन के बाद जिला प्रशासन की तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने भी कार्यवाही तेज कर दी है। लेकिन अब यह तय हो गया है कि गरीब मरीज और उसके तीमारदार की अनदेखी करने के आरोप में किसी छोटी ही नहीं बड़ी मछलियों पर भी गाज गिरना तय है।
ध्यान रहे, उत्तर प्रदेश में 2027 की शुरुआत में ही विधानसभा चुनाव होने हैं। किसी भी राज्य में शिक्षा-स्वास्थ्य-बिजली-पानी-सड़क ऐसे मुद्दे होते हैं जो मतदाताओं को बहुत प्रभावित करते हैं। इस नजरिए से भी यूपी की योगी सरकार यह कतई नहीं चाहेगी कि बरेली जिला अस्पताल का मुद्दा चुनावी मुद्दा बनने से पहले ही सुलझ जाए। स्वास्थ्य मंत्री के रविवार शाम के ट्वीट के तेवरों के अनुरूप ही कार्रवाई होती है तो यह पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक उदाहरण बनेगा।
इससे पहले क्या हुआ इस को जानने के लिए पढ़ें यह खबर