Vande Mataram एक तरफ मुसलमानों देवबंदी फिरके के कट्टरपंथी मौलाना महमूद मदनी ने जहां वंदे मातरम का विरोध किया है तो वहीं बरेलवी फिरके मौलाना और इस पर आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने कहा है कि वंदे मातरम को मज़हबी रंग देना गलत है।
मौलाना रज़वी ने कहा कि भारत सरकार के गृहमंत्रालय ने एक सर्कुलर जारी किया है, जिसमे कहा गया है कि सरकारी विभागों और शिक्षक संस्थानो मे वंदे मातरम पढ़ा जायेगा। उन्होंने कहा कि वो उन लोगो से गुजारिश करेंगे जो लोग वंदे मातरम का विरोध कर रहे हैं, कि वंदे मातरम को धार्मिक (मज़हबी) नजरिए से न देखे बल्कि सियासी नजरिए से देखें। इतिहास मे दर्ज है कि जब मुसलमान और हिन्दू मिलकर अंग्रेजो के खिलाफ जंग लड रहे थे तब ये वंदे मातरम का नारा और गाना जनता के अंदर जोश भरने के लिए गाया और लगाया जाता था बिल्कुल इसी तरह इंकलाब जिंदाबाद का भी नारा है। वंदे मातरम के गीत को सियासी परिपेक्ष्य मे अगर देखेंगे तो फिर किसी को आपत्ति नहीं हो सकती है।
मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा है कि जमीयत उलेमा का अध्यक्ष महमूद मदन ने वंदे मातरम को और ज्यादा वि वादों में घेर दिया है। उन्होंने कहा कि मौलाना मदनी का बयान गैर बाजिव है। क्यों कि सरकारी सर्कुलर को मज़हबी नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सड़क पर नमाज न पढ़ने वाले बयान का भी समर्थन किया है। आगामी ईद को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा था कि नमाज मस्जिदों और निर्धारित स्थानों पर शिफ्ट में अदा की जाए, ताकि सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ न हो।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि इस्लाम और शरियत भी यही शिक्षा देती है की नामज़ सड़क पर नही होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि मुसलमान शांति और सुकून के लिए मस्जिद या घर में नमाज पढ़ता है। यदि किसी मस्जिद में अधिक भीड़ हो जाए तो शरियत में दूसरी, तीसरी, चौथी और पांचवीं जमात यानी शिफ्ट में नमाज पढ़ने की व्यवस्था दी गई है। उन्होंने कहा कि इससे ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित नहीं होती और आम लोगों को परेशानी भी नहीं होती। मौलाना ने मुस्लिम समाज से अपील की कि त्योहारों के दौरान कानून और व्यवस्था का पालन करते हुए आपसी सौहार्द बनाए रखें।