नोएडा (NOIDA) और ग्रेटर नोएडा की लाइफलाइन बनने जा रही ई-बस सेवा महज एक परिवहन का साधन नहीं है, बल्कि यह इस वैश्विक होते शहर की नई पहचान का मुख्य आधार बनने वाली है।
जून के पहले सप्ताह से महा-ट्रायल शुरू
NOIDA उत्तर प्रदेश के सबसे आधुनिक और आर्थिक केंद्र नोएडा में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को वर्ल्ड-क्लास बनाने की कवायद अब अंतिम चरण में है। आगामी जून के पहले सप्ताह से शहर की सड़कों पर अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक बसों (E-Buses) का व्यापक ट्रायल शुरू होने जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, 15 जून तक इन बसों का वाणिज्यिक संचालन पूरी तरह शुरू कर दिया जाएगा।
पहले चरण के तहत कुल 100 ई-बसें सड़कों पर उतारी जा रही हैं, जिनमें से 10 बसें आलीशान ‘डबल डेकर’ होंगी। यह डबल डेकर बसें मुख्य रूप से NOIDA के बोटेनिकल गार्डन से लेकर परी चौक के रूट पर चलाई जाएंगी, जो यात्रियों को एक बेहद आधुनिक और प्रीमियम सफर का अहसास कराएंगी। इसके अलावा, बेड़े में शामिल अन्य 90 बसें 9 और 12 मीटर की लंबाई वाली होंगी, जो शहर के आंतरिक और बाहरी दोनों कोनों को आपस में जोड़ेंगी।
छवि सुधारने का सबसे बड़ा वैश्विक दबाव
इस पूरे परिवहन विस्तार के केंद्र में नोएडा (NOIDA) इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) है। जेवर एयरपोर्ट के चालू होने के बाद देश-विदेश के लाखों पर्यटकों, व्यापारिक प्रतिनिधियों और निवेशकों का सीधा आगमन इसी क्षेत्र में होने वाला है। जब विदेशी सैलानी या अंतरराष्ट्रीय उद्योगपति इस एयरपोर्ट पर उतरेंगे, तो वहां से दिल्ली, नोएडा या गाजियाबाद जाने के लिए उन्हें एक बेहद सुरक्षित, समयबद्ध और प्रदूषण मुक्त परिवहन तंत्र की आवश्यकता होगी।
अब तक नोएडा (NOIDA) की छवि एक आधुनिक और गगनचुंबी इमारतों वाले शहर की तो रही है, लेकिन यहां का आंतरिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट हमेशा से लचर माना जाता रहा है। ऑटो चालकों की मनमानी, अनधिकृत पार्किंग और बिना किसी रूट प्लान के चलने वाले लोकल वाहनों के कारण शहर की छवि पर विपरीत असर पड़ता था। प्रशासन इस बात को अच्छी तरह समझता है कि अगर जेवर एयरपोर्ट के बाद भी शहर का ट्रांसपोर्ट सिस्टम पुराना और अव्यवस्थित रहा, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शहर की छवि धूमिल होगी।
यही कारण है कि इन 100 ई-बसों का रूट न केवल नोएडा (NOIDA) के प्रमुख रास्तों (एमपी-1, एमपी-2, एमपी-3, जोनल रोड नंबर-6 और एक्सप्रेसवे) पर तय किया गया है, बल्कि इन्हें सीधे दिल्ली, गाजियाबाद और जेवर एयरपोर्ट से जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही यात्रियों को एक ऐसा सुगम नेटवर्क मिले जो सीधे उन्हें उनकी मंजिल तक पहुंचा सके।
ई-रिक्शा हटाने का फैसला
प्रशासन ने एक बेहद कड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है कि जिन रूटों पर इन नई सिटी बसों का संचालन किया जाएगा, वहां से ई-रिक्शा पूरी तरह से हटाए जाएंगे। इस फैसले के शहर पर दोनों तरह के (सकारात्मक और कुछ तात्कालिक चुनौतियां वाले) प्रभाव देखने को मिलेंगे:
1. सकारात्मक प्रभाव
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जाम की समस्या से परमानेंट मुक्ति: नोएडा के लगभग हर बड़े चौराहे (जैसे बोटेनिकल गार्डन, सेक्टर 62, परी चौक, और एक्सप्रेसवे के एंट्री पॉइंट्स) पर ई-रिक्शों की अनियंत्रित भीड़ के कारण भयानक जाम लगा रहता है। इनके हटने से सड़कों पर वाहनों की औसत रफ्तार बढ़ेगी।
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सड़क हादसों में भारी कमी: मौजूदा ई-रिक्शा चालकों के पास न तो कोई औपचारिक ट्रेनिंग होती है और न ही वे ट्रैफिक नियमों का पालन करते हैं। कई बार ये अचानक बीच सड़क पर गाड़ी मोड़ देते हैं, जिससे गंभीर हादसे होते हैं। बसों के आने से यातायात अनुशासित और सुरक्षित होगा।
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सड़कों का सौंदर्यीकरण और सुगमता: बेतरतीब खड़े रहने वाले ई-रिक्शों के हटने से सड़कों के किनारे खाली होंगे, जिससे पैदल चलने वालों को फुटपाथ मिलेंगे और शहर की खूबसूरती निखरेगी।
2. संभावित चुनौतियां
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लास्ट-माइल कनेक्टिविटी का संकट: नोएडा (NOIDA) में आम जनता के लिए ई-रिक्शा उनके घर के ठीक बाहर या मेट्रो स्टेशन के ठीक नीचे से मिलने वाला सबसे आसान साधन रहा है। यदि इन्हें बिना किसी विकल्प के हटा दिया गया, तो यात्रियों को मुख्य बस स्टॉप तक पैदल जाना पड़ेगा, जिससे बुजुर्गों और महिलाओं को परेशानी हो सकती है।
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रोजगार का गंभीर संकट: नोएडा और आसपास के इलाकों में हजारों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार ई-रिक्शा चलाकर ही अपनी आजीविका कमाते हैं। अचानक रूट बंद होने से इन चालकों के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो सकती है। प्रशासन को इनके पुनर्वास या फीडर रूटों पर इन्हें शिफ्ट करने की नीति बनानी होगी।
किराया और तकनीकी ढांचा: आम जनता की जेब का ख्याल
परिवहन विभाग ने इस बात का विशेष ध्यान रखा है कि विश्वस्तरीय सुविधाएं देने के चक्कर में आम आदमी पर आर्थिक बोझ न पड़े। बसों का न्यूनतम किराया मात्र 10 रुपये और अधिकतम किराया 30 रुपये तय किया गया है। वर्तमान में जो मंथन चल रहा है, वह मंथली पास के किराए को लेकर है, ताकि रोज़ाना सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत दी जा सके।
तकनीकी रूप से यह बसें पूरी तरह डिजिटल होंगी। यात्री घर बैठे मोबाइल ऐप के जरिए अपनी टिकट बुक कर सकेंगे, जिससे बसों में कैश की किचकिच और छुट्टे पैसों का विवाद हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। हालांकि, तकनीक से दूर रहने वाले लोगों के लिए मैनुअल टिकट की व्यवस्था भी लागू रहेगी।
300 स्टाफ और यूपी रोडवेज को जिम्मा
इस पूरी व्यवस्था का संचालन उत्तर प्रदेश रोडवेज (UP Roadways) के हाथों में सौंपा गया है। जीएम एसपी सिंह के अनुसार, अगले दो दिनों के भीतर सभी संबंधित विभागों के बीच एमओयू (MoU) साइन करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
इन 100 बसों को निर्बाध रूप से चलाने के लिए पहले चरण में 300 से अधिक प्रशिक्षित कर्मचारियों (ड्राइवरों और कंडक्टरों) की फौज तैनात की जा रही है। किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए, या किसी बस के खराब होने पर रूट प्रभावित न हो, इसके लिए 5 अतिरिक्त बसों को हर समय स्टैंडबाय मोड पर रखा जाएगा। अधिकारियों का प्राथमिक ध्यान उन डार्क-ज़ोन (Dark Zones) पर है, जहां आज भी सरकारी या निजी बसों की पहुंच बेहद कम या शून्य है।
जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट टर्निंग प्वाइंट
जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का शुरू होना नोएडा (NOIDA) के इतिहास का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट है। इस वैश्विक बदलाव के साथ कदम से कदम मिलाने के लिए शहर के पब्लिक ट्रांसपोर्ट का यह मेकओवर (Makeover) न केवल जरूरी था, बल्कि अनिवार्य था। यदि ई-रिक्शों को हटाने के बाद उनके चालकों को सही व्यवस्थित विकल्प दे दिया जाए तो यह योजना नोएडा को देश के सबसे बेहतरीन और सुव्यवस्थित शहरों की कतार में सबसे आगे खड़ा कर देगी।
