Suicide Attempt संस्कारधानी जबलपुर के मदन महल थाने में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक युवती ने पुलिस कार्रवाई से नाराज होकर थाने के भीतर ही खुद पर पेट्रोल डालकर आत्महत्या करने का प्रयास किया। गनीमत यह रही कि मौके पर मौजूद महिला पुलिसकर्मियों और स्टाफ ने तत्परता दिखाते हुए युवती को वक्त रहते काबू में कर लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। इस घटनाक्रम के बाद पुलिस महकमे में खलबली मच गई है और थाने की सुरक्षा व शिकायत निवारण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बेकसूर को जेल भेजने और रिश्वत मांगने का आरोप
प्रत्यक्षदर्शियों और सूत्रों के मुताबिक, गढ़ा थाना क्षेत्र के गुप्ता नगर की रहने वाली युवती जयंती यादव एक डिब्बे में पेट्रोल (Suicide Attempt) लेकर मदन महल थाने पहुंची थी। पुलिस अधिकारियों से बातचीत के दौरान अचानक उसने खुद पर पेट्रोल उड़ेल लिया।
युवती का आरोप है कि पुलिस ने उसकी बात सुनने के बजाय एक निर्दोष व्यक्ति को सलाखों के पीछे भेज दिया। जयंती यादव ने पुलिस पर मामले को रफा-दफा करने के एवज में रिश्वत मांगने के भी गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद सितंबर 2025 में हुई चाकूबाजी की एक वारदात से जुड़ा हुआ है।
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वारदात: सितंबर 2025 में स्नेह नगर क्षेत्र में मान्या ठाकुर नामक युवक पर जानलेवा हमला हुआ था।
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पुलिस कार्रवाई: पुलिस ने इस मामले में हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) सहित अन्य गंभीर धाराओं में तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
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गिरफ्तारी: मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी थी। हाल ही में पुलिस ने तीसरे आरोपी के रूप में लकी मरावी नामक युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
युवती का विरोध: जयंती यादव का दावा है कि लकी मरावी इस मामले में पूरी तरह निर्दोष है और पुलिस ने निष्पक्ष जांच किए बिना ही उसे गलत तरीके से आरोपी बनाकर जेल भेज दिया है। इसलिए अपना विरोध व्यक्त करने के लिए Suicide Attempt किया।
पुलिस व्यवस्था और शिकायत निवारण पर उठे सवाल
थाने के भीतर घटित इस आत्मघाती (Suicide Attempt) कदम की कोशिश ने जबलपुर पुलिसिंग पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं:
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शिकायत अनसुनी क्यों?: यदि शिकायतकर्ता या उससे जुड़े लोगों को पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति थी, तो समय रहते वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उनकी शिकायतों का निवारण क्यों नहीं किया गया?
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सुरक्षा में चूक: एक युवती पेट्रोल से भरा डिब्बा लेकर थाने के संवेदनशील हिस्से तक कैसे पहुंच गई?
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भ्रष्टाचार के आरोप: युवती द्वारा लगाए गए रिश्वत के आरोपों ने पुलिस की कार्यप्रणाली को एक बार फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है।
पुलिस का पक्ष
घटना के बाद पुलिस अधिकारियों ने युवती को समझा-बुझाकर शांत कराया और उसे उचित वैधानिक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि युवती द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की गंभीरता से जांच कराई जाएगी और जांच के बाद ही सच सामने आएगा। फिलहाल, इस सनसनीखेज घटना ने पूरे जबलपुर शहर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट प्रिंसिपल बेंच जबलपुर की टिप्पणियां
जनवरी 2026 से 31 मई 2026 यानी 5 महीने की अवधि में हाईकोर्ट में कई ऐसी याचिकाएं (MCRC) आईं, जिनमें पुलिस की जल्दबाजी और गलत एफआईआर को चुनौती दी गई:
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पारिवारिक और वैवाहिक विवाद (Section 498A / BNS): जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने कई मामलों (जैसे सचिन ज्योतिषी बनाम मप्र शासन, राकेश सिंह केस आदि) की सुनवाई करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कोर्ट ने पाया कि कई मामलों में पुलिस ने बिना किसी प्रारंभिक जांच (Preliminary Inquiry) या सत्यापन के, दूर रह रहे रिश्तेदारों और निर्दोष भाई-बहनों पर “फर्जी और मनगढ़ंत” आरोपों के आधार पर मैकेनिकली केस दर्ज कर लिया था। कोर्ट ने इन्हें कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग माना।
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सहमति के संबंधों में केस: अप्रैल 2026 में हाईकोर्ट के समक्ष आए कुछ मामलों में यह देखा गया कि पुलिस ने आपसी सहमति के मामलों में भी बिना पूरी पड़ताल किए सीधे गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर आरोपियों को जेल भेज दिया, जिन्हें बाद में अदालत ने जमानत दी।
- हाईकोर्ट ने कई ऐसे मामलों में मध्य प्रदेश पुलिस को फटकार लगाई जहां आरोपी को सिर्फ खानापूरी करने या गुडवर्क दिखाने के लिए गंभीर धाराओं में जेल भेज दिया गया।
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