Breaking News भारत का मोस्ट वांटेड और पुलवामा (Pulwama) हमले का मास्टर माइंड हमजा बुरहान का काम तमाम हो गया है। गुलाम कश्मीर के मुजफ्फराबाद में Un Known गनमैन ने हमजा पर प्वाइंट ब्लैंक से गोलियां दाग कर मार डाला। बताया जाता है कि हमजा बुरहान के सिर में गोलियां मारी गई। हमजा ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हमजा मुजफ्फराबाद के एक स्कूल का प्रिंसपल था। उसको आईएसआई की ओर से सिक्योरिटी भी मुहैया करवाई गई थी। हमजा पुलवामा का ही रहने वाला है, हमले के बाद भारतीय सुरक्षाबलों के दबाव की वजह से हमजा गुलाम कश्मीर भाग गया था। वहीं से वो आतंकी गतिविधियों को संचालित कर रहा था। हमजा पर हमला करने वाले कौन लोग थे यह अभी पता नहीं चल सकता है।
सुरक्षा एजेंसियों के रिकॉर्ड के मुताबिक, बुरहान का पूरा नाम अर्जुमंद गुलजार डार उर्फ डॉक्टर है। वो पुलवामा की ही रहने वाला था। बुरहान का इतिहास बेहद शातिराना रहा है। साल 2017 में वह उच्च शिक्षा हासिल करने के बहाने वैध दस्तावेज़ों (पासपोर्ट और वीज़ा) के सहारे पाकिस्तान गया था। वहां पहुंचते ही उसने पढ़ाई छोड़ दी और सीधे आतंकी गिरोह ‘अल-बद्र’ का दामन में शामिल हो गया। अपनी कट्टपंथी सोच और शातिर चालों के दम पर उसने बहुत जल्द संगठन में अपनी पैठ बनाई और कमांडर के पद तक पहुंच गया।
पाकिस्तान में ट्रेनिंग लेने और कमांडर बनने के बाद बुरहान वापस कश्मीर लौटा, जहां उसने बड़े पैमाने पर भारत-विरोधी गतिविधियों को अंजाम देना शुरू किया। वह अल-बद्र के लिए नए आतंकियों की भर्ती करने यानी रिक्रूटमेंट बन गया था। उसने घाटी के स्थानीय युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उन्हें भारत के खिलाफ भड़काने (इन्डॉक्ट्रिनेशन) में मुख्य भूमिका निभाई। इसके साथ ही, जम्मू-कश्मीर में अल-बद्र के नेटवर्क को हथियारों और गोला-बारूद की सप्लाई करने का जिम्मा भी उसी के पास था।
बुरहान की लगातार बढ़ती देशविरोधी हरकतों को देखते हुए भारत सरकार ने साल 2022 में उसे गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) के लगा दिया था। उसे अल-बद्र के कुख्यात आतंकी के रूप में सूचीबद्ध किया था।
बुरहान की इस तरह सरेआम हुई हत्या ने एक बार फिर 14 फरवरी 2019 के उस काले दिन की यादें ताज़ा कर दी हैं। पुलवामा के पास लेथपोरा (जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग) पर हुए सुसाइड कार धमाके में बीएसएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। बताया जाता है जैश-ए-मोहम्मद और अलबद्र ने मिलकर इस आत्मघाती हमले को अंजाम दिया था। आतंकी अदील अहमद डार ने सीआरपीएफ (CRPF) के काफिले से विस्फोटकों से भरी मारूति कार टकरा दी थी। हाल के दशकों में भारतीय सुरक्षा बलों पर हुआ वह सबसे बड़ा और कायराना हमला था।
मुज़फ़्फ़राबाद में बुरहान की हत्या के बाद अब सीमा पार और घाटी में सक्रिय आतंकी नेटवर्क्स के बीच भारी खलबली मची हुई है। सुरक्षा एजेंसियां इस घटनाक्रम पर पैनी नज़र बनाए हुए हैं।
