MP मध्यप्रदेश में मुस्लिम आबादी जिस तेजी से बढ़ रही है उसको देख कर लगता है कि 2047 तक मध्य प्रदेश में हिंदु अल्प संख्यकों की श्रेणी में आ जाएंगे। प्रदेश पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जाएगा और बीस साल बाद प्रदेश अराजकता सिर चढ़ कर बोल रही होगी।
मध्य प्रदेश की जीडीपी में हिंदुओं योगदान लगभग 91 फीसदी (90.89%) है। इसके उलट मुस्लिम आबादी प्रदेश पर लगातार बोझ बढ़ा रही है। प्रदेश की जीडीपी में मुसलमानों का योगदान महज 6.57% ही है। एक निजी शोध (अनाधिकारिक-अपुष्ट सोर्स) के अनुसार हर 4 साल से भी कम की अवधि में मुसलानों की जनसंख्या दो गुनी हो रही है। वहीं हिंदुओं की जनसंख्या हर दस साल में लगभग 5 फीसदी कम हो रही है।
मतलब यह है कि मुसलमानों की जनसंख्या बढ़ रही है और प्रदेश पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। 2047 तक यह स्थिति भयावह हो जाएगी।
1800 करोड़ का नया कर्ज
बहरहाल इस समय बात कर रहे हैं कि मध्य प्रदेश सरकार ने एक बार 1800 करोड़ रुपये का कर्ज उठा लिया है। यह कर्जा 7.86 फीसदी सालाना ब्याज की दर से उठाया है। यह कहना गलत नहीं होगा मध्य प्रदेश में हर बच्चा अपने ऊपर कम से कम 60हजार रुपये का कर्ज लेकर पैदा हो रहा है। सरकार राज्य का खर्चा चलाने के लिए हर महीने कर्ज पर कर्ज उठा रही है। मध्यप्रदेश सरकार हर महीने 2386 करोड़ रुपये तो केवल कर्ज के ब्याज के तौर पर चुका रही है। अभी साल शुरू हुए (वित्तीय वर्ष) लगभग डेढ़ महीना ही हुआ और अब तक मध्य प्रदेश सरकार 4 हजार 6 सौ करोड़ रुपये का कर्जा ले चुकी है।
यावत् जीवेत् सुखं जीवेत्, ऋणं कृत्वा घृतं पिबेत्
चार्वाक ने सही कहा है- यावत् जीवेत् सुखं जीवेत्। ऋणं कृत्वा घृतं पिबेत्।सूबे की सीएम मोहन यादव संस्कृत को पढ़ भी लेते हैं और समझ भी लेते हैं, इसलिए वो अच्छी तरह से समझते भी हैं कि चार्वाक के इस दर्शन का अभिप्रायः क्या है। संभवतः वो इसीलिए निश्चिंत भी हैं। उनके सीएम बनने के बाद भी मध्यप्रदेश को कर्ज से उबारने के कोई ठोस उपाय नहीं किए गए हैं। गाड़ी है जो लीक पर चलती जा चली जा रही है।
विज्ञापन पर बहाई जाने वाली रकम पर रोक लगाई जाए
वेतन, पेंशन और सरकारी नौकरियों पर कोई कटौती न करने के बावजूद कई आसान क्षेत्र बचत के लिए खुले हैं। सबसे बड़ा लक्ष्य सरकारी विज्ञापन खर्च—होर्डिंग्स, टीवी, प्रिंट मीडिया पर सालाना 2,000-3,000 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। 50% कटौती से 1,000-1,500 करोड़ की बचत आसानी से संभव।
मंत्रियों-अफसरों के सैर-सपाटे पर ब्रेक की जरूरत
मंत्रियों-अधिकारियों के यात्रा भत्ते पर भी ब्रेक लगाया जा सकता है। विदेशी दौरों के साथ देशी यात्राओं पर 1,500 करोड़ से ज्यादा खर्च हुआ है। वर्चुअल मीटिंग्स बढ़ाकर यह रकम आधी की जा सकती है। उद्घाटन, उत्सव, सम्मेलन जैसे समारोहों का बजट भी 1,000 करोड़ से ज्यादा है। इन्हें प्रायोजित करवाकर या घटाकर बचत हो सकती है।
PSU पर गारंटी कम करें
घाटे वाली पब्लिक सेक्टर कंपनियों पर 43,701 करोड़ की गारंटी देनदारी है, क्या सीएम मोहन यादव ने सोचा है कि इन यूनिटों को घाटे से उबार कर फायदे का सौदा कैसे बनाया जा सकता है। मध्य प्रदेश का पाठ्यपुस्तक निगम और खनिज निगम ही है जो फायदे में हैं। इन दोनों निगमों के अध्यक्ष पद की बहुत अहमियत है। दो दिन पहले पाठ्यपुस्तक निगम का अध्यक्ष बनाएं जाने सौभाग्य सिंह ठाकुर हैं। उज्जैन से गाड़ियों का लम्बा काफिला लेकर भोपाल पहुंचे थे। सौभाग्य सिंह ठाकुर आरएसएस से जुड़े संगठन विद्या भारती के मालवा प्रांत के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
GST चोरी रोककर राजस्व बढ़ाएं
कर संग्रह को मजबूत करना सबसे टिकाऊ रास्ता। GST चोरी रोकें, स्टांप ड्यूटी बढ़ाएं, सरकारी जमीन के पट्टे नियमित करें। इनसे बिना खर्च घटाए आय बढ़ सकती है। कुल मिलाकर 10,000-15,000 करोड़ सालाना बचत संभव-बिना एक भी नौकरी प्रभावित किए।
चेतावनी की घंटी: ब्याज बोझ 28,000 करोड़
राज्य का राजकोषीय घाटा FRBM की 3% सीमा के करीब पहुंच चुका। अकेले ब्याज भुगतान 28,636 करोड़ रुपये। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि लगातार उधारी से वित्तीय संकट गहरा सकता है। प्रचार-प्रसार, यात्रा, समारोह इत्यादि के खर्चों पर सरकार रोक लगा सकेगी।