Gross Negligence ऐसा प्रतीत हो रहा है कि बरेली जिला अस्पताल के अधिकारियों और कर्मचारियों की संवेदनाएं मर चुकी हैं या उनमें शासन-प्रशासन का खौफ नहीं रह गया है। इसीलिए जिला अस्पताल में इलाज के लिए आई महिला को उसका बूढ़ा पति ठेले पर ले जाने के लिए मजबूर हो गया। जब यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो जिला प्रशासन की नींद टूटी। अब जिलाधिकारी अविनाश सिंह कह रहे हैं कि जांच कमेटी बैठा दी गई है। तीन दिन में रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की जाएगी।

जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल
वीडियो में महिला कमजोर हालत में रिक्शे पर लेटी दिखाई दे रही है, जबकि बुजुर्ग उसे संभालते हुए अस्पताल प्रशासन के प्रति नाराजगी व्यक्त कर रहा है। सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल होने के बाद लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है। कई लोग इसे स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का प्रतीक बता रहे हैं।
बूढ़ा पति गिड़गिड़ाता रहा, अस्पताल में न भर्ती किया न इलाज दिया- यह वीडियो सारी कहानी खुद बयां कर रहा है- जांच फॉर्मेलिटी नहीं एक्शन जरूरी
बताया जा रहा है कि बुजुर्ग अपनी पत्नी को इलाज के लिए एंबुलेंस से जिला अस्पताल लेकर पहुंचा था। आरोप है कि घंटों इंतजार के बावजूद महिला को न तो उचित इलाज मिला और न ही समय पर भर्ती किया गया। इससे थक-हारकर बुजुर्ग ने अपनी पत्नी को वापस घर ले जाने का फैसला किया।

पत्नी को मजबूरन ठेले पर ले जाना पड़ा
अस्पताल परिसर से बाहर निकलते समय कोई वाहन नहीं मिलने पर उसने ठेले का सहारा लिया। वायरल वीडियो में बुजुर्ग को यह कहते सुना जा सकता है कि “अगर इलाज नहीं मिलना है तो घर पर ही मर जाए।” उसकी आवाज में बेबसी और गुस्सा साफ झलक रहा था।

बयान देकर खुद फंसे एडी एसआईसी डॉ. दीक्षित
इस मामले पर अस्पताल प्रशासन ने अपनी सफाई पेश की है। अतिरिक्त निदेशक एसआईसी डॉ. आरसी दीक्षित के अनुसार, महिला पिछले तीन दिनों से अस्पताल में भर्ती थी और उसका इलाज चल रहा था। उन्होंने बताया कि महिला का ब्लड शुगर काफी बढ़ा हुआ था और सांस लेने में परेशानी होने के कारण उसे हायर सेंटर रेफर करने का निर्णय लिया गया था।
बिना सूचना के मरीज को ले जाने का दावा
प्रशासन का दावा है कि बुजुर्ग को रेफर की जानकारी पहले ही दे दी गई थी, लेकिन वह नाराज होकर बिना किसी सूचना के मरीज को अस्पताल से बाहर ले गया। इसी दौरान किसी व्यक्ति ने यह वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। अस्पताल प्रशासन ने पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जिला अस्पताल के अफसरों की संवेदनशीलता किस हद तक गिर चुकी है इसका इसी बात से अंदाज लगाया जा सकता है कि वीडियो में बुजुर्ग साफ कहता हुआ सुनाई दे रहा है कि यहां मरीज को कोई देखने वाला ही नहीं है, कोई भर्ती करने को तैयार नहीं है तो क्या करें। वीडियो में बुजुर्ग की गरीबी और बेवशी साफ झलक रही है। भले ही यूपी में योगी की सरकार है लेकिन गरीबों की आवाज एसी कमरों में बैठे अफसरो की कानों तक नहीं पहुंच पा रही है यह भी एक सच्चाई है।
डीएम ने तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई, जांच नहीं एक्शन चाहिए
मामला ज्यादा बढ़ने पर डीएम अविनाश सिंह ने कहा है कि उन्होंने एडीएम एफआर, एडीएम सिटी और सीएमओ के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी है। यह कमेटी तीन दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपेंगे और इस रिपोर्ट में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जिला अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा पर उठे सवाल
यहां सवाल सिर्फ संवेदानाओं की ही नहीं जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं का भी है। अतिरिक्त निदेशक डॉ. दीक्षित कहते हैं कि महिला को बिना किसी सूचना के उसका पति अस्पताल से बाहर ले गया। डॉ.दीक्षित यह बयान देते समय यह भूल गए कि वो जिला अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठा रहे हैं।
क्या कर रहे थे डॉक्टर, नर्स, वॉर्ड ब्यॉय और सुरक्षाकर्मी
क्या जिला अस्पताल में भर्ती किसी मरीज को यूं ही कोई बाहर ले जा सकता है? जिला अस्पताल के नर्स-वॉर्ड ब्यॉय, डॉक्टर और सुरक्षाकर्मी सभी आंखें मूंदे रहे और बीमार-कमजोर महिला को उसका पति अस्पताल से बाहर ले गया? जिला प्रशासन द्वारा गठित की गई समिति के सामने अब यह भी सवाल होगा कि वो जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं के साथ ही में मरीजों की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा करे।