Jabalpur Crime News: जबलपुर आरटीओ कार्यालय में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि अब शिकायतकर्ताओं को राज्यस्तर पर इनका समाधान निकलता नजर नहीं आ रहा है। इसलिए शिकायतकर्ता ने भारत के महामहिम राष्ट्रपति को ईमेल ठोक दिया। चलिए, अब जानते हैं विस्तार से क्या-क्या हुआ
भ्रष्टाचार के खुलासों से उड़ी बड़े-बड़ों की नींद
परिवहन विभाग की फ्लाइंग टीम द्वारा की जा रही अवैध वसूली और भ्रष्टाचार को लेकर लगातार हो रहे खुलासों से फ्लाईंग प्रभारी राजेन्द्र साहू, उपनिरीक्षक अक्षय पटेल और उसकी टीम के लोगों की नींद उड़ी हुई है। उनमें इस कदर घबराहट है कि अब सब के सब जबलपुर से तबादला कराने की फिराक में हैं ताकि जांच और कार्रवाई से बचा जा सके। लेकिन तबादला करने में अधिकारियों के हाथ कांप रहे हैं क्योंकि शिकायतकर्ता धर्मराज सिंह को जैसे ही ये भनक लगी कि राजेन्द्र साहू और उसकी टीम ग्वालियर स्थित परिवहन मुख्यालय के एक बड़े अधिकारी के लगातार संपर्क में है और तबादले के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है तो उन्होंने तुरंत इसकी खबर मेल के जरिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजी।
राष्ट्रपति कार्यालय से तबादला न करने की सलाह
राष्ट्रपति कार्यालय से धर्मराज सिंह का आवेदन मुख्य सचिव समेत परिवहन अधिकारियों को इस आश्य से भेजा गया कि राजेन्द्र साहू का तबादला फिलहाल न किया जाए। राष्ट्रपति कार्यालय ने तबादला को लेकर विचार करने के साथ-साथ ये निर्देश भी दिए हैं कि जो भी फैसला हो उससे शिकायकर्ता अधिवक्ता धर्मराज सिंह को सूचित किया जाए। जिसके बाद अब परिवहन विभाग में नीचे से लेकर उपर तक हड़कंप मचा हुआ है। इसके साथ-साथ इस मामले से जुड़े फ्लाईंग प्रभारी राजेन्द्र साहू, उपनिरीक्षक अक्षय पटेल, प्राइवेट कर्मचारी राम गुप्ता, अनिकेत चौरसिया समेत तमाम नामजद लोगों पर कार्रवाई की मांग भी जोर पकडऩे लगी है।
कई और लोगों की भूमिका भी संदिग्ध
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में फ्लाइंग प्रभारी राजेंद्र साहू, उसके सहयोगी अक्षय पटेल, और कथित प्राइवेट कर्मचारी राम गुप्ता व अनिकेत चौरसिया की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि इन लोगों के जरिए एक संगठित गिरोह चलाया जा रहा है जो हाईवे पर ट्रक चालकों और ट्रांसपोर्टर्स को डरा धमकाकर अवैध वसूली करता था। चौंकाने वाली बात तो ये है कि इस पूरे मामले की जानकारी ग्वालियर परिवहन विभाग के मुख्यालय में बैठे एक अधिकारी को भी थी जो जबलपुर में पुलिस विभाग के एक बड़े पद पर भी रह चुके हैं लेकिन उन्होंने कार्रवाई नहीं की बल्कि सभी को संरक्षण दिया। जिसके चलते सरकार को करोड़ों रूपयों का चूना लगाया गया। बताया जा रहा है कि प्राइवेट कर्मचारियों की मौजूदगी और उनकी सक्रिय भागीदारी ने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी कामकाज में बाहरी लोगों का दखल न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि इससे कार्रवाई की निष्पक्षता भी प्रभावित होती है।
ये चर्चाएं हुईं तेज
पूरे अवैध वसूली नेटवर्क का खुलासा हो जाने और अवैध वसूली तथा भ्रष्टाचार साबित हो जाने के बाद उपरोक्त लोगों के नाम सामने आने से संबंधित लोगों के तबादले की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं जिसे फ्लाईंग प्रभारी राजेन्द्र साहू और उसकी टीम का ट्रांसफर गेम के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि जांच की आंच से बचने के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रयास किए जा रहे थे, लेकिन राष्ट्रपति कार्यालय की सख्ती राजेन्द्र साहू और उसकी टीम के मंसूबों पर पानी फेर सकती है। इतना ही नहीं जो भी अधिकारी इनका तबादला करेगा उस पर भी कार्रवाई की तलवार लटकती रहेगी।
अदालत जाने की तैयारी में शिकायतकर्ता
शिकायतकर्ता धर्मराज सिंह ने कहा है कि यदि अधिकारियों ने उपरोक्त लोगों के तबादले की कोशिश की तो अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा और तबादले पर रोक लगाने की मांग की जाएगी लेकिन दोषियों को किसी भी कीमत पर जांच और कार्रवाई से बचने नहीं दिया जाएगा। शिकायतकर्ता अधिवक्ता धम्रराज सिंह ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि जब तक जांच पूरी न हो, तब तक इन सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों का तबादला रोका जाए, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि यदि किसी भी स्तर पर जांच को प्रभावित करने की कोशिश की गई, तो वे न्यायालय में वीडियो, फोटो और कथित पर्ची, प्राइवेट कर्मचारियों के नाम के साथ गवाहों समेत जनहित याचिका दायर करेंगे। जिसकी जवाबदारी संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों की होगा।