PSPCL पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह क्षेत्र के करीब, पटियाला में शुक्रवार का दिन भारी हंगामे और तनाव के नाम रहा। अपनी न्यायसंगत मांगों और रोजगार के वादे को पूरा करवाने के लिए बीते पांच दिनों से पावरकॉम (PSPCL) मुख्यालय के मुख्य द्वार पर शांतिपूर्ण धरना दे रहे ‘2600 अप्रेंटिस लाइनमैन यूनियन’ के सदस्यों पर पुलिस ने अचानक बल प्रयोग कर दिया। लगातार बढ़ते गतिरोध के बीच पुलिस ने प्रदर्शनकारी बेरोजगार युवाओं को खदेड़ने के लिए लाठीचार्ज किया, जिसके बाद पूरे इलाके में भगदड़ मच गई। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने यूनियन के कई वरिष्ठ नेताओं और दर्जनों प्रदर्शनकारियों को जबरन हिरासत में ले लिया। यूनियन ने पुलिस प्रशासन पर सीधे तौर पर सरकार के इशारे पर तानाशाही और दमनकारी नीति अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है।
लंबे समय से लंबित मांगें और सरकार की बेरुखी
यूनियन के पदाधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि वे कोई अनुचित मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि लंबे समय से अपनी नौकरी और नियमितीकरण से जुड़े बुनियादी अधिकारों को लेकर संघर्षरत हैं। युवाओं का आरोप है कि पंजाब सरकार और बिजली विभाग (PSPCL) के आला अधिकारियों द्वारा बार-बार दिए गए खोखले आश्वासनों के बावजूद धरातल पर कोई ठोस समाधान नहीं निकला। बार-बार मिलने वाले केवल मौखिक दिलासों से तंग आकर ही इन युवाओं को मजबूरन एक बार फिर से आंदोलन और सड़कों पर उतरने का रास्ता अख्तियार करना पड़ा है। युवाओं का कहना है कि सरकार उनकी जीविका और भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।
तकनीकी परीक्षा पास, फिर भी नौकरी का लंबा इंतजार
आंदोलन की अगुवाई कर रहे प्रमुख यूनियन नेता आकाश कंबोज ने मीडिया को विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि धरने पर बैठे सभी युवा पूरी तरह से योग्य हैं और उन्होंने बिजली विभाग की अनिवार्य तकनीकी परीक्षा (Technical Examination) को अच्छे अंकों के साथ पास किया है। कंबोज के अनुसार, पूर्व में सरकार और प्रबंधन की ओर से उन्हें स्पष्ट और लिखित रूप में यह भरोसा दिया गया था कि पंजाबी भाषा की एक साधारण क्वालिफाइंग परीक्षा (Qualifying Exam) आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा को पास करते ही इन सभी लाइनमैनों को मुख्यधारा की नौकरियों के लिए पूरी तरह से पात्र मानकर तुरंत नियुक्ति पत्र सौंप दिए जाएंगे। परंतु महीनों बीत जाने के बाद भी यह वादा केवल फाइलों में ही दबा रह गया।
‘मुख्यमंत्री के निर्देश’ का हवाला देकर तोड़ा गया था पिछला धरना
यूनियन नेता आकाश कंबोज ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि अधिकारियों ने इससे पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान के कड़े निर्देशों का हवाला दिया था। तब अधिकारियों ने युवाओं से वादा किया था कि वे अपना धरना तुरंत समाप्त कर दें ताकि सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ उनकी पंजाबी परीक्षा की तैयारी और तिथियों की घोषणा कर सके। अधिकारियों ने भरोसा दिया था कि एक सप्ताह के भीतर परीक्षा की आधिकारिक तारीखें घोषित कर दी जाएंगी। सरकार और प्रशासन पर अटूट भरोसा जताते हुए यूनियन ने जनहित को ध्यान में रखकर अपना पिछला धरना समाप्त भी कर दिया था, लेकिन बाद में सरकार अपने वादे से पूरी तरह मुकर गई।
आचार संहिता और चुनाव का बहाना बनाकर टालमटोल
यूनियन का सबसे गंभीर आरोप यह है कि जैसे ही पिछला धरना समाप्त हुआ, विभागीय अधिकारियों और सरकार का रवैया पूरी तरह बदल गया। अपनी वादे से पल्ला झाड़ते हुए अधिकारियों ने पहले नगर निगम चुनावों (Municipal Corporation Elections) और उसके बाद लागू हुई आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) का बहाना बनाना शुरू कर दिया। युवाओं ने धैर्य रखा और आचार संहिता समाप्त होने का भी इंतजार किया। लेकिन विडंबना यह रही कि आचार संहिता हटने के बाद भी कई हफ़्तों तक सरकार ने इस विषय पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया। कई दौर की आधिकारिक बैठकों और मैराथन वार्ता के बाद, बिजली विभाग ने कथित तौर पर दोटूक शब्दों में साफ कर दिया कि फिलहाल उन्हें विभाग में स्थायी तौर पर शामिल नहीं किया जा सकता, जिसने युवाओं के घावों पर नमक छिड़कने का काम किया।
पांच दिनों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन और पुलिस का बल प्रयोग
यूनियन नेताओं ने पुलिस के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कानून-व्यवस्था के बिगड़ने की बात कही जा रही थी। नेताओं ने बताया कि वे पिछले पांच दिनों से अत्यंत अनुशासित और शांतिपूर्ण तरीके से सड़क के किनारे धरना दे रहे थे। उन्होंने यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए सड़क का एक बहुत बड़ा और पर्याप्त हिस्सा पूरी तरह खाली छोड़ रखा था, ताकि आम जनता को कोई परेशानी न हो और एम्बुलेंस, दमकल विभाग तथा अन्य आवश्यक वाहनों की आवाजाही निर्बाध रूप से चलती रहे। इसके बावजूद, पुलिस ने अमानवीय रवैया अपनाते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर लाठियां भांजीं।
मारपीट, हिरासत और आर-पार के आंदोलन की चेतावनी
आकाश कंबोज ने आरोप लगाया कि पुलिसिया कार्रवाई के दौरान न केवल बेरहमी से मारपीट की गई, बल्कि उनके लगभग 10 से अधिक मुख्य साथियों को पुलिस वैन में भरकर अज्ञात स्थान पर हिरासत में ले लिया गया। कंबोज ने यह भी दावा किया कि पुलिस प्रशासन अब हिरासत में लिए गए निर्दोष युवाओं के खिलाफ झूठे और संगीन आपराधिक मामले दर्ज करने की धमकियां दे रहा है ताकि आंदोलन को कुचला जा सके।
यूनियन ने सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया है कि उनके सभी सदस्य पहले ही विभाग में 6 महीने का कठिन समय और जमीनी काम पूरा कर चुके हैं। वे अपने हक की कमाई और रोजगार की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में ऐलान किया है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं और हिरासत में लिए गए साथियों को बिना शर्त रिहा नहीं किया जाता, तब तक उनका यह उग्र आंदोलन और तेज होगा तथा इसकी पूरी जिम्मेदारी पंजाब सरकार की होगी।
