Pak Gurudwara Demolition पाकिस्तान के फर्रुखाबाद में ऐतिहासिक गुरुद्वारा सच्चा सौदा के पास मौजूद 125 साल पुराने गुरुद्वारा सिंह सभा को कुछ बदमाशों द्वारा गिराए जाने की खबर के बाद, दुनिया भर के सिख समुदायों में भारी विरोध हो रहा है। सिख संगठन और धार्मिक नेता इस घटना को लेकर पाकिस्तान सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
इस बारे में मीडिया से बात करते हुए, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य भाई मंजीत सिंह ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि 24 और 25 जून की रात को गुरुद्वारा सिंह सभा को गिराए जाने की घटना ने पूरे सिख समुदाय की भावनाओं को बहुत ठेस पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा साहिब सिख इतिहास और विरासत का एक अहम सेंटर है और इससे सिखों की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं।
भाई मंजीत सिंह ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ से अपील की कि वे इस मामले में खुद दखल दें और गुरुद्वारा साहिब को गिराने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने मांग की कि गिराई गई गुरुद्वारा बिल्डिंग को जल्द से जल्द फिर से बनाया जाए, ताकि श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान किया जा सके।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में सिख धर्म से जुड़े कई ऐतिहासिक गुरुद्वारे हैं, जो श्री गुरु नानक देव जी और दूसरे गुरुओं से जुड़े हैं। इन धार्मिक जगहों की सुरक्षा और बचाव सुनिश्चित करना पाकिस्तान सरकार की जिम्मेदारी है।
भाई मंजीत सिंह ने यह भी मांग की कि पाकिस्तान सरकार शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और कार सेवा के संतों को पाकिस्तान में ऐतिहासिक गुरुद्वारों की सेवा और देखभाल करने की इजाजत दे। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा किया जाता है, तो इन ऐतिहासिक गुरुद्वारों की बेहतर देखभाल और देखभाल हो सकेगी। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय का अपने ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों से गहरा जुड़ाव है और ऐसी घटनाओं को कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने पाकिस्तान सरकार से अपील की कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए असरदार कदम उठाए जाएं।

4 साल पहले तक ठीक था गुरुद्वारा
- 125 साल पुराना गुरुद्वारा बंटवारे के बाद से वीरान: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में फारूकाबाद (मंडी चूरकाना) स्थित गुरुद्वारा श्री सिंह सभा करीब 125 साल पुराना है। गुरुद्वारे के गेट पर इसके निर्माण की तारीख का जिक्र है। इस गुरुद्वारे को पाकिस्तान की ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल किया गया था और प्रशासन ने इसे तोड़ने पर रोक लगाई थी। बंटवारे के बाद से ये गुरुद्वारा वीरान था और अब भूमाफिया की नजर इस पर गई। यह प्राचीन इमारत गुरुद्वारा श्री सच्चा सौदा साहिब के पास स्थित है और सिख इतिहास व साझी संस्कृति का प्रतीक थी।
- 4 साल पहले तक ठीक हालत में था गुरुद्वारा: गुरुद्वारा श्री सिंह सभा की यह ऐतिहासिक इमारत पिछले 4 साल तक ठीक थी। 4 साल पहले ही ये गुरुद्वारा तब चर्चा में आया जब भूमाफिया के कुछ लोगों ने इसका गुंबद तोड़कर कब्जा करना चाहा। इसके खिलाफ सिख एक्टिविस्ट्स ने वीडियो बनाकर अधिकारियों से शिकायत की।
- भारत से आने वाले शरणार्थियों को भी यहां रखा गया: 1947 के बंटवारे के बाद साल 1960 में पाकिस्तान सरकार ने इस खाली पड़ी गुरुद्वारा प्रॉपर्टी को भारत से आए शरणार्थियों को रहने के लिए अलॉट किया था। नियम के मुताबिक, इस ऐतिहासिक ढांचे में कोई भी बदलाव या तोड़फोड़ करने की मनाही थी, लेकिन भूमाफिया ने नियमों के उलट यहां तोड़फोड़ की और अब कब्जा करने की नीयत से गुरुद्वारा की इमारत को गिरा दिया।
- सिख संगत में गुस्से के बाद प्रशासन ने सील की जगह: गुरुद्वारा साहिब को गिराए जाने की सूचना मिलते ही सिख संगत में आक्रोश फैल गया। लोग घटना स्थल पर जमा हो गए। सिख समुदाय के कड़े विरोध और दबाव के बाद पुलिस और प्रशासन हरकत में आया। फिलहाल इस जगह को ताला लगाकर सील कर दिया गया है। आगे के कंस्ट्रक्शन पर रोक लगा दी गई है। वक्फ बोर्ड अब इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
