Noida-Ghaziabad में श्रमिक असंतोष फैलाने की साजिश के आरोप में जेल भेजे गए सत्यम वर्मा और आकृति चौधरी पर नोएडा पुलिस प्रशासन द्वारा लगाए गए एनएसए लगाए जाने के ख़िलाफ़ प्रयागराज के प्रेस क्लब में साझा प्रेस वार्ता का आयोजित की गई।
इस दौरान कवयित्री कात्यायनी, प्रगतिशील लेखक संघ के आनन्द मालवीय, और इलाहाबाद हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट केके रॉय, ट्रेडयूनियन नेता अविनाश मिश्र, एआईकेएमएस के राष्ट्रीय महासचिव आशीष मित्तल, आल इंडिया पीपल्स फ्रन्ट के राजेश सचान, अधिवक्ता मंच के संयोजक राजवेन्द्र और लॉयर्स कलेक्टिव के संयोजक महाप्रसाद ने प्रेस वार्ता को सम्बोधित किया।
प्रेस वार्ता में आरोप लगाया गया कि भगतसिंह, सत्यम वर्मा और आकृति चौधरी को गैरकानूनी तरीके से गिरफ़्तार कर लिया गया और अब उनपर रासुका जैसे कानून लगा दिए गए हैं। सीनियर एडवोकेट केके राय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने स्पष्ट तौर पर कहा कि वाम विचार को मानना इस देश में आतंकवाद नहीं है। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा नोएडा श्रमिक आन्दोलन में गिरफ़्तार आरोपियों के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट तक में कोई सबूत नहीं पेश कर पाई है।
कात्यायनी ने नोएडा प्रोटेस्ट के दौरान लखनऊ में घट रही घटनाओं पर विस्तार पूर्वक बात रखीं। कर्मचारी नेता अविनाश मिश्र ने कहा कि सत्यम वर्मा और आकृति चौधरी हमेशा मज़दूरों के पक्ष में खड़े रहें है। सुप्रीम कोर्ट ने खुद यह माना कि न्यूनतम मज़दूरी पाना मज़दूरों का संवैधानिक अधिकार है जो संविधान के नीति निर्देशक तत्व में उल्लेखित है।
संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से आशीष मित्तल ने कहा कि वो मीटिंग कर मज़दूर आन्दोलन के दमन के विरोध में देशभर में आन्दोलन संगठित करेंगे। प्रगतिशील लेखक संघ के आनन्द मालवीय ने उत्तर प्रदेश सरकार से चन्द पूंजी घरानों के मुनाफ़े के लिए अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता को बाधित कर रही है। प्रेस वार्ता में अधिवक्ता अबिदा खातून, पद्म सिंह, रमाशंकर, अमन, अंजलि, राणा परवीन सहित शहर के तमाम मानिंद लोग मौजूद रहे।
