Maood Azhar ऑप्रेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना के निशाना बनने से बाल-बाल बचा आतंकी सरगना मौलाना मसूद अज़हर कराची के सेंट्रल मिलिट्री हॉस्पिटल के बेड पर आखिरी सांसे गिन रहा है। हालांकि, पाकिस्तान की सरकार या किसी विदेशी एजेंसी ने इस खबर की पुष्टि नहीं की है लेकिन पाकिस्तान में भारत के खुफिया सूत्रों ने यह खबर दी है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने मसूद अज़हर को बहावलपुर के मदरसे से निकाल सीएमएच में भर्ती करवाया है। भारतीय खुफिया सूत्रों ने उसके डिजिटल कॉर्डिनेट्स भी शेयर किए हैं।
रिसर्च एंड एनालिसिस विंग के एजेंट होने का दावा करने वाले लकी विष्ट ने भी मसूद अज़हर के बारे में एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया है। लकी विष्ट ने दावा किया है कि उनकी खबर पक्की है। आईएसआई ने मदसूद अज़हर के चारों ओर सख्त पहरा बैठा रखा है। जिस हॉस्पिटल में मसूद अज़हर को रखा गया है उसकी निगरानी भी सैटेलाइट से की जा रही है।
मल्टीपल ऑर्गन फैल्योर से जूझ रहा मसूद अज़हर
हालांकि, अधिकारिक या अनाधिकारिक तौर भारत की किसी भी एजेंसी ने मसूद अज़हर के बारे में कोई दावा नहीं किया है। यह बात जरूर कही जा रही है कि मसूद अज़हर का रिनल फैल्योर हो गया है। उसे बार-बार डायलिसिस की आवश्यकता होती है। इसलिए हो सकता है कि उसे मिलिट्री हॉस्पिटल या किसी सुरक्षित ठिकाने पर शिफ्ट किया गया हो।
हालिया इनपुट बताते हैं कि वह चलने-फिरने में पूरी तरह अक्षम है और उसे ‘मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर’ की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। पूर्व रॉ अधिकारियों और सुरक्षा गविशेषज्ञों का मानना है कि अज़हर का सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह गायब होना उसकी गंभीर बीमारी की पुष्टि करता है।
जैश-ए-मोहम्मद में गिरोह का सरगना के खिताब पर कलह
मसूद अज़हर की बीमारी ने उसके आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के भीतर बड़ी कलह पैदा कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार अज़हर के भाई अब्दुल रऊफ असगर और उसके अन्य करीबियों के बीच नेतृत्व को लेकर खींचतान शुरू हो गई है।
कैडर में असंतोष: संगठन के निचले स्तर के लड़ाकों को अज़हर की सही स्थिति नहीं बताई जा रही है, जिससे उनके मनोबल में भारी गिरावट आई है।
ऑपरेशन सिंदूर का खौफ: भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा सीमा पर चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और टारगेटेड ऑपरेशन्स ने जैश के कमांड स्ट्रक्चर को हिला कर रख दिया है। हाल ही में उसके भाई ताहिर अनवर की संदिग्ध मौत ने इस खौफ को और बढ़ा दिया है।
कंधार से पुलवामा तक की यादें
मसूद अज़हर का नाम भारत के इतिहास के सबसे काले पन्नों से जुड़ा है। वह 1994 में श्रीनगर में पकड़ा गया था, लेकिन दिसंबर 1999 में IC-814 विमान अपहरण के बाद भारत को यात्रियों की जान बचाने के लिए उसे कंधार में छोड़ना पड़ा। रिहाई के बाद उसने जैश बनाया और 2001 में भारतीय संसद तथा 2019 में पुलवामा में CRPF के काफिले पर हमला करवाया। मई 2019 में संयुक्त राष्ट्र ने उसे ‘ग्लोबल टेररिस्ट’ घोषित किया।
टेरर फंडिंग का नया मोड
मसूद अज़हर के नेटवर्क ने फंडिंग के तरीके बदल लिए थे। सुरक्षा एजेंसियों ने खुलासा किया है कि उसका गिरोह जैश अब बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी के जरिए दुनिया भर से चंदा जुटा रहा है। हालांकि, भारतीय साइबर सेल और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय जांच एजेंसियों ने इस ‘डिजिटल जिहाद’ के कई वॉलेट्स को ट्रैक कर उन्हें ब्लॉक करने में सफलता पाई है।
पाकिस्तान की ‘साइलेंट’ रणनीति और अंतरराष्ट्रीय दबाव
भारत के आंतवादी गतिविधियों पर निगाह रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि अज़हर की बीमारी या मौत की खबरों के पीछे पाकिस्तान की आईएसआई की चाल भी हो सकती है।
FATF का डर: पाकिस्तान पर हमेशा से आतंकी समूहों के खिलाफ कार्रवाई का दबाव रहता है। अज़हर को “मृत” या “लापता” घोषित करना पाकिस्तान के लिए एक सुरक्षित रास्ता हो सकता है। जब भी भारत अज़हर के प्रत्यर्पण की मांग करता है, पाकिस्तान उसके “बीमार” होने का बहाना बनाकर उसे अंतरराष्ट्रीय जांच से बचाता रहा है।
रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि भले ही मसूद अज़हर शारीरिक रूप से कमजोर हो गया हो, लेकिन उसका फैलाया हुआ ‘कट्टरपंथी विचार’ अभी भी एक चुनौती है। भारत को न केवल अज़हर पर, बल्कि उसके उत्तराधिकारी अब्दुल रऊफ असगर पर भी कड़ी नजर रखनी होगी, जो वर्तमान में जैश के ऑपरेशन्स को संभाल रहा है।
मसूद अज़हर का मामला केवल एक आतंकी सरगना की बीमारी का नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया में आतंकवाद के एक बड़े नेटवर्क के ढहने की प्रक्रिया है। भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और वैश्विक कूटनीति ने अज़हर को एक कोने में धकेल दिया है।
जैश सरगना मसूद अज़हर की जन्म कुण्डली
जन्म और शिक्षा (1968 – 1989)
मसूद अज़हर का जन्म 10 जुलाई 1968 को बहावलपुर में हुआ था। इसके पिता अल्लाह बख्श शब्बीर एक सरकारी स्कूल में हेडमास्टर थे।
मसूद की शुरुआती पढ़ाई बहावलपुर में हुई, लेकिन आठवीं कक्षा के बाद स्कूल छोड़ दिया। इसके बाद इसने कराची के जामिया उलम-उल-इस्लामिया मदरसे में दाखिला लिया, जो कट्टरपंथी विचारधारा का केंद्र माना जाता है।
शिक्षक की भूमिका: 1989 में स्नातक होने के बाद, वह उसी मदरसे में शिक्षक के रूप में काम करने लगा
आतंक की दुनिया में कदम (1989 – 1994)
मदरसे में पढ़ाई के दौरा वह हरकत-उल-अंसार नाम के आतंकी गिरोह के संपर्क में आया। उसने अफगानिस्तान में जिहाद का प्रशिक्षण लेने की कोशिश की, लेकिन शारीरिक रूप से कमजोर और अधिक वजन होने के कारण वह ट्रेनिंग में फेल हो गया।
शारीरिक तौर पर कमजोर और हथियार न चला पाने के कारण उसे गिरोह का मोटिवेटर बनाया गया। वह अपनी भड़काऊ तकरीरों और पत्रिकाओं के माध्यम से युवाओं को कट्टरपंथी बनाने लगा।
भारत में गिरफ्तारी और जेल (1994 – 1999)
फरवरी 1994 में, मसूद अज़हर फर्जी पुर्तगाली पासपोर्ट पर श्रीनगर (कश्मीर) पहुंचा था। उसे अनंतनाग के पास से गिरफ्तार कर लिया गया। उसे जम्मू की कोट भलवाल जेल में रखा गया। जेल में रहने के दौरान भी वह अन्य कैदियों को भड़काने की कोशिश करता रहता था।
आईसी-814 हाईजैक और रिहाई (दिसंबर 1999)
24 दिसंबर 1999 को मसूद अज़हर के भाई इब्राहिम अतहर और उसके साथियों ने इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी-814 काठमांडू-दिल्ली को हाईजैक कर लिया और उसे अफगानिस्तान के कंधार ले गए। बंधकों की जान बचाने के बदले भारत सरकार को मजबूरन मसूद अज़हर, मुश्ताक अहमद जरगर और उमर सईद शेख को रिहा करना पड़ा।
जैश-ए-मोहम्मद, भारत में आतंकी हमले (2000 – 2019)
रिहाई के तुरंत बाद मसूद अज़हर ने जनवरी 2000 में उसने जैश-ए-मोहम्मद नाम का नया आतंकी गिरोह बनाया।
2001: जम्मू-कश्मीर विधानसभा और भारतीय संसद पर हमला।
2016: पठानकोट एयरबेस पर हमला।
2019: पुलवामा आतंकी हमला, जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए
ग्लोबल टेररिस्ट
लंबे कूटनीतिक संघर्ष और चीन के बार-बार अड़ंगा लगाने के बावजूद, 1 मई 2019 को संयुक्त राष्ट्र (UN) ने मसूद अज़हर को ‘ग्लोबल टेररिस्ट’ घोषित कर दिया। इसके बाद उसकी संपत्तियों को फ्रीज करने और यात्रा पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया गया।
वर्तमान स्थिति (2024 – 2026)
बीमारी और अलगाव: पिछले कुछ वर्षों से वह सार्वजनिक जीवन से गायब है। रिपोर्टों के अनुसार मसूद अजहर की किडनी फेल हो चुकी हैं और वो रीढ़ की हड्डी की बीमारी से जूझ रहा है। आजकल मसूद अज़हर पाकिस्तान के बहावलपुर में एक गुप्त ठिकाने पर कड़ी सुरक्षा के बीच है। ऐसी खबरें हैं कि वह मरणासन्न स्थिति में है और उसका आतंकी नेटवर्क उसके भाई अब्दुल रऊफ असगर द्वारा संभाला जा रहा है।