Delhi BJP अब हर्ष मल्होत्रा के हवाले कर दी गई है। वीरेंद्र सचदेवा का तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद हर्ष मल्होत्रा की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा हरियाणा बीजेपी की प्रदेश अध्यक्ष अब अर्चना गुप्ता होंगी। इसी तरह पंजाब की कमान केवल सिंह ढिल्लो और अभिषेक देव रॉय अब त्रिपुरा के नए अध्यक्ष होंगे। आईए इन चारों नए अध्यक्षों के बारे में-
हर्ष मल्होत्रा
हर्ष मल्होत्रा दिल्ली भाजपा के एक बेहद अनुभवी, जमीन से जुड़े और सांगठनिक पकड़ रखने वाले नेता हैं। उनका राजनीतिक सफर जमीनी स्तर के कार्यकर्ता से शुरू हुआ और वे दिल्ली नगर निगम (MCD) के जरिए मुख्यधारा की सक्रिय राजनीति में प्रमुखता से उभरे।
निगम की राजनीति और मेयर: हर्ष मल्होत्रा के राजनीतिक करियर का एक बड़ा पड़ाव तब आया जब वे पूर्वी दिल्ली नगर निगम (EDMC) के रोहतास नगर वार्ड से पार्षद चुने गए। उनकी प्रशासनिक और सांगठनिक क्षमताओं को देखते हुए साल 2015 में उन्हें पूर्वी दिल्ली नगर निगम का मेयर (महापौर) बनाया गया। इस दौरान उन्होंने शिक्षा और स्वच्छता के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधार किए।
संगठन में भूमिका: वह लंबे समय तक दिल्ली भाजपा के प्रदेश महासचिव के रूप में भी कार्यरत रहे, जहाँ उन्होंने संगठन को मजबूत करने और विभिन्न आंदोलनों की रूपरेखा तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।
संसदीय सफर: साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पूर्वी दिल्ली सीट से क्रिकेटर से नेता बने गौतम गंभीर का टिकट काटकर हर्ष मल्होत्रा पर भरोसा जताया। उन्होंने इस चुनाव में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के संयुक्त प्रत्याशी को 93,000 से अधिक वोटों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की।
मोदी कैबिनेट में एंट्री: उनकी साफ-सुथरी छवि और जमीनी पकड़ का इनाम उन्हें तब मिला जब 2024 में नरेंद्र मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल (Modi 3.0) में उन्हें सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय तथा कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री (MoS) की जिम्मेदारी सौंपी गई।
अर्चना गुप्ता
अर्चना गुप्ता हरियाणा भाजपा की एक बेहद सक्रिय और प्रभावशाली महिला नेत्री हैं। पानीपत से ताल्लुक रखने वाली अर्चना गुप्ता ने पार्टी संगठन में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम करते हुए राज्य की राजनीति में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है।
संगठन में अनुभव: अर्चना गुप्ता को हरियाणा में जमीनी स्तर पर संगठन निर्माण का लंबा अनुभव है। वह लंबे समय तक हरियाणा भाजपा की प्रदेश महासचिव (State General Secretary) के पद पर रहीं। इस जिम्मेदारी के दौरान उन्होंने राज्यभर में संगठन के विस्तार, कार्यकर्ताओं के समन्वय और पार्टी की नीतियों को घर-घर पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
महिला नेतृत्व को बढ़ावा: वे भाजपा महिला मोर्चा में भी बेहद सक्रिय रही हैं। उन्होंने न केवल महिला कार्यकर्ताओं को लामबंद किया, बल्कि महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर राज्य स्तर पर कई कार्यक्रमों का नेतृत्व किया।
रणनीतिक पकड़: हरियाणा की राजनीति में पानीपत और उसके आसपास के जीटी रोड बेल्ट का बड़ा राजनीतिक महत्व है। इस क्षेत्र में अर्चना गुप्ता की मजबूत सामाजिक और राजनीतिक पकड़ मानी जाती है। उन्हें संगठन में एक कुशल रणनीतिकार के रूप में देखा जाता है, जो कार्यकर्ताओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। महिला चेहरे के तौर पर उनकी इस सांगठनिक क्षमता को देखते हुए पार्टी ने उन्हें अब प्रदेश कमान की जिम्मेदारी सौंपी है।
केवल सिंह ढिल्लों
केवल सिंह ढिल्लों पंजाब की राजनीति का एक बेहद प्रतिष्ठित और कद्दावर नाम हैं। ढिल्लों मूल रूप से बरनाला जिले के तल्लेवाल गांव के रहने वाले हैं और वे एक सफल उद्योगपति होने के साथ-साथ पंजाब के मालवा क्षेत्र के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं।
कांग्रेस में लंबा सफर और विधायक: ढिल्लों का राजनीतिक करियर लंबे समय तक कांग्रेस पार्टी के साथ रहा। वे पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बेहद करीबी और भरोसेमंद माने जाते थे। ढिल्लों ने साल 2007 से 2017 तक लगातार दो बार बरनाला विधानसभा सीट से विधायक (MLA) के रूप में प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उन्होंने पंजाब कांग्रेस के उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।
भाजपा में शामिल: साल 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद, जून 2022 में केवल सिंह ढिल्लों कई अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। भाजपा में आते ही संगठन ने उनकी वरिष्ठता का सम्मान करते हुए उन्हें पंजाब भाजपा का प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त किया।
मालवा में केवल सिंह का प्रभाव: पंजाब के मालवा बेल्ट में ढिल्लों का गहरा राजनीतिक आधार है। कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ उनके मजबूत संबंधों के कारण उन्हें इस क्षेत्र के किसान और ग्रामीण वोट बैंक में पैठ बनाने वाला नेता माना जाता है। पंजाब में पारंपरिक रूप से हिंदू चेहरे पर निर्भर रहने वाली भाजपा ने ढिल्लों के रूप में एक मजबूत सिख चेहरे को आगे बढ़ाया है ताकि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले ग्रामीण और सिख मतदाताओं के बीच पार्टी की स्वीकार्यता को और मजबूत किया जा सके।
डॉ. अभिषेक देवरॉय
अभिषेक देबरॉय त्रिपुरा भाजपा के युवा, उच्च शिक्षित और उभरते हुए राजनेता हैं। 1982 में जन्मे अभिषेक त्रिपुरा के गोमती जिले के काकराबन के रहने वाले हैं और वे राज्य की युवा पीढ़ी के नेताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि: अभिषेक देव रॉय पेशे से एक फार्मासिस्ट रहे हैं। उन्होंने साल 2020 में राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, कर्नाटक से बैचलर ऑफ फार्मेसी (B.Pharma) की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह से समाज सेवा और राजनीति के लिए समर्पित कर दिया।
राजनीति में एंट्री: अभिषेक देव रॉय ने साल 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में पहली बार चुनावी मैदान में कदम रखा। भाजपा ने उन्हें गोमती जिले की माताबारी विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया। अपने पहले ही चुनाव में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए 51.06% वोट हासिल किए। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रणाजीत रॉय को 9041 वोटों के बड़े अंतर से हराकर विधानसभा में प्रवेश किया।
सांगठनिक दायित्व: विधानसभा के भीतर और बाहर उनके आक्रामक लेकिन सुलगते मुद्दों पर तार्किक रुख ने उन्हें पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की नजरों में ला दिया। वह पूर्वोत्तर में भाजपा के वैचारिक विस्तार और युवाओं को पार्टी से जोड़ने के अभियान में सबसे आगे रहे हैं। त्रिपुरा में पार्टी को एक नए, ऊर्जावान और विवादों से दूर रहने वाले युवा चेहरे की तलाश थी, जिसे डॉ. अभिषेक देव रॉय के रूप में पूरा किया गया है।
