MP ATS Arrests Izhar: बिहार के मधुबनी से ‘गद्दार मौलाना’ गिरफ्तार, इंडिया में रह कर चला रहा था पाकिस्तानी एजेंडा

MP ATS Arrests Izhar: बिहार के मधुबनी से ‘गद्दार मौलाना’ गिरफ्तार, इंडिया में रह कर चला रहा था पाकिस्तानी एजेंडा

MP ATS Arrests Izhar बिहार और मध्य प्रदेश की आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) ने एक बड़ी संयुक्त कार्रवाई करते हुए सीमावर्ती जिले मधुबनी से एक गद्दार मौलाना को गिरफ्तार किया है। इस हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन में MP ATS Arrests Izhar मामले ने देश की आंतरिक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए मौलाना के तार सीधे तौर पर एक विदेशी और विशेषकर पाकिस्तानी हैंडलर से जुड़े हुए थे, जो भारत विरोधी गतिविधियों को संचालित कर रहा था। केंद्रीय खुफिया तंत्र और राज्य पुलिस की यह संयुक्त सफलता देश में सक्रिय डिजिटल आतंकी नेटवर्क के खिलाफ एक बड़ा प्रहार मानी जा रही है।

कौन है संदिग्ध मौलाना और कैसे हुआ इस नेटवर्क का भंडाफोड़?

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार संदिग्ध की पहचान 56 वर्षीय इजहारुल हक (MP ATS Arrests Izhar) के रूप में हुई है, जो स्वर्गीय हाजी अब्दुल गफूर का पुत्र है। वह मूल रूप से बिहार के मधुबनी जिले का निवासी है और काफी समय से स्थानीय स्तर पर अपनी धार्मिक गतिविधियों की आड़ में संदिग्ध नेटवर्क का संचालन कर रहा था। खुफिया इनपुट और तकनीकी निगरानी के आधार पर, मध्य प्रदेश और बिहार एटीएस की टीमों ने एक सटीक और गुप्त जाल बिछाया और मधुबनी से उसे धर दबोचा।

इस त्वरित कार्रवाई के दौरान सुरक्षा बलों को आरोपी के पास से दो हाई-टेक एंड्रॉइड मोबाइल फोन और कई आपत्तिजनक डिजिटल दस्तावेज बरामद हुए हैं। जांच अधिकारियों का कहना है कि इन मोबाइल फोन्स और डिजिटल साक्ष्यों का गहन फोरेंसिक परीक्षण (Forensic Examination) किया जा रहा है, जिससे इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के अन्य सहयोगियों का पता लगाया जा सके।

दारुल उलूम देवबंद से पढ़ाई और अंतरराष्ट्रीय आकाओं से जुड़ाव

शुरुआती जांच और पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इजहारुल हक (MP ATS Arrests Izhar ) की पृष्ठभूमि काफी चौंकाने वाली है। उसने उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध दारुल उलूम देवबंद से स्नातक (Graduation) की पढ़ाई पूरी की थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद, वह कथित तौर पर ‘इमाम मेहंदी’ नामक एक बेहद संदिग्ध और कट्टरपंथी विचारधारा वाले व्यक्ति के संपर्क में आया।

खुफिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि MP ATS Arrests Izhar का मुख्य कारण उसके और पाकिस्तानी हैंडलर के बीच लगातार होने वाली वर्चुअल बैठकें थीं। यह संदिग्ध मौलाना आम कॉलिंग या व्हाट्सएप के बजाय ‘गूगल मीट’ (Google Meet) और अन्य अत्यधिक एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स के जरिए पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं से सीधे संवाद करता था। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य भारत में किसी बड़े स्लीपर सेल (Sleeper Cell) नेटवर्क को सक्रिय करना और स्थानीय स्तर पर युवाओं को गुमराह करना था।

यात्राओं का संदिग्ध पैटर्न और विदेशी फंडिंग का नेटवर्क

सुरक्षा एजेंसियों ने इजहारुल हक (MP ATS Arrests Izhar) की गतिविधियों पर पिछले काफी समय से पैनी नजर रखी हुई थी। तकनीकी साक्ष्यों (Technical Evidence) से यह बात सामने आई है कि वह हर तीन महीने में अनिवार्य रूप से बिहार से बाहर यात्रा करता था। वह कर्नाटक, मुंबई और देश के अन्य बड़े शहरों में संदिग्ध लोगों से मिलने जाता था। इन यात्राओं के पीछे का मकसद संदिग्ध मॉड्यूल के लिए लॉजिस्टिक्स, नई भर्तियों और फंड की व्यवस्था करना माना जा रहा है।

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि उसने बिहार की राजधानी पटना से अपना पासपोर्ट भी बनवाया था, और वह जल्द ही विदेश यात्रा की फिराक में था। इसके अलावा, वह स्थानीय मदरसों में पढ़ने वाले निर्दोष बच्चों को कट्टरपंथी बनाने (Radicalization) के काम में भी संलिप्त था। सुरक्षा सूत्रों का दावा है कि जिस मदरसे से वह जुड़ा हुआ था, उसे सीधे तौर पर विदेशों से संदिग्ध फंडिंग (Foreign Funding) प्राप्त हो रही थी। इस वित्तीय चैनल को डिकोड करने के लिए बैंकिंग इंटेलिजेंस और एटीएस की वित्तीय शाखाएं संयुक्त रूप से काम कर रही हैं।

ट्रांजिट रिमांड पर भोपाल ले गई मध्य प्रदेश पुलिस

मधुबनी से सफल गिरफ्तारी के बाद, मध्य प्रदेश एटीएस की ने आरोपी इजहारुल हक (MP ATS Arrests Izhar )  को स्थानीय मधुबनी कोर्ट में पेश किया। कोर्ट के समक्ष एटीएस के वकीलों ने पुख्ता तकनीकी सबूत और पाकिस्तानी हैंडलर से बातचीत के स्क्रीनशॉट्स पेश किए, जिसके बाद अदालत ने आरोपी की ट्रांजिट रिमांड (Transit Remand) को मंजूरी दे दी। अब MP ATS Arrests Izhar मामले के मुख्य आरोपी को भोपाल स्थित एटीएस मुख्यालय ले जाया गया है, जहां केंद्रीय खुफिया एजेंसियां (IB, NIA) और राज्य पुलिस उससे संयुक्त पूछताछ कर रही हैं ताकि नेटवर्क की अंतिम कड़ियों को जोड़ा जा सके।

 सुरक्षा के लिए तकनीकी चुनौतियां

 देश के आंतरिक हिस्सों, विशेषकर सीमावर्ती जिलों में डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके किस तरह विदेशी हैंडलर अपने नेटवर्क को फैला रहे हैं। गूगल मीट जैसी तकनीकी सुविधाओं का दुरुपयोग कर देश के खिलाफ साजिश रचना कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक नई तकनीकी चुनौती है। एटीएस और अन्य राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी ने समय रहते एक बड़े खतरे को टाल दिया है। फिलहाल भोपाल में चल रही (MP ATS Arrests Izhar से) पूछताछ में कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है, जिससे देश के अन्य राज्यों में सक्रिय स्लीपर सेल्स का पर्दाफाश हो सकेगा।

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Rajeev Sharma

Chief Editor & CEO PhD, LLB
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