बुमराह को मिली पोप का रास्ता रोकने की सजा, 2 साल तक रहेगा बैन का खतरा

बुमराह को मिली पोप का रास्ता रोकने की सजा, 2 साल तक रहेगा बैन का खतरा

ई दिल्ली. भारत को हैदराबाद में खेले गए टेस्ट मैच में सिर्फ हार का सामना नहीं करना पड़ा, बल्कि इसके स्टार बॉलर को आईसीसी से फटकार भी लग गई. आईसीसी ने भारतीय गेंदबाज को पहले टेस्ट मैच के दौरान इंग्लैंड के बैटर ओली पोप का रास्ता रोकने का दोषी पाया है.

जब ओली पोप का रास्ता रोकने की कोशिश की गई, तब वे 156 रन बनाकर खेल रहे थे. आईसीसी ने इसके लिए जसप्रीत बुमराह (Jasprit Bumrah) को दोषी माना है. आईसीसी ने बुमराह को प्लेयर्स कोड ऑफ कंडक्ट तोड़ने के लिए कड़ी फटकार लगाई है.

ओली पोप ने भारत के खिलाफ (India vs England) दूसरे टेस्ट मैच में 196 रन की बेमिसाल पारी खेलकर इंग्लैंड को शानदार जीत दिलाई. इंग्लैंड ने ओली पोप की बदौलत ही भारत को 28 रन से हराया था. ओली पोप ने इंग्लैंड की दूसरी पारी के दौरान 81वें ओवर में जसप्रीत बुमराह (Jasprit Bumrah) की गेंद पर चौका मारा. बुमराह ने अगली गेंद पर ओली पोप को निशाना बनाया. गेंद उनके थाई पैड से टकराई, जिस पर इंग्लिश बैटर्स ने एक रन लेगबाई के रूप में दौड़ लिया. आरोप के मुताबिक जब ओली पोप यह रन दौड़ रहे थे, तब बुमराह जानबूझकर उनके सामने आ गए. इससे दोनों की टक्कर हो गई.

हालांकि, बुमराह ने हाथ उठाकर ओली पोप से माफी मांग ली. लेकिन तूफानी फॉर्म में चल रहा इंग्लिश बैटर इससे संतुष्ट नहीं हुए. उन्होंने इसकी शिकायत अंपायर से की. इसके बाद यह मामला मैच रेफरी तक पहुंच गया. मैच रेफरी रिची रिचर्डसन के मुताबिक यह 24 महीने में जसप्रीत बुमराह के खिलाफ पहला मामला था. इसलिए सुनवाई की जरूरत नहीं पड़ी. मैच रेफरी ने जसप्रीत बुमराह को आईसीसी कोड ऑफ कंडक्ट का दोषी माना. बुमराह को इस घटना के लिए एक डिमैरिट अंक दिया गया.

डिमैरिट अंक किसी खिलाड़ी के नाम 24 महीने तक रहते हैं. इस दौरान अगर जितने भी डिमैरिट अंक मिलते हैं, वे जुड़ते रहते हैं. अगर 24 महीने के भीतर किसी खिलाड़ी के नाम 4 डिमैरिट अंक हो जाएं तो उसे एक टेस्ट या दो लिमिटेड ओवर के मैच (वनडे या टी20) के लिए बैन कर दिया जाता है. यानी, अगर जसप्रीत बुमराह अगली बार ऐसी कोई गलती करते हैं तो उनके डिमैरिट अंक जुड़ते रहेंगे. अगर यह 24 महीने के भीतर 4 तक पहुंच जाता है तो भारतीय गेंदबाज पर बैन भी लग सकता है.

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Rajeev Sharma

Chief Editor & CEO PhD, LLB
Fact Checked & Editorial Guidelines
Reviewed by: Subject Matter Experts

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