Meenakshi Natrajan को सुप्रीम कोर्ट से झटका! नामांकन रद्द होने के खिलाफ याचिका सुनवाई शुक्रवार तक टली

Meenakshi Natrajan को सुप्रीम कोर्ट से झटका! नामांकन रद्द होने के खिलाफ याचिका सुनवाई शुक्रवार तक टली

देश में चल रहे सियासी घमासान के बीच कांग्रेस पार्टी को देश की सबसे बड़ी अदालत से बहुत बड़ा झटका लगा है। मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव की रेस से बाहर हुईं कांग्रेस की वरिष्ठ नेता Meenakshi Natrajan की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई करने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है।

कांग्रेस के शीर्ष कानूनी रणनीतिकारों ने कोर्ट की अवकाशकालीन पीठ के सामने Meenakshi Natrajan के नामांकन को रद्द किए जाने के खिलाफ विशेष अपील दायर की थी और इस पर तुरंत सुनवाई करने की गुहार लगाई थी। लेकिन अदालत ने इस मामले में किसी भी तरह की जल्दबाजी दिखाने से मना कर दिया, जिससे अब Meenakshi Natrajan और कांग्रेस के पास कानूनी तौर पर बेहद सीमित रास्ते बचे हैं।

कहानी क्या है

 इस हाई-प्रोफाइल मामले के बैकग्राउंड को समझना बेहद जरूरी है। दरअसल, यह पूरा विवाद मध्य प्रदेश विधानसभा में आगामी 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से जुड़ा हुआ है। कांग्रेस ने इस सीट के लिए पूर्व सांसद Meenakshi Natrajan को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया था।

9 जून 2026 को नामांकन पत्रों की जांच (Scrutiny) के दौरान मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव और रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने Meenakshi Natrajan का पर्चा खारिज कर दिया। इस फैसले के पीछे मुख्य वजह चुनावी हलफनामे में एक महत्वपूर्ण जानकारी का छिपाया जाना बताया गया।

भाजपा की आपत्ति और हलफनामे का विवाद

इस पूरे विवाद की पटकथा तब लिखी गई जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं, जिनमें राज्यसभा उम्मीदवार महेश केवट और पार्टी के प्रदेश महासचिव राहुल कोठारी शामिल थे, ने Meenakshi Natrajan के नामांकन पर गंभीर लिखित आपत्ति दर्ज कराई। भाजपा का आरोप था कि Meenakshi Natrajan ने अपने नामांकन पत्र के साथ जमा किए गए ‘फॉर्म 26’ (चुनावी हलफनामे) में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित कानूनी मामले की जानकारी को जानबूझकर छुपाया है।

रिटर्निंग ऑफिसर के आधिकारिक आदेश के मुताबिक, Meenakshi Natrajan ने अक्टूबर 2025 में हैदराबाद की एक अदालत द्वारा जारी किए गए नोटिस का जवाब तो दिया था, लेकिन नामांकन दाखिल करते समय इस बात का कोई उल्लेख हलफनामे में नहीं किया। निर्वाचन अधिकारी ने इसे नियमों का उल्लंघन और अपूर्ण हलफनामा मानते हुए कानूनन Meenakshi Natrajan का पर्चा खारिज करने का फैसला सुना दिया।

सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस की दलीलें और कानूनी स्टैंड

इस अप्रत्याशित फैसले के तुरंत बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और वकीलों की टीम ने दिल्ली में निर्वाचन आयोग के सामने प्रदर्शन किया और फिर सुप्रीम कोर्ट में Meenakshi Natrajan का रुख किया। कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दलील दी कि जिस मामले को आधार बनाकर Meenakshi Natrajan का फॉर्म रिजेक्ट किया गया है, वह कोई स्थापित आपराधिक मुकदमा या दर्ज एफआईआर (FIR) नहीं है।

कांग्रेस का वैधानिक पक्ष था कि:

  • संबंधित मामले में किसी भी कोर्ट ने अब तक औपचारिक रूप से संज्ञान (Cognizance) नहीं लिया है।

  • केवल एक प्रारंभिक नोटिस या शिकायत मिलने को ‘लंबित आपराधिक मामला’ नहीं माना जा सकता।

  • नियमों के मुताबिक, मीनाक्षी नटराजन  को हलफनामे में केवल उन्हीं मामलों की घोषणा करनी थी जहां आरोप तय हो चुके हों।

  • इस तरह एक सामान्य नोटिस के आधार पर मीनाक्षी नटराजन  को रेस से बाहर करना पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है।

हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील पर तत्काल अंतरिम राहत देने या तुरंत विशेष सुनवाई करने की Meenakshi Natrajan की मांग को स्वीकार नहीं किया।

‘वोट चोरी’ से ‘सीट चोरी’ तक: गरमाई मध्य प्रदेश की सियासत

इस घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश के सियासी गलियारों में एक नया भूचाल ला दिया है और Meenakshi Natrajan का मुद्दा अब राष्ट्रीय सुर्ख़ियों में है। कांग्रेस नेताओं ने इसे सीधे तौर पर लोकतंत्र पर हमला करार दिया है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी समेत कई शीर्ष कांग्रेस नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा अब विपक्ष की मजबूत उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को रोकने के लिए ‘सीट चोरी’ करने की रणनीति पर काम कर रही है।

दूसरी तरफ, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने मीनाक्षी नटराजन  का फॉर्म निरस्त होने को वैधानिक नियमों की जीत बताया है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के मुताबिक उम्मीदवारों को अपने हर छोटे-बड़े मामलों की जानकारी सार्वजनिक करनी होती है और तथ्य छिपाने की सजा नामांकन रद्द होना ही है।

कांग्रेस को कैसे हुआ इस सीट का भारी नुकसान?

सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई की अर्जी खारिज होने के बाद Meenakshi Natrajan व्यावहारिक रूप से इस चुनाव से बाहर हो गई हैं। मध्य प्रदेश विधानसभा के संख्या बल के अनुसार, सदन में कांग्रेस के पास अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए पर्याप्त विधायक मौजूद थे।मीनाक्षी नटराजन  के चलते अब कांग्रेस के हाथों से जीती-जिताई राज्यसभा सीट फिसल गई है, जिससे विपक्षी खेमे में भारी निराशा है।

अब कांग्रेस और मीनाक्षी नटराजन के पास केवल चुनाव संपन्न होने के बाद ‘इलेक्शन पिटीशन’ (चुनाव याचिका) के माध्यम से इसे चुनौती देने का ही एकमात्र विकल्प बचा है। हालांकि, मीनाक्षी नटराजन की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी के तर्कों के सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसलिए अब इस याचिका पर अभी सुनवाई नही हो सकती है। अब चुनाव परिणाम आने के बाद ही याचिका पर विचार किया जा सकता है।

इस पर वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट को सुझाव दिया कि चुनाव प्रक्रिया को नहीं रोका जासकता तो कोई बात नहीं लेकिन चुनाव परिणाम तब तक घोषित न जाएं जब तक हमारी याचिका पर कोई फैसला न हो जाए।

इस पर जस्टिस पीके मिश्रा की वेकेशन बेंच ने कहा कि प्रतिपक्ष के वकील ने याचिका की प्रति सर्विस नहीं कराए जाने का तर्क दिया है। इसके अलावा याचिका में कई और कमियां पहले इनमें संशोधन करें और प्रतिपक्ष को याचिका की कॉपी सर्विस करवाईए। इसी के बाद याचिका पर सुनवाई संभव है। अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा हम सभी डिफेक्ट आज ही पूरे करवा देंगे। इस पर बेंच कहा कि याचिका पर सुनवाई शुक्रवार को होगी।

नुकसान कांग्रेस को लेकिन याचिका मीनाक्षी नटराजन ने व्यक्तिगत हैसियत से लगाई
इस पूरे प्रकरण में गौरतलब बात यह है कि मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा का पर्चा खारिज होने से  साख को धक्का और राजनीतिक नुकसान कांग्रेस को हो रहा है, लेकिन कोर्ट में कांग्रेस पार्टी की ओर से याचिका नहीं लगाई गई है। मीनाक्षी नटराजन ने व्यक्तिगत हैसियत से रात दो बजे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। सियासी पंडितों का मानना है कि कांग्रेस आलाकमान पहले ही हार मान चुका है।

मीनाक्षी नटराजन और कांग्रेस का एक तबका आखिरी दम तक मैदान में डटे रहना चाहते थे, इसलिए सुप्रीम कोर्ट जाने के मुद्दे पर फैसला लेने में देर हुई और रात दो बजे के बाद याचिका दाखिल की जा सकी।

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