Paper Leak Exclusive मेहनत की भट्टी में जलते छात्र, डार्क वेब पर बिकते प्रश्नपत्र और एनटीए के खोखले दावे!”… देश के 22 लाख से अधिक युवाओं का भविष्य एक बार फिर दांव पर है। यह परीक्षा अब 21 जून को दोबारा आयोजित होगी। देश में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक मामला मोदी सरकार के लिए राष्ट्रीय संकट जैसा बन गया है। ‘पेपर लीक’ के जिन्न ने बाहर देश की साख और पूरी शिक्षा प्रणाली को झकझोर कर रख दिया है। NEET-UG परीक्षा के दोबारा लीक होने और सीबीएसई के मूल्यांकन विवाद ने न केवल सड़कों पर छात्रों का गुस्सा भड़काया है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट की तीखी फटकार ने सरकार को भी बैकफुट पर ला दिया है।
समस्या की गंभीरता को इसी से समझा जा सकता है कि पीएमओ ने समाधान निकालने का जिम्मा रक्षामंत्री राजनाथ को सौंप दिया है। राजनाथ सिंह ने इस सिलसिले में एक आपातकालीन बैठक बुलाई।बैठक में शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत कई विभागों के सचिव उच्चाधिकारी और वायुसेना के अफसर भी शामिल थे।
इस बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में इस समय एक ही सुगबुगाहट है—क्या इस महा-संकट की गाज केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर गिरने वाली है? क्या आगामी कैबिनेट विस्तार में उनसे यह भारी-भरकम मंत्रालय छीन लिया जाएगा? क्या होगा यह तो समय आने पर पता चल ही जाएगा। फिलहाल पेपर लीक के विभिन्न पहलुओं पर देखते हैं newswala.org की विशेष श्रंखला का पार्ट-1
- राष्ट्रीय संकट सरीखी समस्याः मोदी 3.o सरकार के गठन के बाद से ही पेपर लीक और परीक्षा विसंगतियों ने राष्ट्रीय स्तर पर देश की साख को हिलाकर रख दिया है।
- मई 2026 का महा-संकट: NEET-UG 2026 परीक्षा के दोबारा लीक होने और रद्द होने से 22 लाख से अधिक छात्रों का भविष्य अधर में लटका है।
- सवालों के घेरे में NTA: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कानूनी स्थिति, थर्ड-पार्टी वेंडर्स पर उसकी निर्भरता और डार्क वेब के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है।
- राजनीतिक भविष्य: कैबिनेट विस्तार में शिक्षा मंत्रालय (पूर्व में मानव संसाधन विकास मंत्रालय) में बड़े फेरबदल और धर्मेंद्र प्रधान को हटाए जाने की अटकलें तेज हैं। कौन संभालेगा कमान?
मोदी 3.0 और ‘पेपर लीक’ का साया
गठबंधन सरकार के रूप में सत्ता में आई मोदी 3.0 सरकार के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती सीमा पर या अर्थव्यवस्था में नहीं, बल्कि देश के परीक्षा केंद्रों और क्लासरूम के भीतर से आ रही है। पिछले कुछ वर्षों से लगातार देश के अलग-अलग राज्यों में हो रहे पेपर लीक के मामलों ने अब केंद्रीय एजेंसियों को अपनी चपेट में ले लिया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से लेकर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के मूल्यांकन और बड़ी भर्ती परीक्षाओं पर उठते सवालों ने सरकार को बैकफुट पर धकेल दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की हालिया तल्ख टिप्पणियों ने इस आग में घी का काम किया है। देश के करोड़ों युवाओं और उनके अभिभावकों का गुस्सा इस समय सातवें आसमान पर है, जिसने इस मुद्दे को एक विशुद्ध प्रशासनिक विफलता से ऊपर उठाकर एक बड़ा राजनीतिक और रणनीतिक मुद्दा बना दिया है।
पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024
मोदी 3.O के कार्यकाल और उसके ठीक इर्द-गिर्द के घटनाक्रमों पर नजर डालें, तो परीक्षाओं के आयोजन और उनके परिणामों में आई विसंगतियों की एक लंबी फेहरिस्त दिखाई देती है। हालांकि सरकार ने ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024’ लागू किया था, लेकिन जमीन पर इसका असर नाममात्र का दिख रहा है।
विवादों और लीक की क्रोनोलॉजी:
- जून 2024 (NEET-UG 2024 विवाद): मोदी 3.O सरकार के शपथ ग्रहण के ठीक बाद NEET-UG 2024 के परिणामों को लेकर देशव्यापी बवाल हुआ। ग्रेस मार्क्स, एक ही सेंटर से कई टॉपर्स और बिहार-गुजरात से जुड़े पेपर लीक के तारों ने NTA को कटघरे में खड़ा किया। इसके बाद सरकार ने इसरो (ISRO) के पूर्व चेयरमैन डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल कमेटी बनाई थी।
- 3 मई 2026 (NEET-UG 2026 का आयोजन): इस साल 22 लाख से अधिक मेडिकल उम्मीदवारों ने परीक्षा दी।
- 12 मई 2026 (NEET-UG 2026 रद्दीकरण): परीक्षा के ठीक बाद देश के कई राज्यों (विशेषकर नासिक और सीकर, राजस्थान) से पेपर लीक होने और परीक्षा से 15 दिन पहले ही ‘गेस पेपर’ के नाम पर लाखों रुपये में प्रश्नपत्र बेचे जाने के पुख्ता सबूत मिले। इसके बाद NTA को मजबूरन परीक्षा रद्द करनी पड़ी और मामला सीबीआई (CBI) को सौंप दिया गया। अब यह परीक्षा 21 जून 2026 को दोबारा (Re-Exam) होनी तय हुई है।
- 25 मई 2026 (सुप्रीम कोर्ट की फटकार): सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और NTA को नोटिस जारी करते हुए बेहद भावुक और तल्ख शब्दों में कहा—यह बेहद दुखद है कि इन्होंने (NTA) अतीत से कोई सबक नहीं सीखा।”
- 28 मई 2026 (CBSE क्लास 12 मूल्यांकन विवाद): कक्षा 12वीं के नतीजे आने के बाद अचानक छात्रों ने उम्मीद से बेहद कम अंक मिलने की शिकायत दर्ज कराई। हालात इस कदर बिगड़े कि लगभग 4 लाख छात्रों ने अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं (आंसर शीट्स) के लिए आवेदन कर दिया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को खुद इस मामले में दखल देना पड़ा और सीबीएसई मुख्यालय में आपातकालीन बैठक बुलानी पड़ी, जिसमें आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञों को पोर्टल और सर्वर स्टेबिलिटी की जांच का जिम्मा सौंपा गया।
NEET-UG पेपर लीक और NTA की विफलता की पड़ताल
कुछ मीडिया संस्थानों ने NEET-UG पेपर लीक और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के आंतरिक तंत्र की विफलताओं पर एक विस्तृत और चौंकाने वाली रपट तैयार की है। इस पड़ताल के मुख्य अंश देश के परीक्षा सिस्टम की रीढ़ तोड़ने वाली कमियों को उजागर करते हैं:
लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन में भारी चूक
इस रपट के अनुसार, प्रश्नपत्रों की छपाई (Printing) से लेकर उन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुँचाने के बीच के ‘लॉजिस्टिक्स चेन’ में भयंकर लापरवाही बरती गई। नियमानुसार, प्रश्नपत्रों को केवल सरकारी बैंकों (जैसे एसबीआई या पीएनबी) के सुरक्षित स्ट्रांग रूम में रखा जाना चाहिए था। लेकिन पड़ताल में सामने आया कि कई संवेदनशील जिलों में प्रश्नपत्रों को निजी कूरियर कंपनियों के सामान्य गोदामों में या कम सुरक्षा वाले निजी स्कूलों की अलमारियों में रखा गया। इसी ढीली सुरक्षा व्यवस्था का फायदा उठाकर ‘एग्जामिनेशन सिंडिकेट’ ने कूरियर बैग और बक्सों के सील के साथ छेड़छाड़ की और मोबाइल कैमरों के जरिए प्रश्नपत्रों की तस्वीरें लीं।
डार्क वेब और टेलीग्राम नेटवर्क का इस्तेमाल
इस बार पेपर लीक का तरीका पारंपरिक नहीं था। लीक हुए प्रश्नपत्रों को ‘डार्क वेब’ (Dark Web) के सुरक्षित चैनलों और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड टेलीग्राम ग्रुप्स पर बेचा गया। सिंडिकेट ने इसके लिए ‘पे-पर-व्यू’ (Pay-per-view) तकनीक का इस्तेमाल किया, जिसमें पैसे देने वाले छात्र या कोचिंग संचालक केवल एक निश्चित समय के लिए ही स्क्रीन पर प्रश्नपत्र देख सकते थे, ताकि उसका स्क्रीनशॉट न लिया जा सके। इसके बावजूद, नासिक और सीकर के कुछ सेंटर्स पर सॉल्वर गैंग्स ने उत्तर कुंजियाँ तैयार कर लीं।
थर्ड-पार्टी वेंडर्स और आउटसोर्सिंग का आत्मघाती मॉडल
NTA की सबसे बड़ी विफलता इसकी अत्यधिक आउटसोर्सिंग (Outsourcing) नीति रही। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसाररपट बताती है कि NTA के पास अपना खुद का कोई स्थायी और बड़ा स्टाफ ढांचा नहीं है। परीक्षा केंद्रों के चयन, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, सीसीटीवी सर्विलांस और डेटा मैनेजमेंट के लिए एजेंसी निजी थर्ड-पार्टी वेंडर्स पर निर्भर है। पड़ताल में पाया गया कि जिन वेंडर्स को परीक्षा केंद्रों पर जैमर (Jammers) लगाने और सुरक्षा जांच का ठेका दिया गया था, उनके कर्मचारियों ने ही चंद रुपयों के लालच में सॉल्वर गैंग के शूटरों और फर्जी परीक्षार्थियों को केंद्र के भीतर प्रवेश कराया।
सॉल्वर गैंग का कॉर्पोरेट स्टाइल नेटवर्क
बिहार के पटना और झारखंड के हजारीबाग से जुड़े तारों की पड़ताल करते हुए इंडिया टुडे ने पाया कि यह ‘सॉल्वर गैंग’ किसी स्थानीय अपराधियों का गिरोह नहीं, बल्कि एक कॉर्पोरेट कंपनी की तरह काम कर रहा था। इसमें बकायदा ‘रूटर्स’ (जो छात्रों को फंसाते थे), ‘कलेक्टर’ (जो पैसे का लेनदेन संभालते थे) और ‘स्कॉलर्स’ (एम्स और अन्य शीर्ष मेडिकल कॉलेजों के मेधावी छात्र जिन्हें पैसे देकर प्रश्नपत्र हल करवाए जाते थे) शामिल थे। छात्रों को परीक्षा से एक रात पहले गुप्त ठिकानों, जैसे होटलों या फार्महाउसों पर ले जाया जाता था, जहां उन्हें लीक हुए प्रश्नपत्र रटवाए जाते थे।
क्या धर्मेंद्र प्रधान सक्षम मंत्री नहीं हैं?
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान हैं। राजनीतिक विश्लेषकों और विपक्ष के निशाने पर सीधे उनकी प्रशासनिक क्षमता है।
धर्मेंद्र प्रधान का प्रशासनिक अनुभव
प्रधान को भाजपा के सबसे कुशल और संकटमोचक (Troubleshooter) नेताओं में गिना जाता रहा है। उन्होंने पिछले कार्यकालों में पेट्रोलियम जैसे भारी-भरकम मंत्रालय को बेहद कुशलता से संभाला था और वह पीएम मोदी के बेहद भरोसेमंद माने जाते हैं। शिक्षा मंत्री के तौर पर उन्होंने ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020)’ को लागू करने और इसरो के पूर्व चीफ की अगुवाई में रिफॉर्म्स कमेटी बनाने जैसे कदम उठाए हैं। 2026 के ताजा संकट में भी वे लगातार मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर और रिव्यू मीटिंग्स करके स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे हैं।
धर्मेंद्र प्रधान का तंत्र विफल
शिक्षा मंत्रालय का काम सिर्फ नीतियां बनाना नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े परीक्षा तंत्र को सुरक्षित रखना भी है। 2024 के बड़े विवाद के बाद भी NTA के बुनियादी ढांचे में सुधार न हो पाना और 2026 में फिर से NEET का पेपर लीक हो जाना उनकी प्रशासनिक पकड़ पर गंभीर सवाल खड़े करता है। NTA ‘सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860’ के तहत रजिस्टर्ड एक सोसायटी मात्र है, इसे यूपीएससी (UPSC) की तरह एक मजबूत वैधानिक या संवैधानिक दर्जा दिलाने में मंत्रालय विफल रहा। ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों और थर्ड-पार्टी वेंडर्स पर NTA की निर्भरता को खत्म न कर पाना प्रधान की सबसे बड़ी कमजोरी मानी जा रही है।…जारी (पेपर लीक कैसे रुकेगा- पढ़ें Paper Leak Part-2)
