Bareilly जिला अस्पताल बरेली के स्वास्थ्यकर्मियों ने तय कर लिया है कि वो नहीं सुधरेंगे। गरीब बूढ़ी महिला को इलाज न देने के प्रकरण की जांच अभी चल ही रही है कि आज फिर ऐसा मामला आया जहां झुलसे हुए मरीज को काफी देर तक इलाज के लिए इंतजार करना पड़ा। यह शख्स रेलवे यार्ड से जीआरपी जिला अस्पताल लेकर आई थी। बेहद गंभीर अवस्था में झुलसे हुए व्यक्ति को आपातकालीन वार्ड में भर्ती करने से पहले ई रिक्शा में बैठा कर रखा गया, जब उस व्यक्ति को पीड़ा सहन नहीं हुई तो वो अस्पताल के फर्श पर ही लेट गया।
लगातार जारी हैे लापरवाही
जिला अस्पताल की लापरवाही का नमूना बने इस शख्स का नाम सनी है। यह विलासपुर का रहने वाला बताया जाता है। पुलिस ने आशंका जताई है कि सनी हाईटेंशन लाइन के चपेट में आने से झुलस गया था। मगर सवाल यह बना हुआ है कि यह शख्स हाईटेंशन लाइन की चपेट में कैसे आया?
संवेदनशीलता शून्य-प्रशासन का खौफ भी खत्म
बहरहाल सवाल तो जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं का है। बरेली के जिला अस्पताल के कर्मचारियों से मरीजों के प्रतिसंवेदनशीलता और तत्परता की अपेक्षा की जाती है। मगर ऐसा लगता है कि बरेली जिला अस्पताल के कर्मचारियों और चिकित्सकों में संवेदनशीलता बची ही नहीं है या उन्हें शासन-प्रशासन का कोई खौफ नहीं रह गया है।
जीआरपी और आरपीएफ भी कसूरवार
हाथ की उंगली जल जाने के बाद पीड़ा का अहसास कितना भयानक होगा, इस शख्स की तो 25 फीसदी से ज्यादा शरीर झुलसा हुआ और खाल उधड़ी हुई है। इस शख्स को कितनी पीड़ा हो रही होगी। मगर उसकी पीड़ा का अहसास जिला अस्पताल के कर्मचारियों को शायद नहीं है। हालांकि, इस मामले में जीआरपी और आरपीएफ भी कम दोषी नहीं हैं। बरेली जंक्शन का एक अस्पताल भी है और वहां एंबुलेंस भी है। रेलवे यार्ड में झुलसे हुए शख्स को अगर प्राथमिक चिकित्सा नहीं दी जा सकती तो कम से कम एंबुलेंस तो रेलवे की इस्तेमाल की ही जा सकती थी।
25 फीसदी से ज्यादा झुलसे युवक को घण्टों करवाया इंतजार
जितने संवेदनहीन जीआरपी और आरपीएफ उससे ज्यादा संवेदनहीन बरेली जिला अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मचारी है जिन्होंने घण्टों तक झुलसे हुए इंसान को इंतजार करवाया।
स्वास्थ्यमंत्री की सक्रियता के बाद स्वास्थ्य महकमा निष्क्रिय
प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एंव स्वास्थ्यमंत्री बृजेश पाठक ने रविवार की घटना पर संज्ञान लेते हुए जांच बैठाने और दोषियों को सजा के निर्देश दिए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि जिला अस्पताल के कर्मचारी और अधिकारियों ने स्वास्थ्य मंत्री के निर्देशों से सबक ने लेने की ठान रखी है।