Kanha Tiger Reserve: 1 महीने में 6 बाघों की मौत, जिम्मेदार कौन

Kanha Tiger Reserve: 1 महीने में 6 बाघों की मौत, जिम्मेदार कौन

 मध्यप्रदेश के मंडला से इस बड़ी समय सबसे चौंकाने वाली और बेहद चिंताजनक खबर आ रही है। देश-दुनिया में टाइगर कंजर्वेशन का मॉडल माने जाने वाला कान्हा नेशनल पार्क अब खुद सवालों के घेरे में खड़ा है।


1 महीने में 6 बाघों की मौत

Kanha Tiger Reserve 9 दिनों में 5 बाघों की मौत और अप्रैल महीने में कुल 6 मौत। ये आंकड़े किसी सामान्य घटना की तरफ इशारा नहीं करते बल्कि सिस्टम के भीतर किसी बड़ी गड़बड़ी की ओर संकेत दे रहे हैं। सरही जोन जहां जंगल की खामोशी अब मौत की कहानी कह रही है तो प्रबंधन कह रहा है फेफड़ों में संक्रमण बता रहा है।
लेकिन सवाल ये है, आखिर ये कैसा संक्रमण है जो एक के बाद एक बाघों को खाए जा रहा है।

सरही जोन में मौत का सन्नाटा

जहां कभी बाघों की दहाड़ जंगल की पहचान थी। आज वहां सन्नाटा है और उस सन्नाटे में छिपी है मौत की एक डरावनी कहानी 6 अप्रैल कान्हा की प्रसिद्ध बाघिन सुनेना का शव मिलता है। यहीं से शुरू होता है मौत का सिलसिला। 17 अप्रैल सरही जोन में एक बाघिन अपने चार शावकों के साथ बेहद कमजोर हालत में नजर आती है

भूख से तड़पकर शावकों की मौत, सिस्टम फेल

पर्यटक देखते हैं सूचना दी जाती है। लेकिन समय पर सही कदम नहीं उठाए गए। नतीजा यह निकला कि 21 अप्रैल और 24 अप्रैल को दो शावकों की भूख की वजह से मौत हो गई। एक ही दिन बाद यानी25 अप्रैल एक और मादा शावक की मौत हो गई। उसके बाद जिम्मेदार लोगों की आंख खुली और 26 अप्रैल बाघिन अमाही और उसके एक शावक को गंभीर हालत में घोरेल्ला कैंप में भर्ती करवाया गया।

अमाही और शावक भी नहीं बच सके

यहां देर आयद दुरुस्त आयद वाली कहावत चरितार्थ नहीं हुई। 29 अप्रैल वो बाघिन अमाही और उसका शावक दोनों की इलाज के दौरान मौत हो गई। यानि 9 दिन 5 मौतें। ये सिर्फ आंकड़े नहीं ये एक सिस्टम की नाकामी की गवाही हैं।

संक्रमण-जहर या लापरवाही क्या है असली वजह

जंगल प्रबंधन का बहाना बना रहा है कि फेफड़ों में संक्रमण की वजह से बाघों की जान गई लेकिन ये महज एक मेडिकल कारण नहीं है। सच्चाई इससे कहीं ज्यादा गहरी है।
क्या जंगल में कोई खतरनाक बीमारी फैल रही है क्या पानी या शिकार के जरिए कोई जहर बाघों के शरीर में पहुंचा या फिर कहीं न कहीं निगरानी, प्रबंधन और इलाज में भारी चूक हुई है।

फोरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजरें

जबलपुर की फोरेंसिक टीम ने शुरुआती तौर पर संक्रमण की बात कही है लेकिन अब सबकी नजरें फाइनल रिपोर्ट पर हैं सबसे बड़ा सवाल अगर संक्रमण था तो समय रहते अलर्ट क्यों नहीं हुआ इलाज के दौरान भी दो बाघों की मौत कैसे हो गई और सबसे हैरान करने वाली बात पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारी अब तक खुलकर सामने क्यों नहीं आ रहे हैं।

 सियासत तेज, कांग्रेस विधायक ने उठाए साजिश के आरोप

ये मामला सिर्फ जंगल तक सीमित नहीं रहा बल्कि अब इस पर सियासत शुरू हो चुकी है। बिछिया से कांग्रेस विधायक नारायण सिंह पट्टा ने सीधे-सीधे कान्हा प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है बाघों की इन मौतों के पीछे कोई साजिश तो नहीं है। क्या टाइगर स्टेट की पहचान को कमजोर करने की कोशिश हो रही है।

 

टाइगर स्टेट की छवि पर खतरा

कान्हा देश और दुनिया में टाइगर के लिए जाना जाता है लगातार हो रही मौतें बेहद गंभीर और संदिग्ध हैं इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

पर्यटकों के मन में उठा सुरक्षा का सवाल

कान्हा टाइगर सवालों के घेरे में जहां हर साल हजारों पर्यटक बाघ देखने आते थे वहीं अब लोग पूछ रहे हैं—क्या बाघ सुरक्षित हैं। क्या जंगल में कोई अदृश्य खतरा घूम रहा हैया फिर सिस्टम की लापरवाही ने बाघों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया है

आखिर जवाबदेही तय भी होगी या नहीं

फिलहाल सच क्या है ये फोरेंसिक रिपोर्ट बताएगी लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बात साफ कर दी है कान्हा में कुछ तो बहुत गलत हो रहा है और अब सवाल सिर्फ वजह का नहीं जिम्मेदारी का भी है क्या इस बार सिर्फ रिपोर्ट आएगी या फिर जवाबदेही भी तय होगी।

 

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