ColeThomasAllen: हो गया खुलासा, यूं पाक-ईरान से जुड़े हमलावर के तार! ट्रंप की हत्या की ली थी सुपारी

ColeThomasAllen: हो गया खुलासा, यूं पाक-ईरान से जुड़े हमलावर के तार! ट्रंप की हत्या की ली थी सुपारी

ColeThomasAllen आसिफ मर्चेंट, मैथ्यूक्रुक्स और कोल थॉमस ऐलन इन तीनों का एक कॉमन एजेंडा सामने आता है। अब तीनों ही जेल में हैं। लेकिन वो कौन हैं जो सीक्रेट सर्विस के मूवमेंट चार्ट, जैमर्स और सर्विलांस गैजेट्स की तैनाती के साथ-साथ हमले के लिए अन्य लॉजिस्टिक्स मुहैया करवाते रहे हैं? क्या कभी वो चेहरे सामने आ पाएंगे या कैनेडी हत्याकाण्ड की तरह ट्रंप पर हमले की जांच की फाइल भी कुछ दिन बाद दबा दी जाएगी।
कोल थॉमस ऐलन को ट्रंप पर हमला करने के लिए किसने भेजा, किसने हथियार मुहैया करवाए और किसने हिलटन होटल में ठहरने का इंतजाम करवाया..आईए, इस स्टोरी को विभिन्न पहलुओं पर डालते हैं नजर-

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अब समझ में आया होगा क्या होता है ‘हेल होल’ ColeThomasAllen

 पार्ट -1- हेल होल की सच्चाई

वक्त की विडंम्बना देखिए- जिस डोनाल्ड ट्रंप ने माइकल सैवेज के उस अपमानजनक पॉडकास्ट को रिपोस्ट कर भारत को ‘हेल-होल’ बताने वाली सोच पर अपनी डिजिटल सहमति की मुहर लगाई थी, आज वे खुद उसी नर्क के गड्ढे में गिरे नजर आ रहे हैं। एक दिन पेंसिल्वेनिया में गोली उनके कान को चीरती हुई निकल गई थी और अब हिल्टन होटल में उन्हीं के प्रशासन में उनकी हत्याकी साजिश की जा रही है। ट्रंप समेत उन सभी लोगों को अब याद तो आ रहा होगा कि नर्क का गड्ढा भारत है या अमेरिका! ट्रंप ने जिस भारत को सोशल मीडिया पर नीचा दिखाने की कोशिश की थी, आज उसी भारत की स्थिरता अमेरिकी सुरक्षा तंत्र की सड़न पर एक मौन कटाक्ष कर रही है। हिल्टन होटल की सुरक्षा में हुई यह ऐतिहासिक चूक साबित करती है कि ‘हेल-होल’ कोई भौगोलिक वस्तु नहीं, बल्कि वह व्यवस्था है जो भीतरघात और अक्षमता के कारण अपने ही नेतृत्व को सुरक्षित नहीं रख सकती। ट्रंप के लिए यह समय उस रिपोस्ट को याद करने का नहीं, बल्कि यह समझने का है कि असुरक्षा का असली हेल होल्स की सच्चाई आज वॉशिंगटन की उन फाइलों में दर्ज हो चुकी है जिन्हें उनकी अपनी एजेंसियां देख ही नहीं पाईं।

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ColeThomasAllen हमलावर

पार्ट -2- लोन वुल्फ थ्यौरी

बहरहाल, असली मुद्दे पर आते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर हमले की कोशिश करने वाला कोल थॉमस एलन उसी हिल्टन होटल में पहले से ठहरा हुआ था जिसमें व्हाइट हाउस के करसपॉंडेंट्स के लिए डिनर का आयोजन किया गया था। एफबीआई ने इस बात की पुष्टि कर दी है। अभी तक जो लोग इस हमले की साजिश को लोन वुल्फ अटैक की थ्योरी से देख रहे थे वो अब अपने वक्तव्यों पर फिर से गौर करने पर विविश होंगे। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने यह मान लिया है कि यह घटना एक बड़ी सुरक्षा चूक थी। पूछा जा रहा है कि जब सभी एजेंसियों को मालूम था कि प्रेसिडेंट ट्रंप डिनर प्रोग्राम में शामिल होने जा रहे हैं तो हिल्टन होटल में ठहरे अन्य मेहमानों के बारे में सभी जरूरी जानकारियां क्यों नहीं जुटाई गईं। स्निफर डॉग्स की ग्राह्ण शक्ति क्षीण कैसे हो गई कि वो पता नहीं लगा पाए कि हमलावर एक-दो नहीं कई-कई हथियार लेकर घूम रहा था। यह सही है कि अमेरिका में हथियार रखने पर कोई पाबंदी नहीं है लेकिन जिस जगह पर प्रेसिडेंट आने वाले होते हैं उसे पूरी तरह सैनिटाइज किया जाता है। सुरक्षा एजेंसियों को हिल्टन होटल में हथियार होने की जानकारी न हो ऐसा संभव नहीं है।

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ColeThomasAllen के हमले बाद का दृश्य

पार्ट -3- कहानी कॉरिडोर की

होटल का गेस्ट था हमलावर

वॉशिंगटन डी.सी. 25 अप्रैल 2026 की उस शाम जब वॉशिंगटन हिल्टन होटल के आलीशान ‘इंटरनेशनल बॉलरूम’ में व्हाइट हाउस कोरेस्पोंडेंट डिनर के लिए दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोग जमा थे, तब कोई नहीं जानता था कि गलियारे के दूसरी तरफ एक खौफनाक पटकथा लिखी जा चुकी थी। २६ अप्रैल की सुबह होते-होते एफबीआई ने जिस सच की पुष्टि की, उसने अमेरिकी सुरक्षा तंत्र की चूलें हिला दी हैं। हमलावर कोल थॉमस एलन, जो कैलिफोर्निया का रहने वाला 31 वर्षीय युवक है, वह उसी होटल में पहले से ही एक अतिथि के तौर पर ठहरा हुआ था।

हिल्टन होटल: अभेद्य किला या खुला मैदान

जब भी अमेरिकी राष्ट्रपति किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होते हैं, तो सीक्रेट सर्विस उस स्थान को ‘सैनिटाइज’ करने के लिए हफ्तों पहले से काम शुरू कर देती है। हिल्टन होटल, जो अपनी ‘बंकरनुमा’ बनावट के लिए जाना जाता है, उसे अभेद्य माना जाता था। लेकिन कोल थॉमस एलन का वहां पहले से कमरा बुक होना और हथियारों के साथ मौजूद रहना कई गंभीर सवाल खड़े करता है:

गेस्ट लिस्ट की स्क्रीनिंग

नियम के मुताबिक, राष्ट्रपति के आगमन से 48 घंटे पहले होटल के हर मेहमान का बैकग्राउंड चेक होना अनिवार्य है। एलन, जिसका आपराधिक रिकॉर्ड न भी सही, लेकिन सोशल मीडिया पर संदिग्ध गतिविधियां थीं, वह रेडार से कैसे बच गया?

होटल में हथियार

होटल में प्रवेश के समय मेटल डिटेक्टर और स्निफर डॉग्स तैनात थे। ऐसे में एलन अपने कमरे तक ‘पावरफुल हेंडगन और शॉटगन’ तथा अन्य हथियार पहुंचाने में कैसे कामयाब रहा? क्या उसे किसी ऐसे रास्ते से होटल में दाखिल कराया गया जहां सुरक्षा जांच ढीली थी?

सीक्रेट सर्विस की नाकामी

राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद इस घटना को बड़ी सुरक्षा चूक माना है। घटना के समय जब एलन ने मैग्नेटोमीटर (मेटल डिटेक्टर) के पास पहुंचकर एक एजेंट पर गोली चलाई, तब जाकर सुरक्षा घेरा सक्रिय हुआ।

जांच में यह बात सामने आ रही है कि जिस समय एलन होटल की लॉबी में घूम रहा था, सुरक्षा एजेंसियों को उसके पास हथियार होने की भनक तक नहीं थी। जानकारों का कहना है कि यह “सिस्टम फेल्योर” है। यदि एलन ने मुख्य बॉलरूम में घुसने में कामयाब हो जाता और उसने फिर गोलीबारी की होती तो  अंजाम बहुत भयावह हो सकता था।

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Kash Patel हमले के बाद हालात की जानकारी लेते हुए

पार्ट -4-

इनसाइडर थ्रेट

सबसे चौंकाने वाला पहलू ‘भीतरघात’ की आशंका है। जांच एजेंसियों के भीतर दबी जुबान में चर्चा है कि एलन को राष्ट्रपति के सटीक मूवमेंट और होटल के सुरक्षा प्रोटोकॉल की विस्तृत जानकारी थी।

मूवमेंट चार्ट

राष्ट्रपति किस समय किस दरवाजे से दाखिल होंगे और सुरक्षा घेरे में ‘डेड जोन’ (जहां कैमरे या गार्ड कम हों) कहां है, इसकी जानकारी केवल सीक्रेट सर्विस और व्हाइट हाउस के कुछ चुनिंदा अधिकारियों को होती है। एलन का उसी समय सक्रिय होना जब सुरक्षाकर्मी पोजीशन बदल रहे थे, इसे महज इत्तेफाक नहीं कहा जा सकता।

लॉजिस्टिक्स सपोर्ट

एलन के पास जो आधुनिक हथियार पाए गए, उन्हें होटल के भीतर बिना किसी ‘स्थानीय मदद’ के लाया और छुपाया नहीं जा सकता था। क्या होटल स्टाफ या ट्रंप प्रशासन के ही किसी सिक्योरिटी स्टाफ के सदस्य ने उसकी मदद की?

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Hotel Hilton जहां व्हाइट हाउस के जर्नलिस्ट्स के लिए डिनर का आयोजन हुआ

पार्ट -5-

राष्ट्रपति रीगन पर हमला

हिल्टन होटल का चयन ही सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा ‘रेड फ्लैग’ होना चाहिए था। यह वही होटल है जहां 30 मार्च 1981 को राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन की हत्या की कोशिश की गई थी। जॉन हिंकले जूनियर ने इसी इमारत के बाहर रीगन पर गोलियां चलाई थीं। 45 साल बाद, उसी ऐतिहासिक स्थल पर सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक होना यह बताता है कि एजेंसियों ने इतिहास से कोई सबक नहीं लिया।

बटलर से हिल्टन तक

इस घटना की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही दो बार मौत के मुंह से वापस आ चुके हैं। दिनांक 13 जुलाई 2024 बटलर, पेंसिल्वेनिया में एक चुनावी रैली के दौरान थॉमस क्रुक्स की गोली ट्रंप के दाहिने कान को चीरती हुई निकल गई थी। वह केवल कुछ मिलीमीटर का फासला था जिसने अमेरिकी इतिहास को बदलने से रोक लिया।

इसी तरह सितंबर 2024 को वेस्ट पाम बीच स्थित उनके गोल्फ कोर्स की झाड़ियों में एक संदिग्ध हमलावर राइफल के साथ पकड़ा गया था।

दो बार जानलेवा हमलों का सामना करने के बाद, सीक्रेट सर्विस और खुफिया एजेंसियों  से यह उम्मीद थी कि ट्रंप की सुरक्षा ‘जीरो-एरर’ जोन वाली होनी चाहिए। इसके बावजूद, 31 साल का युवक ‘पावरफुल गन’ लेकर उस होटल में कैसे घुस गया जहां राष्ट्रपति खुद मौजूद थे? यह चूक केवल तकनीकी नहीं, बल्कि आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में आती है।

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हमले तार ईरान-पाकिस्तान से जुड़े होने का शक

पार्ट -6-

पाक-ईरान एंगल

ट्रंप पर हमले की कोशिश का ईरान से सीधा लिंक नजर आ रहा है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियां लंबे समय से यह कह रही हैं कि ईरान, जनरल कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए ट्रंप को निशाना बनाने की कोशिश कर रहा है। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी  की शुरुआत में अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े हमले किए हैं, जिसमें ईरान के मिसाइल ठिकानों और परमाणु केंद्रों को निशाना बनाया गया। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की एक हमले में मौत के बाद ईरान में ट्रंप के खिलाफ “जिहाद फतवा” जारी किया था।इसी साल मार्च महीने  ईरान में एक मास-टेक्स्ट कैंपेन चलाया गया, जिसमें ट्रंप की हत्या के लिए 25 मिलियन डॉलर के इनाम का ऐलान किया गया था।

पाकिस्तानी नागरिक आसिफ मर्चेंट

ट्रंप पर हमले की साजिश के तार आसिफ मर्चेंट केस से भी जुड़ते नजर आते हैं। आसिफ मर्चेंट एक पाकिस्तानी नागरिक है। आसिफ मर्चेंट को अमेरिकी अदालत ने हाल ही में अमेरिकी नेताओं की हत्या की सुपारी देने के मामले में दोषी ठहराया है। वो ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के साथ मिलकर ट्रंप सहित कई अमेरिकी नेताओं की हत्या की साजिश रचने का आरोपी है। उसने खुद स्वीकार किया है कि वह ईरान के इशारे पर ट्रंप की सुरक्षा की रेकी कर रहा था।

खास बात यह है कि 12 जुलाई 2024 को आसिफ मर्चेंट की गिरफ्तारी उस समय हुई थी जब वो पाकिस्तान भागने की फिराक में था।

ईरानी एजेंसियों ने ट्रंप सुरक्षा में सेंध लगाई

ईरानी खुफिया एजेंसियों की “काबिलियत” को लेकर अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां  काफी सतर्क रहती हैं। यह पुष्टि हो चुकी है कि ईरानी हैकर्स ने ट्रंप के चुनाव अभियान के डेटा में सेंध लगाई थी। हालांकि सीधे तौर पर सीक्रेट सर्विस के अंदर घुसपैठ का कोई प्रमाण नहीं है। लेकिन आसिफ मर्चेंट जैसे “स्लीपर सेल्स” का इस्तेमाल करना यह बतात है कि ईरानी एजेंसियां अमेरिकी नागरिकों या बाहरी एजेंटों के जरिए सुरक्षा घेरे को समझने और तोड़ने की कोशिश कर रही हैं। इजरायल में भी हाल ही में वायुसेना के तकनीशियनों द्वारा ईरान के लिए जासूसी करने का मामला सामने आया है, जो ईरान की घुसपैठ क्षमता को साबित करता है।

होटल का खर्च और इंसाइडर

कोल थॉमस एलन के मामले में यह शंका पैदा होती है कि एक साधारण व्यक्ति हिल्टन जैसे महंगे होटल में रहने और इतने अत्याधुनिक हथियार खरीदने का खर्च कैसे उठा सकता है। वह पेशे से हाइली एजुकेटेड  क्वालिफाइड टीचर  और कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री होल्डर है। हालांकि उसकी घोषित आय सीमित है। वाशिंगटन डीसी में एक हाई-प्रोफाइल ‘प्रेस गाला’ के दौरान हिल्टन में कमरा बुक करना बहुत महंगा होता है। लगभग असंभव है। तो कोई है तो कोल थॉमस एलन को पैसे से भी मदद कर रहा था। कोल थॉमस एलन का मेटल डिटेक्टर और सीक्रेट सर्विस चेकपॉइंट के इतने करीब पहुँच जाना यह बताता है कि उसे होटल के लेआउट और सुरक्षा प्रोटोकॉल की गहरी जानकारी दी गई थी

क्रिप्टोकरेंसी

खुफिया एजेंसियां उसके क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट्स की जांच कर रही हैं। संदेह है कि उसे किसी अज्ञात स्रोत (पाकिस्तानी-ईरानी नेटवर्क) से पर्याप्त फंड्स मिले थे, ताकि वह सुरक्षा घेरे के अंदर हिल्टन होटल का गेस्ट बनकर पहले से मौजूद रह सके।

एडवांस वेपन-जैमर

कोल थॉमस एलन के पास से शॉटगन, हैंडगन और कई चाकू बरामद हुए हैं, ऐसे एडवांस वेपन खुफिया एजेंटों के पास ही होते हैं। उसके पास संभवतः ऐसा सिस्टम भी था जिसने सीक्रेट सर्विस के जैमर भी हैक कर लिए थे।

आम तौर पर अमेरिका में हथियार खरीदना आसान है, लेकिन एक साथ इतने हथियार और सुरक्षा में सेंध लगाने वाले गैजेट्स (जैसे जैमर या सर्विलांस टूल) का होना एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है।

रेड फ्लैग्स

यह मामला लोन वुल्फ की थ्योरी से कहीं आगे जाता नजर आ रहा है। पाकिस्तानी मूल के नागरिक और ईरानी एजेंट आसिफ मर्चेंट के केस ने पहले ही साबित कर दिया है कि ईरानी एजेंसियां अमेरिका के अंदर ऐसे लोगों को भर्ती कर रही हैं जो बाहर से “आम अमेरिकी नागरिक” दिखें। एलन एक शिक्षित, श्वेत और प्रोफेशनल व्यक्ति था- जिसे सुरक्षा एजेंसियां आसानी से संदिग्ध नहीं मान रही थीं

ट्रंप पर हमले की कोशिश उस समय हुआ जब मध्य पूर्व में युद्ध चरम पर है और ईरान-अमेरिका के बीच इस्लामाबाद (पाकिस्तान) में होने वाली शांति वार्ता विफल हो चुकी है। ट्रंप ने हाल ही में ईरान पर और कड़े प्रतिबंधों की घोषणा की थी।

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भितरघातियों की मदद के बिना हमला संभव नहीं

पार्ट -7-

मध्यावधि चुनाव

यह हमला मध्यावधि चुनाव से पहले अमेरिकी आंतरिक राजनीति में एक नया उबाल ला सकता है। ट्रंप ने इस घटना के बाद एकता की अपील तो की है, लेकिन उनके करीबी सलाहकार ‘डीप स्टेट’  की थ्योरी को फिर से हवा दे रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन के भीतर बैठे कुछ लोग नहीं चाहते कि ट्रंप सुरक्षित रहें।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मामले में किसी ‘अंदरूनी सूत्र’ की संलिप्तता साबित होती है, तो यह अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा सुरक्षा स्कैंडल होगा। यह जेएफके हत्याकांड के बाद की सबसे बड़ी साजिश बन सकती है।

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भितरघातियों की तलाश में FBI

पार्ट -8-

ईरानी-पाकिस्तानी और भितरघाती अमेरिकी

कोल थॉमस एलन फिलहाल हिरासत में है, लेकिन असली अपराधी शायद अभी भी बाहर हैं। हिल्टन होटल की उस शाम ने यह साबित कर दिया है कि दुनिया की सबसे ताकतवर सुरक्षा एजेंसी भी अचूक नहीं है। सवाल अब केवल एलन का नहीं है, सवाल उन आंखों का है जिन्होंने देख कर भी अनदेखा किया और उन हाथों का है जिन्होंने एलन के लिए होटल के दरवाजे खोले।

जब तक व्हाइट हाउस और एफबीआई इस “सुरक्षा सेंध” की तह तक नहीं जाते, तब तक अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा पर हमेशा एक सवालिया निशान लगा रहेगा। यह केवल राष्ट्रपति ट्रंप पर हमला नहीं है, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सुरक्षा व्यवस्था के सीने पर एक घाव है।

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Sd/-

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