Conversion: हिंदुओं को ईसाई बनाने के एक बड़े षडयंत्र का हाल ही में खुलासा हुआ है। गरीब दलित और आदिवासी हिंदुओं को पैसे का लालच देकर ईसाई बनाया जा रहा है। साजिश किसी की नजर में न आए इसलिए विदेशी बैंकों के क्रेडिट कार्ड से पैसा निकाल दलित और आदिवासी बस्तियों में बांटा जा रहा है। फिलहाल तो यह मामला झारखण्ड में पकड़ में आया है, लेकिन आशंका व्यक्त की जा रही है कि ईसाई धर्मान्तरण का यह खेल उत्तर प्रदेश-दिल्ली और एनसीआर के इलाके में चल रहा है।
विदेशी क्रेडिट और डेबिट कार्डों से पैसा निकालने की शिकायतें मिलने पर ईडी हरकत मे आया और संवेदनशील इलाकों में इसकी जांच की गई तो सच्चाई सामने आई।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) फिलहाल झारखंड और छत्तीसगढ़ के माओवादी प्रभावित इलाकों में सक्रिय कुछ ईसाई मिशनरियों की वित्तीय गतिविधियों की गहन जांच कर रहा है। मगर धर्मांतरण के तार यूपी दिल्ली और एनसीआर तक फैले हो सकते हैं।
भारत की खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली थी कुछ रिमोट इलाकों में विभिन्न बैंकों के एटीएम से असामान्य तौर पर पैसा निकाला जा रहा है। प्रारंभिक जांच के बाद पता चला कि ईसाई मिशनरियों से जुड़े कुछ लोग डेबिट और क्रेडिट कार्डों का उपयोग करके बड़ी मात्रा में पैसे निकाल रहे हैं और जिन कार्डों से पैसे निकाले जा रहे हैं वो विदेशी बैंकों या विदेशी खातों से जुड़े हुए हैं। आगे जांच की गई तो शक सच्चाई में बदलता नजर आया असामान्य तौर पर निकाले जा रहे पैसे क उपयोग स्थानीय स्तर पर अवैध धर्मांतरण और माओवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा था।
भारत में विदेशी पैसा लेने के लिए ‘विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम’ (FCRA) के तहत कड़े नियम हैं। ईडी यह जांच कर रही है कि क्या इन मिशनरियों ने जानबूझकर आधिकारिक बैंकिंग चैनलों और FCRA की निगरानी से बचने के लिए विदेशी डेबिट कार्ड का रास्ता अपनाया है।
आमतौर पर, विदेशी धन को एक निर्धारित बैंक खाते में आना चाहिए जिसकी जानकारी सरकार को होती है, लेकिन एटीएम के जरिए सीधे विदेशी खातों से पैसे निकालना इस निगरानी तंत्र को दरकिनार करने की एक कोशिश हो सकती है।
भारतीय एजेंसियों की सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि क्या यह पैसा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नक्सली या आतंकी नेटवर्क तक तो नहीं पहुँच रहा है। बस्तर (छत्तीसगढ़) और झारखंड के भीतरी इलाकों में इस तरह के फंड का इस्तेमाल सुरक्षा बलों के खिलाफ स्थानीय लोगों को भड़काने या नक्सली इको सिस्टम को मजबूत करने के लिए किए जाने की आशंका जताई गई है।
सोर्सेज से मिली जानकारी के अनुसार इसी माह 18 और 19 अप्रैल को एजेंसियों ने एक साथ छह स्थानों पर छापेमारी की, जिसमें दिल्ली-पंजाब और पूर्वोत्तर के राज्य भी शामिल थे। छापेमारी में सामने आया कि ‘द टिमोथी इनिशिएटिव’ (टीटीआई) नाम का एक गैर-पंजीकृत संस्था से जुड़े लोग पूरे भारत में धर्मांतरण और आतंकवादी गतिविधियों में पैसा लगा रहे हैं। यह नेटवर्क दिल्ली जैसे महानगरों में भी सक्रिय होने का संदेह है, जहाँ से संभवतः लेन-देन की गतिविधियों को नियंत्रित किया जा रहा था।