W Bengal Elections पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना शुरू होने में कुछ ही घण्टे शेष बचे हैं। इससे पहले निर्वाचन आयोग ने ऐलान किया था पारदर्शी मतगणना के लिए 165 अतिरिक्त पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाएंगे। निर्वाचन आयोग की तैयारियों को देखें तो इस बार मतगणना केंद्र के भीतर का नजारा कुछ अलग होने वाला है। निर्वाचन आयोग ने बंगाल की मतगणना को पूरी तरह पारदर्शी, निर्विघ्न और निष्ठा के साथ संपन्न करवाने के लिए एक बड़ा दांव चला है। इस मिशन के लिए उत्तर प्रदेश से ‘दबंग’ और ‘कट्टर ईमानदार’ छवि वाले 17 PCS अधिकारियों की एक विशेष टीम बंगाल भेजी है।
योगी के ‘डिसिप्लिन्ड’ अफसरों पर आयोग को भरोसा
निर्वाचन आयोग के आदेश के बाद 165 अतिरिक्त पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है, जिनमें यूपी कैडर के इन 17 अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उन अफसरों को चुना गया है जिनकी छवि प्रशासन में बेहद सख्त और अनुशासन प्रिय रही है। सियासी गलियारों में इस तैनाती को लेकर चर्चाएं तेज हैं कि आयोग बंगाल में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहता।
अजय पाल शर्मा का खौफ और ‘मिशन बंगाल’
बंगाल के सियासी हलकों में इस समय यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी और पर्यवेक्षक अजय पाल शर्मा के नाम की काफी चर्चा है। बताया जा रहा है कि उनके कड़े रुख और निष्पक्ष कार्यशैली से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खेमे में खासी बेचैनी देखी गई थी। अजय पाल शर्मा ने जिस तरह से नियमों का पालन सुनिश्चित करवाया, उसने चुनाव आयोग के भरोसे को और मजबूत किया है। अब यूपी से जा रहे ये 17 PCS अफसर भी अजय पाल शर्मा की तर्ज पर ही निर्वाचन आयोग के निर्देशों को जमीन पर उतारेंगे। इनका मुख्य काम मतगणना के दौरान किसी भी बाहरी दबाव को रोकना और पारदर्शिता बनाए रखना होगा।
इन 17 अफसरों के कंधों पर ‘अतिरिक्त’ जिम्मेदारी
चुनाव आयोग द्वारा जारी सूची में यूपी के अनुभवी और कड़क अधिकारियों को शामिल किया गया है:
- चंदन पटेल: अपर आवास आयुक्त, आवास विकास परिषद, लखनऊ
- राम जी मिश्रा: उपनिदेशक, मंडी परिषद
- अभय कुमार पांडे: सचिव, कानपुर विकास प्राधिकरण
- प्रदीप कुमार: उपनिदेशक, पशुपालन निदेशालय
- संजीव कुमार: रजिस्ट्रार, अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ
- शिशिर कुमार: अपर नगर आयुक्त, नगर निगम आगरा
- अजय कुमार राय: अपर आयुक्त, गोरखपुर मंडल
- आनंद कुमार सिंह: सचिव, मेरठ विकास प्राधिकरण
- अनूप कुमार: संयुक्त निदेशक, ICDS
- बृजेश कुमार त्रिपाठी: संयुक्त निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तिकरण निदेशालय
- दीपेंद्र यादव: अपर नगर आयुक्त, नगर निगम प्रयागराज
- धीरेंद्र सिंह: एडीएम न्यायिक, आगरा
- दीप्ति देव यादव: एडिशनल कमिश्नर, लखनऊ मंडल
- मनोज कुमार सागर: सचिव, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, लखनऊ
- नागेंद्र नाथ यादव: अपर नगर आयुक्त, नगर निगम अयोध्या
एक्सरसाइज का मकसद पारदर्शी मतगणना
निर्वाचन आयोग की इस पूरी कवायद का एकमात्र उद्देश्य पश्चिम बंगाल की मतगणना को बिना किसी बाधा के पूरा करना है। बंगाल का चुनावी इतिहास हिंसा और धांधली के आरोपों से भरा रहा है, ऐसे में दूसरे राज्यों के अनुभवी अफसरों की मौजूदगी से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि जनता और राजनीतिक दलों के बीच प्रक्रिया के प्रति विश्वास भी पैदा होगा। आयोग का निर्देश स्पष्ट है—मतगणना पूरी तरह निष्ठा के साथ और पारदर्शी तरीके से संपन्न होनी चाहिए।
ऐसी अपेक्षा है कि यूपी कैडर अजय पाल शर्मा जैसे अफसरों ने जो मिसाल पेश की है, ये 17 अफसर उसे आगे बढ़ाते हुए मतगणना केंद्रों पर ‘सुपर ऑब्जर्वर’ की भूमिका निभाएंगे। अब देखना यह होगा कि यूपी के इन अधिकारियों की मौजूदगी बंगाल की राजनीतिक तपिश के बीच मतगणना को कितनी सुगमता से संपन्न करा पाती है और टीएमसी समेत बाकी विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया किस तरह आएगी। हालांकि, टीएमसी अपने सभी दांव खेल चुकी है। सुप्रीम कोर्ट से भी टीएमसी को झटका ही मिला है।
अगर चुनाव परिणाम टीएमसी के खिलाफ जाते हैं तो ममता बनर्जी और उनके पार्टी पदाधिकारी केंद्र पर वोट चुराने का आरोप लगा सकते हैं। अगर चुनाव टीएमसी के पक्ष में आए तो ममता दीदी कहेगी कि मोदी और अमित शाह की वोट चुराने की सारी साजिशें नाकाम हो गईं इसलिए उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।