Kaushambi प्रदेश में अपनी जमीन तलाश रही आजाद समाज पार्टी को कौशांबी के चायल में करारा झटका लगा है। भीम आर्मी से जुड़े निसार अहमद द्वारा आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन भीड़ जुटाने के मामले में पूरी तरह विफल साबित हुआ। आयोजन स्थल पर उमड़ी “भारी भीड़” के दावे उस समय हवा-हवाई हो गए, जब पूरे मैदान में बमुश्किल 200 लोग भी नजर नहीं आए। चायल में आजाद समाज पार्टी का सम्मेलन को सुपर फ्लॉप देख कर खुद प्रदेश अध्यक्ष हैरान रह गए। समर्थकों के अभाव में खाली कुर्सियां देख भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के नेता एक दूसरे की बगलें झांक रहे थे। सुनने में तो यह भी आ रहा है कि इस सम्मेलन में कार्यकर्ताओं से ज्यादा नेता ही थे।
खाली कुर्सियां बयां कर रही थीं हकीकत
आयोजन को लेकर पिछले कई दिनों से क्षेत्र में जोर-शोर से प्रचार किया जा रहा था। दो दिन पहले बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भारी जनसैलाब जुटने का दावा किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट रही। सम्मेलन के दौरान मैदान में बिछी खाली कुर्सियां पार्टी की स्थानीय पकड़ की पोल खोलती नजर आईं। कार्यकर्ताओं का यह सम्मेलन महज एक मजाक बनकर रह गया।
प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदगी का भी नहीं दिखा असर
हैरानी की बात यह रही कि सम्मेलन में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष खुद मौजूद थे। शीर्ष नेतृत्व की उपस्थिति के बावजूद स्थानीय नेता जनता और कार्यकर्ताओं को आयोजन स्थल तक लाने में नाकाम रहे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रदेश अध्यक्ष के सामने इस तरह का ‘फ्लॉप शो’ होने से स्थानीय पदाधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
चुनावी दावों पर गहराया संकट
आजाद समाज पार्टी पूरे उत्तर प्रदेश में मजबूती से प्रत्याशी उतारने और चुनाव लड़ने की बात कर रही है, लेकिन चायल की इस तस्वीर ने पार्टी की जमीनी तैयारियों की पोल खोल दी है। स्थानीय स्तर पर पार्टी की पकड़ इतनी कमजोर दिखी कि दावेदारी पर ही संकट गहराता नजर आ रहा है।
नई रणनीति की जरूरत
चायल में हुए इस शक्ति प्रदर्शन की विफलता के बाद अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को जिले में अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करना होगा। यदि आगामी चुनावों में सम्मानजनक उपस्थिति दर्ज करानी है, तो केवल सोशल मीडिया पर शेर बनने से काम नहीं चलेगा। हालांकि, भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी बसपा को पटखनी देने और उसका वोट काटने के लिए ऐसे कार्यक्रम कर रहे हैं। पार्टी की मंशा है कि किसी तरह कैडर जुटाया जाए जिससे 2027 के चुनाव में प्रदेश में अपनी चमक-दमक दिखा सकें। बहरहाल कौशाम्बी में हुए फ्लॉप शो से तो उम्मीदें काफी कम नजर आ रही हैं।