Rahul Gandhi की गुपचुप मस्कट यात्रा- दुश्मन चीन के साथ देश के खिलाफ खतरनाक साजिश का ताना-बाना!

Rahul Gandhi की गुपचुप मस्कट यात्रा- दुश्मन चीन के साथ देश के खिलाफ खतरनाक साजिश का ताना-बाना!

देश की राजनीति में लगातार पिछड़ रहे राहुल गांधी ख़तरनाक रास्ते पर कदम बढ़ा चुके हैं। नरेंद्र मोदी और बीजेपी के खिलाफ राहुल गांधी विदेशी ताकतों के साथ रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। यह ठीक वैसे ही जैसे पर्वतराज पौरू को हराने के लिए अम्भी ने सिकंदर के साथ षडयंत्र रचा था। सिंकदर को भारत पर आक्रमण के लिए आमंत्रित किया था।  मार्च 2023 में लंदन के चैथम हाउस में राहुल गांधी ने बयान था-,”भारत में लोकतंत्र पर ‘बर्बर हमला’ हो रहा है और हैरानी है अमेरिका और यूरोप, जो खुद को लोकतंत्र के रक्षक कहते हैं, यह नहीं देख रहे हैं कि भारत में लोकतंत्र का एक बड़ा हिस्सा खत्म हो रहा है।”


Rahul Gandhi यह राहुल गांधी पहला सार्वजनिक बयान था जिसमें उन्होंने विदेशी ताकतों को भारत की संप्रभुता पर हमले के खुले आम न्यौता दिया था। 29 अप्रैल को प. बंगाल में दूसरे चरण का मतदान था और राहुल गांधी सोशल मीडिया पर ग्रेटर अंडमान निकोबार प्रोजेक्ट के खिलाफ वीडियो शेयर कर रहे थे। यह प्रोजेक्ट भारत की राजनीतिक और आर्थिक सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। चीन की स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स रणनीति के खिलाफ भारत का यह बहुत अहम कदम है। राहुल केवल वीडियो बनाने तक ही सीमित नहीं रहे वो अगले ही दिन चुपके से ओमान की राजधानी मस्कट पहुंच कर भारत के दुश्मन चीनी मोहरों के साथ कॉफी पी रहे थे। आईए, सिलसिलेवार तरीके से राहुल गांधी की रहस्यमयी मस्कट यात्रा के खतरनाक नतीजों पर नज़र डालके हैं।

राहुल गांधी की मस्कट यात्रा के मायने

राजनीति और कूटनीति की दुनिया में कुछ भी अचानक या इत्तेफाक नहीं होता। हर कदम के पीछे एक सोची-समझी रणनीति होती है। हाल ही में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की मस्कट (ओमान) की गुपचुप यात्रा से देश के सुरक्षा विशेषज्ञों और राष्ट्रवादियों के कान खड़े हो गए हैं।। जब पूरा देश बंगाल चुनाव के नतीजों की गिनती देख रहा था, तब राहुल गांधी लगभग भेष बदलकर मस्कट के एक चर्चित कैफे में कॉफी का मज़ा ले रहे थे। राहुल गांधी मस्कट में छुट्टियां बिताने नहीं गए थे, यह ठीक वैसी थी जैसी उनकी वियतनाम यात्रा। राहुल गांधी की मस्कट में ‘मस्ती’ भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और समुद्री रणनीति के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत हैं।

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Rahul Gandhi से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यह मुलाकात बहुत खास है। शी जिनपिंग किसी भी मेहमान से दोनों हाथ से हाथ नहीं मिलाते, पुतिन से भी नहीं, लेकिन राहुल गांधी से क्यों-आखिर कोई बात तो होगी?

भारत के खिलाफ साजिश

भारत इस समय दुनिया में अपनी धाक जमाने के लिए “नेकलेस ऑफ डायमंड्स” (Necklace of Diamonds) रणनीति पर काम कर रहा है। इसका मतलब है कि हम समुद्र में ऐसे रणनीतिक ठिकाने बना रहे हैं जो चीन की घेराबंदी को तोड़ सकें। लेकिन घर के भीतर ही कुछ लोग इन योजनाओं में रोड़ा अटका रहे हैं।

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2018 में चीनी राजदूत के साथ Rahul Ganhdi की मुलाकात

राहुल गांधी की यह गुप्त यात्रा ठीक उसी समय हुई जब उन्होंने ‘ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट’ (Great Nicobar Project) का कड़ा विरोध किया। उन्होंने इस महत्वपूर्ण डिफेंस प्रोजेक्‌ट को ‘घोटाला’ और ‘पर्यावरण के लिए खतरा’ खतरा बताते हुए मोदी सरकार पर हमला बोला था। गौर करने वाली बात यह है कि यह प्रोजेक्ट ठीक उसी समुद्री रास्ते (मलक्का जलडमरूमध्य) के पास है, जहाँ से चीन का सबसे ज्यादा व्यापार होता है।

इस प्रोजेक्ट के निर्माण में बाधा डालने के साफ मकसद, प्रत्यक्ष और परोक्ष दोनों तरफ से चीन को फायदा पहुँचाना है। चीन भारत में राजनीतिक द्वंद सत्ता को संकटों से घिरा देखना चाहता है ताकि वो ठीक समय आते ही भारत पर हमला कर दे। चीन की निगाह पूर्वी लद्दाख और अरुणाचल पर लगी हुईं है। राहुल गांधी के पिता राजीव गांधी के नाना जवाहर लाल नेहरू ने अक्साई चिन चीन को दे दिया था। क्या राहुल गांधी नेहरू के पद्चिन्हों पर नहीं चल रहे हैं?

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Rahul Gandhi देश के दुश्मनों से गुपचुप क्यों मिलते रहते हैं

 कैफे फराह और चीनी कनेक्शन

ओमान की राजधानी मस्कट के जिस ‘कैफे फराह’ में राहुल गांधी मौज मस्ती कर रहे थे। उसका संबंध सीधे तौर पर चीन की सरकार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पीएलए से जुड़ा हुआ है।

  • कैफे फराह को ‘अल जमान हॉस्पिटैलिटी’ नाम की कंपनी चलाती है, जिसके मालिक खालिद जमान है।
  • खालिद जमान ‘ब्लू-फाइव कैपिटल’ नाम की कंपनी चलाते हैं।
  • इसी कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में में उनके साथ चीन के नामी गिरामी बिजनेसैन फैंग फेंगलेई भी शामिल है।
  • फैंग फेंगलेई कोई मामूली इंसान नहीं हैं। वो  चीन के बड़े इन्वेस्टमेंट बैंकर हैं। फेंगलेई के पिता पीएलए में बड़े सैन्य अधिकारी के बेटे और चीन के पूर्व उपराष्ट्रपति वांग किशान के करीबी दोस्तों में से एक हैं।
कैफे फराह में गुपचुप कॉफी पीते भारत के LOP Rahul Gandhi
कैफे फराह में गुपचुप कॉफी पीते भारत के LOP Rahul Gandhi
AI Image सौजन्य से X @HemanNamo

इसको  महज एक संयोग नहीं माना जा सकता कि जिस कैफे में राहुल गांधी मस्ती करने गए थे, उसके मालिक के तार सीधे तौर पर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और चीन की सेना पीएलए  से जुड़े हुए हैं। सबसे अहम बात को यह है कि जिस दिन राहुल गांधी अंडमान निकोबार में थे ये लोग चीन की यात्रा पर थे। यानी राहुल गांधी अंडमान से मस्कट और खालिद-फेंगलेई चीन से मस्कट लगभग एक ही समय पर पहुंचे थे। क्या राहुल गांधी ने मस्कट में भारत की समुद्री सुरक्षा से जुड़ी की खुफिया डिटेल्स और डॉक्यूमेंट्स चीन के हाथों को नहीं सौंप दिए?

भारत की आर्थिक और सैन्य सुरक्षा के लिए अहम बंदरगाह

ग्रेट निकोबारः यहाँ राहुल गांधी ने पर्यावरण के नाम पर प्रोजेक्ट का विरोध करके भारत की स्थिति कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। इस प्रोजेक्ट को अडाणी ग्रुप डेवलप कर रहा है। विषम परिस्थितियों में यहां से चीन के समुद्री व्यापार को भारत बाधित कर सकता है यानी चीन को उसकी हदों में रहने पर विवश कर सकता है।

दुकम-ओमान: मस्कट वह शहर है जो ओमान के दुकम बंदरगाह के पास है। यहाँ भी भारत का अडाणी ग्रुप डेवलप कर रहा है। ताकि पाकिस्तान में चीन प्रभुत्व वाले ग्वादर बंदरगाह से होने वाली गतिविधियों का जवाब दिया जा सके। दुकम बंदरगाह से चीन की सैन्य और असैन्य दोनों गतिविधियों पर नियंत्रण किया जा सकता है। इन दोनों जगहों को लेकर राहुल गांधी की गतिविधियों पर संदेह क्यों उत्पन्न होता है? तो इसका स्पष्ट जवाब है साल 2008 में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ भारत की कांग्रेस पार्टी का एमओयू। इसस एमओयू पर खुद राहुल गांधी के हस्ताक्षर हैं। राहुल गांधी उस समय कांग्रेस जनरल सेक्रेटरी थे। अब जानते हैं कि वो एमओयू क्या है?

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2008 में चीन की सीसीपी के साथ एमओयू पर साइन करते राहुल गांधी-आखिर क्या था यह एमओयू-अब समझ में आ रहा है!

कांग्रेस और सीसीपी के साथ पार्टी टू पार्टी एमओयू

कांग्रेस (इंडियन नेशनल कांग्रेस) और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के बीच 7 अगस्त 2008 को बीजिंग में एक समझौते ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह समझौता कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी और तत्कालीन चीनी उपराष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी हुआ।

  • कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी और सीसीपी की ओर चीनी विदेश विभाग  के जनसंपर्क प्रमुख वांग जिआ रुई ने इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे
  • यह समझौता आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।
  • जब भी भारत और चीन के बीच विवाद होता है (जैसे डोकलाम या गलवान), कांग्रेस की भाषा अक्सर चीन के नैरेटिव से मेल खाती है।
  • मस्कट की यह गुप्त मुलाकात इसी पुराने समझौते की अगली कड़ी है, जहाँ देश के हितों से ज्यादा अहमियत एक विदेशी पार्टी के साथ संबंधों को दी जा रही है।

अडाणी और भारतीय कंपनियों पर हमला क्यों

राहुल गांधी अक्सर अडाणी ग्रुप और अन्य भारतीय उद्योगपतियों पर हमला करते है। रणनीतिक दृष्टि से देखें, तो अडाणी ग्रुप ही वह कंपनी है जो ओमान के दुकम और अन्य विदेशी बंदरगाहों पर भारत का झंडा गाड़ रही है। इन कंपनियों को कमजोर करने का मतलब है भारत की आर्थिक और कूटनीतिक और सामरिक शक्ति को विदेश में कमजोर करना है। जिससे सीधे तौर पर चीन का स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स (String of Pearls) मजबूत होता है।

चीनी सोर्सेज से गुपचुप क्यों मिलते हैं राहुल गांधी

राहुल गांधी एक सामान्य विपक्षी सांसद नहीं हैं। वो लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। मतलब यह कि संसद में उनका स्थान प्रधानमंत्री के बाद आता है। ऐसे महत्वपूर्ण पद पर होने के बावजूद राहुल गांधी की गुपचुप विदेश यात्राओं से उनकी निष्ठा पर संदेह पैदा होना स्वाभाविक है। मसकट में राहुल गांधी की न तो कोई प्रेस ब्रीफिंग थी, न ही कोई आधिकारिक कार्यक्रम। राहुल गांधी का भेष बदलकर घूमना और चीनी सेना से जुड़े लोगों के करीब जाना यह दर्शाता है कि कुछ जरूर ऐसा है जिसे देश की सरकार और जनता से छिपाया जा रहा है, और यह भारत संप्रभुता के लिए बड़ा खतरा हो सकता है।

राहुल गांधी की वजह से देश की सुरक्षा-अस्मिता ख़तरे में!

राहुल गांधी की मस्कट की यह यात्रा कोई हॉलिडे विजिट नहीं थी। यह भारत के रणनीतिक-सामरिक प्रोजेक्ट्स को रोकने और चीन को मदद करने की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। जब राहुल गांधी जैसा कोई नेता देश के दुश्मनों के मददगारों के साथ कॉफी पीता है, तो सवाल  उठना लाजिमी है। भारत को अब बाहरी दुश्मनों से ज्यादा, भीतर छिपे उन अम्भियों से सावधान रहने की जरूरत है जो दुश्मनों के साथ कॉफी पीकर देश की सुरक्षा को खतरे में डाल रहे हैं।

सरकार ही नहीं जनता को सतर्क रहने की जरूरत

भारत इस समय एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी सीमाओं को सुरक्षित कर रहा है, तो दूसरी तरफ राहुल गांधी जैसे  कुछ लोग अवरोध पैदा कर दुश्मनों की राह आसान करने की साजिश कर रहे हैं।

 

 

 

 

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