Mukhtar Ansari को आजीवन कारावास, फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में कोर्ट ने सुनाई सजा

Mukhtar Ansari  (मुख्तार अंसारी) को वाराणसी की MP-MLA कोर्ट ने आर्म्स एक्ट के मामले में सजा सुना दी है. कोर्ट ने माफिया मुख्तार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है.

कोर्ट ने बीते मंगलवार को ही अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था जिसके बाद आज फैसला सुनाया गया है. 36 साल पुराने मामले में वाराणसी की अदालत ने फैसला सुनाया है.

मंगलवार को फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में मुख्तार अंसारी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए थे. बता दें कि फर्जी लाइसेंस लाइसेंस में मुख्तार के खिलाफ यह 8वां मामला है जिसमें कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है. इससे पहले माफिया पर सात मामलों में सजा हो चुकी है. इन सात मामलों में से तीन मामलों पर सजा वाराणसी की एमपी-एमएलए कोर्ट ने ही सुनाई थी.

किस मामले में आरोपी?

माफिया मुख्तार अंसारी के खिलाफ, 10 जून 1987 को दोनाली बंदूक के लाइसेंस के लिए जिला मजिस्ट्रेट के सामने प्रार्थना पत्र दिया गया था. जिसके बाद जिलाधिकारी और पुलिस अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर लेने के बाद अंसारी ने लाइसेंस प्राप्त कर लिया था. लेकिन जब ये फर्जीवाड़ा सामने आया तो CB CID ने 1990 में मुख्तार, डिप्टी कलेक्टर सहित पांच अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था.

गौरीशंकर श्रीवास्त की हो गई थी मौत

यूपी के बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी के खिलाफ जब कोर्ट में सुनवाई चल रही थी, इसी दौरान तत्कालीन आयुध लिपिक गौरीशंकर श्रीवास्तव की मौत हो गई थी. लेकिन मुख्तार के खिलाफ मामले की सुनवाई जारी रही. जिसके बाद आज कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया.

वाराणसी कोर्ट में इस मामले की लंबे समय से सुनवाई चल रही थी. वहीं, अभियोजन पक्ष की तरफ से मुख्तार के खिलाफ गवाही देने के लिए प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन,पूर्व डीजीपी देवराज नागर समेत दस गवाह पेश किए गए थे. इसके अलावा, ADGC विनय कुमार सिंह और CB CID की ओर से पेश अधिकारी उदय राज शुक्ला ने मामले में पैरवी भी की.

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