Hotel Flourish Stay में 21 लोगों की मौतः एरिया DCP-MCD कमिश्नर पर FIR का आदेश देंगे गृहमंत्री अमित शाह?

Hotel Flourish Stay में 21 लोगों की मौतः एरिया DCP-MCD कमिश्नर पर FIR का आदेश देंगे गृहमंत्री अमित शाह?

Hotel Flourish Stay देश की राजधानी दिल्ली के पॉश इलाकों में से एक मालवीय नगर के होटल फ्लोरिश स्टे’ (Flourish Stay) में हुए अग्निकाण्ड के लिए क्या होटल का मालिक ही जिम्मेदार है या लोकल पुलिस से लेकर डीडीए-एमसीडी-डीडीए और फायर सेफ्टी डिपार्टमेंट तक सभी जिम्मेदार हैं। क्या लोकल पुलिस स्टेशन के एसएसएचओ के खिलाफ होटल में जलकर मरे लोगों की हत्या का मुकदमा दर्ज होगा? या लॉजिंग हाउसिंग लाइसेंस देने वाले डीसीपी के खिलाफ एफआईआर होगी? जवाब है हरगिज़ नहीं! तो फिर कौन जांच और कार्रवाई का ढ़िंढौरा क्यों पीटा जा रहा है?

एमसीडी कमिश्नर के खिलाफ एफआईआर होगी क्या?

मालवीय नगर के Hotel Flourish Stay  अग्निकाण्ड के लिए डीडीए-एमसीडी, पॉवर सप्लाई और फायर सेफ्टी डिपार्टमेंट भी बराबर के जिम्मेदार हैं। कायदे से इन सभी के खिलाफ भी होटल मालिक के लवकुश बजाज की तरह 21 लोगों की मौत का मुकदमा दर्ज होना चाहिए।लेकिन इन सबसे ज्यादा जिम्मेदार दिल्ली पुलिस यानी मालवीय नगर पुलिस का एसएचओ और डिप्टी पुलिस कमिश्नर है। बीट इंचार्ज हर दिन होटलों का मुआयना करता है। उसे पता होता है कि कौन से होटल में कितने रूम हैं, होटल वैध या अवैध है। होटल में कितने रूम स्वीकृत हैं। होटल में कितने मेहमान ठहरे हुए हैं और उनकी पहचान क्या है? होटल की लॉजिंग और हाउसिंग लाइसेंस पर तो जारी है डिप्टी पुलिस कमिश्नर के कलम से होता है। तो यह कैसे संभव है कि 6 कमरों की परमीशन वाले होटल में 25 कमरे बने होने की जानकारी पुलिस को न हो?

डीसीपी साकेत के खिलाफ मुकदमा दर्द होगा क्या?

दिल्ली की पुलिस केंद्र सरकार के अधीन है यानी गृह मंत्रालय के अधीन है। गृहमंत्रालय अमितशाह के अधीन है। यह सही है कि अमित शाह को मालवीय नगर की किस गली में कौन से अवैध होटल चल रहा है इसकी जानकारी न हो लेकिन उनके अधीनस्थ अधिकारियों को जानकारी होनी चाहिए न! क्या गृहमंत्री अमित शाह उस पुलिस अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और कार्रवाई करने के निर्देश देंगे?

लवकुश बजाज गिरफ्तार होगा, एक-दो होटल सील होंगे, दो-चार पर जुर्माना और टांय-टांय फिस्स

बड़े-बड़े हादसों की तरह जल्द ही इस हादसे को भुला दिया जाएगा। होटल मालिक को पकड़ कर जेल भेज दिया जाएगा। एक दो होटलों को सील किया जाएगा, एक दो पर जुर्माना डाला जाएगा, सिर्फ यह औपचारिकता पूरी के लिए कि दिल्ली में सरकार नाम की कोई चीज भी है। मालवीय नगर होटल अग्निकाण्ड के लिए उसका मालिक लवकुश बजाज ही अकेला जिम्मेदार नहीं है, बल्कि उसके वो सभी अधिकारी जिम्मेदार हैं जिन्होंने इस होटल को बनाने और चलाने के लाइसेेंस और परमीशन जारी किए।

कैसे हुआ हादसा- कैसे गई 21 लोगों की जान

घटनास्थल से सामने आए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि होटल के भीतर फंसे लोग किस कदर मौत के मुंह से निकलने के लिए बेताब थे। चारों तरफ उठती आग की लपटों और काले धुएं के बीच एक शख्स दूसरी मंजिल की खिड़की से बाहर लटकता हुआ दिखाई दिया, जो ऊंचाई अधिक होने के कारण कूदने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था।

वहीं, एक अन्य वीडियो में पहली मंजिल की खिड़की से एक व्यक्ति ने नीचे छलांग लगा दी। गनीमत यह रही कि नीचे मौजूद स्थानीय लोगों ने सूझबूझ दिखाते हुए सड़क पर गद्दे बिछा दिए थे, जिससे उसकी जान बच सकी। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और जलते हुए होटल पर काबू पाने की कोशिशों में जुट गईं।

नियमों को ताक पर रखकर मौत का खेल: हुए 5 बड़े खुलासे

इस दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासन और होटल प्रबंधन की जो बड़ी लापरवाहियां सामने आई हैं, उन्होंने इस होटल को एक ‘डेथ ट्रैप’ (मौत का जाल) बना दिया था:

फायर विभाग की NOC नहीं थी: शुरुआती जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि होटल फ्लोरिश स्टे के पास फायर विभाग का एनओसी (No Objection Certificate) तक नहीं था। होटल बिना किसी वैध सुरक्षा अनापत्ति प्रमाण पत्र के धड़ल्ले से चल रहा था।

फायर फाइटिंग सिस्टम गायब: इतने बड़े होटल के भीतर आग से निपटने के लिए कोई भी इंटरनल फायर फाइटिंग सिस्टम (अग्निशामक यंत्र या स्प्रिंकलर) चालू हालत में नहीं था।

सील थीं खिड़कियां, दम घुटने से हुई मौतें: होटल की सभी खिड़कियों को स्थाई रूप से सील किया गया था। आग लगते ही जहरीला और काला धुआं पूरी बिल्डिंग में भर गया। बाहर निकलने का रास्ता न मिलने के कारण अधिकांश लोगों का दम घुट गया।

पूरी बिल्डिंग में सिर्फ एक ही सीढ़ी: बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर को मिलाकर यह कुल 5 मंजिला इमारत थी। नियमों के मुताबिक ऐसी इमारतों में इमरजेंसी एग्जिट होना अनिवार्य है, लेकिन यहां ऊपर से नीचे आने-जाने के लिए केवल एक ही संकरी सीढ़ी थी।

काल बना इलेक्ट्रॉनिक डोर लॉक: होटल के मुख्य गेट पर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक लॉक लगा हुआ था। आग लगते ही जैसे ही होटल की बिजली काटी गई, यह दरवाजा पूरी तरह जाम (लॉक) हो गया। इसके बाद चाहकर भी लोग बाहर नहीं भाग सके।

6 कमरों की परमिशन पर खड़े कर दिए 25 कमरे

होटल संचालक द्वारा की गई अवैध कंस्ट्रक्शन की कहानी भी बेहद चौंकाने वाली है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस जगह पर केवल 6 कमरे बनाने की मंजूरी (परमिशन) दी गई थी, लेकिन लालच में आकर संचालक ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए यहां 25 कमरे तैयार कर दिए थे।

बिल्डिंग के बेसमेंट में अवैध रूप से कमर्शियल किचन चलाया जा रहा था, जबकि टॉप फ्लोर पर भी दो कमरे बना दिए गए थे। फिलहाल पुलिस और प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी है और होटल मालिक व प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। लेकिन इस हादसे ने एक बार फिर दिल्ली में चल रहे अवैध कमर्शियल होटलों और सुरक्षा मानकों के दावों की पोल खोलकर रख दी है।

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