OBC आरक्षण पर सोमवार को हुई बहस के बाद जबलपुर हाईकोर्ट ने कहा कि मंगलवार को इस मामले में पूरी बहस की जाएगी। कार्यदिवस के आखिरी पहर में जैसे ही सुनवाई शुरू हुई वैसे ही अजीब स्थिति पैदा हो गई। अदालत में सरकार द्वारा नियुक्त अधिवक्ता सरकार के खिलाफ बहस करने लगे।
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता वरुण ठाकुर ने कोर्ट को याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश अनुसार इस मामले का निपटारा तीन महीने में करना है। लगभग डेढ़ महीना बीत चुका है। इस पर कोर्ट ने भी सहमति जताई और कहा कि वह खुद इस मामले को जल्द सुनना चाहते है। लेकिन परिस्थितियों के कारण आज समय नहीं मिल पाया। कोर्ट ने साफ किया कि मंगलवार 28 अप्रैल को इस केस को पूरा समय दिया जाएगा।
सुनवाई के दौरान यह अहम मुद्दा उठा कि इस मामले की मुख्य याचिका कौन सी होगी। बहस के बाद कोर्ट ने तय किया कि याचिका क्रमांक 5901/2019 को ही मुख्य आधार माना जाएगा। साथ ही यह भी सामने आया कि अलग-अलग याचिकाओं में फैले तथ्यों और दस्तावेजों का कोई एकीकृत रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि अब सभी जवाब और दस्तावेज मुख्य याचिका में अपलोड किए जाएंगे। इससे एक कम्पाइल्ड डेटा तैयार होगा और सुनवाई सुगम होगी।
सुनवाई के दौरान एक दिलचस्प स्थिति तब बनी जब सरकारी अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह आरक्षण से ही जुड़ी एक अन्य याचिका पर में सरकार के खिलाफ बहस के लिए खड़े हो गए।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई वकील सरकार की ओर से नियुक्त है, तो वह सरकार के खिलाफ पक्ष नहीं रख सकता। कोर्ट ने सख्ती दिखाई और कहा कि यदि वे सरकार के खिलाफ दलील देना चाहते हैं, तो उन्हें अपनी नियुक्ति से अलग होना होगा।
इस पर अधिवक्ता उदय कुमार ने कहा कि कोर्ट को यह पहले से तय नहीं करना चाहिए कि कौन कितना पक्ष रखेगा। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और पूछा कि क्या उन्हें अधिवक्ता शाह के लिए बहस करने के लिए नियुक्त किया गया है। इसके बाद महाधिवक्ता ने बीच-बचाव किया और कोर्ट से माफी मांगते हुए आश्वासन दिया कि स्थिति स्पष्ट कर ली जाएगी।