Amit Shah देश की न्यायिक प्रणाली में सालों से अटके मुकदमों की समस्या अब एक गंभीर मोड़ पर है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत की अदालतों में कुल 4.81 करोड़ केस लंबित हैं, जिनमें से अकेले जिला अदालतों में ही 4.18 करोड़ मामले पेंडिंग हैं। इस भयावह स्थिति से निपटने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने साफ किया है कि केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट अब एक साझा कार्ययोजना (New System) पर काम कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के साथ सक्रिय संवाद
नई दिल्ली में ‘ऑल इंडिया फिंगरप्रिंट कॉन्फ्रेंस-2026’ के दौरान Amit Shah ने न्यायिक सुधारों पर चर्चा करते हुए कहा, “केंद्रीय गृह मंत्रालय सुप्रीम कोर्ट के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है। हमारा लक्ष्य एक ऐसा सिस्टम विकसित करना है जिससे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में ‘वॉल्यूम-बेस्ड’ यानी बड़ी संख्या में लंबित पड़े केसों का तेजी से निपटारा किया जा सके।”
Amit Shah ने जोर दिया कि सरकार न्याय में होने वाली हर तरह की देरी को खत्म करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों से भी कहा कि वे समय पर चार्जशीट फाइल करें ताकि अदालतों में मुकदमों की सुनवाई में बेवजह की देरी न हो।
क्या है पेंडेंसी का मौजूदा हाल?
सुप्रीम कोर्ट ऑब्जर्वर और नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (NJDG) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में पेंडेंसी का हाल कुछ ऐसा है:
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रिकॉर्ड पेंडेंसी: मार्च 2026 तक सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग मामलों की संख्या 93,143 के आंकड़े को पार कर गई थी, जो पिछले तीन दशकों में सबसे अधिक है।
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मई 2026 की स्थिति: मई 2026 में इसमें मामूली गिरावट दर्ज की गई और पेंडिंग मामलों की संख्या 92,429 रही।
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निचली अदालतों का बोझ: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एम.एम. सुंदरेश के अनुसार, पूरे देश की निचली अदालतों में 4.18 करोड़ मामले लंबित हैं। इनमें से करीब 3.50 करोड़ मामले आपराधिक (Criminal) श्रेणी के हैं।
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सुधार के प्रयास: इसी के चलते सुप्रीम कोर्ट ने इस साल 21 अप्रैल से ‘SAMADHAN SAMAROH’ नामक एक विशेष लोक अदालत भी शुरू की है, ताकि बैंकिंग, सिविल और पारिवारिक विवादों को आपसी सहमति से सुलझाया जा सके।
नए कानून और तकनीक का सहारा
Amit Shah ने मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीन नए आपराधिक कानूनों का जिक्र करते हुए कहा कि पुराने कानूनों की 90% कानूनी खामियों को दूर कर दिया गया है। Amit Shah के अनुसार, न्याय प्रक्रिया को तेज बनाने के लिए ‘डेटा को इंटेलिजेंस में बदलना’ अनिवार्य है। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए पुलिस अधिकारियों को समझाया कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग का उपयोग करके अपराध के पैटर्न को समझा जा सकता है।
‘अभिज्ञान’ ऐप: न्याय की दिशा में एक डिजिटल कदम
कार्यक्रम के दौरान Amit Shah ने ‘अभिज्ञान’ (Abhigyan) नाम का मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया। Amit Shah ने बताया कि यह ऐप पुलिस को सड़क पर ही संदिग्धों के फिंगरप्रिंट्स को 35 सेकंड के भीतर NAFIS डेटाबेस से वेरिफाई करने में मदद करेगा, जिससे गलत गिरफ्तारी की संभावना कम होगी और सटीक जांच में तेजी आएगी।
Nआंकड़े बताते हैं कि न्याय व्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। सरकार और सुप्रीम कोर्ट का यह समन्वय (Coordination) आने वाले समय में पेंडेंसी कम करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है। Amit Shah का तकनीकी आधारित दृष्टिकोण, विशेष रूप से फॉरेंसिक और AI का सही इस्तेमाल, न्यायिक देरी को खत्म करने की दिशा में एक व्यावहारिक समाधान की तरह देखा जा रहा है।
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