Ayodhya Dham (अयोध्या धाम) में राम लल्ला ‘प्राण प्रतिष्ठा’ अनुष्ठानः आस्था के सागर में उठ रहा भक्ति का दिव्य ज्वार

Ayodhya Dham (अयोध्या धाम) में राम लल्ला ‘प्राण प्रतिष्ठा’ अनुष्ठानः आस्था के सागर में उठ रहा भक्ति का दिव्य ज्वार
Ayodhya Dham (अयोध्या धाम) में आजकल आस्था का सागर है, भक्तिभाव का ज्वार है। 500 साल के लम्बे इंतजार के बाद एक बार फिर राम लल्ला की प्रतिमा अपने मंदिर में प्राण प्रतिष्ठित होने जा रही है। यजमान और मुख्य यजमान शास्त्रोक्त ‘यम-नियम’ के अनुसार अनुष्ठान में लीन हैं।

रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान का बुधवार को दूसरा दिन था। अयोध्या में भगवान श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए अनुष्ठान मंगलवार से प्रारंभ हुआ था। रामलला की प्रतिमा 18 जनवरी को गर्भगृह में निर्धारित आसन पर स्थापित कर दी जाएगी। पिछले 70 वर्षों से पूजित वर्तमान प्रतिमा को भी नए मंदिर के गर्भगृह में ही रखा जाएगा। 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला मंदिर में विराजमान होंगे। इस दिन प्राण प्रतिष्ठा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल होंगे।

प्राण प्रतिष्ठा सनातन भारत के गौरव की का क्षण है
राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल ने कहा, “यह क्षण उन लोगों के लिए अवर्णनीय है जिन्होंने इसका सपना देखा था, जिन्होंने लंबे समय तक संघर्ष किया था। न केवल व्यक्तियों ने बल्कि लोगों ने इसके लिए अपनी पीढ़ियों का बलिदान दिया है। मैं समझता हूं कि ये पीढ़ियों के त्याग और समर्पण का परिणाम है। ये भारत के गौरव की प्राण प्रतिष्ठा का क्षण है।”

यजमान अनिल मिश्र
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के मुख्य यजमान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ.अनिल मिश्र हैं। यजमान के रूप में उन्होंने मंगलवार को प्रायश्चित पूजन में हिस्सा लिया। अब वे सात दिनों तक यजमान की ही भूमिका में रहेंगे। प्राण प्रतिष्ठा कराने वाले कर्मकांडी ब्राह्मणों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, राममंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, संघ प्रमुख मोहन भागवत और डॉ. अनिल मिश्र सपत्नीक मुख्य आयोजन के समय 22 जनवरी को उपस्थित रहेंगे। प्रधानमंत्री मोदी गर्भगृह में अपने हाथ से कुशा और श्लाका खींचेंगे। उसके बाद रामलला प्राण प्रतिष्ठित हो जाएंगे। इसके बाद पीएम मोदी भोग अर्पित करने के साथ ही आरती भी करेंगे।

अनिल मिश्र भी कर रहे हैं नियम-संयम का पालन
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के मुख्य यजमान डॉ. अनिल मिश्र 11 दिनों तक नियम-संयम का पालन करेंगे। वे दस दिनों तक सिला हुआ सूती वस्त्र नहीं पहनेंगे। स्वेटर, ऊनी शॉल, कंबल धारण कर सकेंगे। केवल फलाहार करेंगे। रात्रि आरती के बाद सात्विक भोजन, सेंधा नमक का इस्तेमाल करेंगे। जमीन पर कुश के आसन पर सोएंगे। अन्य कई कठोर नियमों का उन्हें पालन करना होगा। उन्होंने यह नियम-संयम मकर संक्रांति से शुरू भी कर दिया है।

अभिभूत है मूर्तिकार योगीराज का परिवार
मूर्तिकार अरुण योगीराज की बनाई रामलला की मूर्ति गर्भगृह में स्थापना के लिए चुने जाने से योगीराज का परिवार बहुत खुश है। योगीराज की पत्नी विजेता ने बताया कि प्रभु राम की मूर्ति के बनाते समय एक नुकीला टुकड़ा उनकी (योगीराज) आंख में चुभ गया। हालांकि, ऑपरेशन के बाद उसे हटा दिया गया। दर्द के दौरान भी वह नहीं रुके और काम करते रहे। उनका काम इतना अच्छा था कि इसने सभी को प्रभावित किया।मूर्तिकार अरुण योगीराज की मां सरस्वती ने कहा, किसी ने भी भगवान राम को नहीं देखा था, लेकिन भगवान ने स्वयं उनके बेटे को पत्थर से एक आकृति बनाने की अंतर्दृष्टि दी थी। शायद भगवान ने ही उन्हें अपनी मूर्ति तराशने का आशीर्वाद दिया था।

मुख्य समारोह के यजमान पीएम मोदी
प्राण प्रतिष्ठा समारोह के प्रमुख आचार्य पं. लक्ष्मीकांत दीक्षित ने कहा है कि कि पीएम नरेंद्र मोदी 22 जनवरी को अयोध्या में अभिषेक अनुष्ठान के मुख्य यजमान होंगे। समय की कमी के कारण अन्य लोग ‘सह-यजमान’ के रूप में उनकी सहायता कर रहे हैं। आचार्य दीक्षित बुधवार को ‘यजमान प्रायश्चित’ अनुष्ठान के लिए वैदिक विद्वानों और पुजारियों के दल में शामिल हुए।
आचार्य दीक्षित ‘प्राण प्रतिष्ठा’ के मुख्य आचार्य हैं। वो काशी के विद्वान और पुजारी गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ 121 आचार्यों के दल के साथ समन्वय कर रहे हैं।

चूंकि प्रधानमंत्री मंगलवार से शुरू हुए सभी अनुष्ठानों को पूरा करने के लिए लंबे समय तक नहीं रुक सकते, इसलिए अन्य लोग यजमान के रूप में उनकी सहायता कर रहे हैं।आचार्य दीक्षित ने कहा, “अयोध्या में मंदिर में प्रतिष्ठापन से पहले के अनुष्ठान शुरू हो गए हैं और अभी ‘अधिवास’ चल रहा है। नगर दर्शन के साथ भगवान राम के विग्रह की गर्भगृह में स्थापना अनुष्ठान का अंग हैं।

लकड़ी की चौकी पर ‘कम्बल बिछाएंगे’, ‘कंबल ओढेंगे’ पीएम मोदी

Yam-Niyam के मुताबिक पीएम प्राण प्रतिष्ठा से तीन दिन पहले सामान्य बिस्तर का त्याग कर देंगे। ‘प्राण प्रतिष्ठा’ वाले दिन तक वह लकड़ी की चौकी पर कंबल बिछा कर सोएंगे। 11 दिनों के यम नियम में पीएम मोदी भी हर दिन शास्त्रों के मुताबिक दिनचर्या का अनुपालन कर रहे हैं । ‘Niyam’ के तहत पीएम को अंतिम तीन दिन अन्न त्याग कर सिर्फ फलाहार पर निर्भर रहना होगा। पीएम मोदी 12 जनवरी से एक समय के उपवास पर हैं। ‘प्राण प्रतिष्ठा’ से तीन दिन पहले उनका व्रत व संयम और कठिन हो जाएगा। ‘यम-नियम’ के मुताबिक पीएम 19 से 22 जनवरी तक पूर्ण रूप से फलाहार पर निर्भर रहेंगे। प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन उन्हें पूर्ण उपवास करना होगा। इस दौरान शास्त्रों के नियमों के मुताबिक वे विशिष्ट मंत्रों का जाप करेंगे।

बलिदानियों के प्रतीक जटायु की मूर्ति पूजा करेंगे पीएम मोदी
‘प्राण प्रतिष्ठा’ के लिए यम नियमों का पालन कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राममंदिर परिसर में बने जटायु की मूर्ति की पूजा करेंगे। इस मूर्ति की स्थापना विशेष रूप से मंदिर आंदोलन में अपना जीवन न्योछावर करने वाले बलिदानियों की स्मृति में की गई। पूजा के समय कारसेवा में शहीद हुए बलिदानियों के परिजन भी मौजूद रहेंगे। इसी दिन मोदी मंदिर निर्माण में जुटे मजदूरों के साथ संवाद भी करेंगे।

आसन पर विराजेंगे रामलला, 22 को खुलेगी पट्टी
बुधवार यानी आज रामलला की मूर्ति परिसर में प्रवेश करेगी और मूर्ति को परिसर का भ्रमण कराया जाएगा। फिर मंदिर परिसर में बने यज्ञ मंडप में अनुष्ठान शुरू होंगे। प्रायश्चित पूजन व कर्मकुटी पूजन के साथ रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का सात दिवसीय अनुष्ठान मंगलवार से शुरू हो गया। मूर्ति का शुद्धीकरण के बाद उनकी आंखों पर पट्टी बांधी गई है, यह पट्टी 22 जनवरी को मुख्य यजमान पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा खोली जाएगी।

गुरुवयूर मंदिर में पीएम मोदी
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो दिवसीय केरल प्रवास के दौरान बुधवार को गुरुवयूर में प्रसिद्ध भगवान कृष्ण मंदिर में पूजा-अर्चना की। प्रधानमंत्री त्रिशूर जिले के त्रिप्रयार श्री राम मंदिर में भी पूजा-अर्चना की।

लेपाक्षी के वीरभद्र मंदिर में पूजा-प्रार्थना

अयोध्या में राम मंदिर प्रतिष्ठा समारोह केवल पांच दिन दूर है, भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (16 जनवरी) को दक्षिणी भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश के लेपाक्षी में स्थित वीरभद्र मंदिर में प्रार्थना की। मंदिर और शहर का प्राचीन हिंदू महाकाव्य रामायण में महत्व है, जिसमें भगवान राम, सीता और लक्ष्मण के जीवन और संघर्षों का वर्णन है।

लेपाक्षी वह स्थान है जहां रावण द्वारा सीता का अपहरण के बाद विशाल गरुड़ जटायु ने उससे युद्ध किया और देवी सीता को रावण से छुड़ाने का प्रयास किया लेकिन रावण ने जटायु के दोनों पंख काट दिए।

सीता की खोज में निकले राम-लक्ष्मन भी लेपाक्षी पहुंचते तो उन्हें रास्ते में जटायु मिलते हैं जो उन्हें देवी सीता अपहरण की जानकारी दी थी। लेपाक्षी ही वह स्थान है जहां भगवान राम ने जटायु को ‘मोक्ष’ प्रदान किया था।

पीएम मोदी ने मंदिर में पूजा-अर्चना के दौरान पारंपरिक पोशाक पहनी हुई थी। मंदिर के दौरे के दौरान पीएम मोदी ने दक्षिणी भारतीय भाषा तेलुगु में रंगनाथ रामायण की चौपाइयां भी सुनीं।

22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा समारोह में लाखों श्रद्धालु अयोध्या प्रवास करेंगे और भगवान राम लल्ला के दर्शन लाभ प्राप्त करेंगे।

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Rajeev Sharma

Chief Editor & CEO PhD, LLB
Fact Checked & Editorial Guidelines
Reviewed by: Subject Matter Experts

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