Crime News: सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम बापू की बेल याचिका पर सुनवाई से किया इंकार, कहा पहले हाईकोर्ट जाओ

Crime News: सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम बापू की बेल याचिका पर सुनवाई से किया इंकार, कहा पहले हाईकोर्ट जाओ

Crime News: रेप के आरोप में लगभग 10 साल से जेल में बंद आसाराम बापू को मंगलवार १२ सितंबर को भी सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है।

उन्होंने जमानत के लिए शीर्ष अदालत में अर्जी दायर की थी लेकिन यहां उनकी अपील खारिज हो गई। साल 2022 में राजस्थान हाई कोर्ट ने उन्हें जमानत देने से इंकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने जमानत के लिए उन्हें राजस्थान उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए कहा है।

अपनी जमानत अर्जी में आसाराम ने पिछले १० सालों से जेल में बंद होने की दलील दी है। उनका कहना है कि उनकी उम्र 82 साल से ऊपर हो गई है और वह कई गंभीर बीमारियों से ग्रसित हैं। आंकड़े बताते हैं कि आसाराम ने जमानत के लिए कम से कम 15 बार कोर्ट में जमानत याचिका दायर की है।

रेप के एक और मामले में हुई सजा

अपनी शिष्याओं से दुष्कर्म मामले में आसाराम आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। 2013 के एक रेप मामले में भी उन्हें आजीवन कारावास की सजा हुई है। यह केस सूरत की एक महिला ने उनके खिलाफ दायर किया था। महिला ने आरोप लगाया कि आश्रम के अंदर बार-बार आसाराम ने उनके साथ दुष्कर्म किया। साल 2001 से 2006 के बीच बाबा महिला के साथ नापाक हरकतें करते रहे।

10 साल और 15 जमानत अर्जी

दस साल की अवधि में आसाराम बापू ने हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक 15 से ज्यादा बार जमानत याचिकाएं दाखिल कीं हैं। राम जेठमलानी (अब दिवंगत), सुब्रमण्यम स्वामी और सलमान खुर्शीद जैसे शक्तिशाली वकीलों को कानूनी क्षेत्र में लाया गया, लेकिन फिर भी आसाराम बापू को कोई राहत नहीं मिली।

31 अगस्त 2013 को आसाराम बापू को गिरफ्तार किया गया था। तब से बापू को फिर कभी जेल के बाहर खुली हवा नहीं मिली। हालांकि, इस दौरान जोधपुर सेंट्रल जेल का दरवाजा कई बार खुला। कई कैदियों को जेल से रिहा कर दिया गया। यहां तक कि बाबा के रहते हुए सलमान खान जैसी हस्तियां भी इस जेल के अंदर आईं और तीन दिन के अंदर बाहर आ गईं, जिसकी शिकायत अक्सर बापू किया करते थे।

आसाराम बापू ने एक नाबालिग लड़की से रेप किया था और उनका मानना है कि सलमान की तरह जेल आना भी जेल आने जैसा है। कब आये और कब गये, पता ही नहीं चलता। यहां 15 से ज्यादा कोशिशों के बाद भी जमानत नहीं मिली। जीवन की आशाएँ मर गईं। अब आखिरी उम्मीद गुजरात हाई कोर्ट पर टिकी है, जहां आसाराम बापू ने अपनी सजा रद्द करने के लिए रिट दायर की है। लेकिन इसका फैसला कब आएगा ये कोई नहीं जानता। आसाराम बापू जोधपुर जेल में हैं क्योंकि उन पर वहां एक नाबालिग लड़की से रेप का आरोप है।

आसाराम बापू 82 साल के हैं

आसाराम का जन्म 17 अप्रैल 1941 को हुआ था। इस हिसाब से उनकी उम्र 82 साल बनती है। इन 82 सालों में आसाराम ने 10 साल सलाखों के पीछे बिताए हैं और कई बार अपनी उम्र को हथियार बनाकर आसाराम ने कोर्ट से जमानत, रिहाई और पैरोल की मांग की है। लेकिन, अदालत ने उन पर कोई रहम नहीं दिखाया।

वहीं, उम्र और आचरण के आधार पर जेल की सजा काट रहे अमरमणि त्रिपाठी और आनंद मोहन समेत कई कैदियों को जेल से रिहा कर दिया गया है। और तो और, गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो के साथ बलात्कार के आरोपियों को भी बरी कर दिया गया है। लेकिन, अभी तक आसाराम का नंबर तय नहीं हुआ है।

सज़ा ख़ारिज करने की मांग

दरअसल, आसाराम बापू पर एक नहीं बल्कि दो-दो रेप के मामले हैं और दोनों में उन्हें दोषी पाया गया है। लेकिन दस साल बीत जाने के बाद भी उन्हें एक बार भी जेल से बाहर आने का मौका नहीं मिला। फिलहाल उन्होंने अपनी सजा के खिलाफ गुजरात हाई कोर्ट में रिट दायर की है, लेकिन स्थिति यह है कि आसाराम इस रिट पर फैसले का इंतजार नहीं करना चाहते हैं और यही कारण है कि आसाराम ने पिछले दिनों उसी गुजरात हाई कोर्ट में एक और रिट दायर की है।

आसाराम रेप के दो मामलों में दोषी हैं। आसाराम ने कोर्ट में इस अपील में जो बातें लिखी हैं, वो भी कम अजीब नहीं हैं। आसाराम ने अपने खिलाफ दर्ज मामले को झूठा बताया है और कहा है कि जब यह घटना बताई जा रही है तब वह 64 साल के थे और लड़की 21 साल की थी। ऐसे में अगर लड़की चाहती तो उन्हें धक्का देकर बच सकती थी। लेकिन ये तो रही गुजरात मामले की बात, राजस्थान मामले में आसाराम को जो सजा मिल रही है वो अलग है और ये मामला आसाराम के लिए विवाद की सबसे बड़ी जड़ है।

रेप के आरोप में गिरफ्तार आसाराम पर 1012 पेज की चार्जशीट के साथ 14 कानूनी धाराओं के तहत मुकदमा चलाया गया। 140 गवाहों की मदद से जोधपुर पुलिस ने 1012 पन्नों की चार्जशीट में भारतीय दंड संहिता की इन 14 सख्त धाराओं को शामिल कर आसाराम बापू को राहत मिलने की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी है।

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Rajeev Sharma

Chief Editor & CEO PhD, LLB
Fact Checked & Editorial Guidelines
Reviewed by: Subject Matter Experts

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