Pre Birth Golden Minutes प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में नवजात शिशुओं की जीवन रक्षा से संबंधित एडवांस नियोनेटल रिससिटेशन प्रोवाइडर (ANRP) कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जन्म के तुरंत बाद नवजात शिशुओं को आवश्यक जीवनरक्षक चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित करना था।
कार्यक्रम का आयोजन एमएलएन मेडिकल कॉलेज, आईएपी तथा नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. एके वर्मा, डॉ. नीलम सिंह और प्रो. राजीव शरण ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर डॉ. एके वर्मा ने कहा कि भारत सरकार के इंडियन नियोनेटल एक्शन प्लान के अंतर्गत नवजात मृत्यु दर को प्रति हजार जीवित जन्म पर 10 से कम लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि प्रत्येक नवजात को जन्म के तुरंत बाद प्रशिक्षित एवं कुशल स्वास्थ्यकर्मी की देखरेख उपलब्ध होनी चाहिए।
एसआईसी डॉ. नीलम सिंह ने कहा कि जन्म के बाद के पहले गोल्डन मिनट्स नवजात के जीवन और भविष्य के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यदि इस अवधि में सही समय पर उचित चिकित्सकीय सहायता मिल जाए तो अनेक नवजातों का जीवन बचाया जा सकता है।
मुख्य अतिथि प्रो. राजीव शरण ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि नवजात पुनर्जीवन (रेससिटेशन) एक ऐसा कौशल है, जिसमें नियमित अभ्यास और प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। उन्होंने युवा चिकित्सकों एवं प्रशिक्षुओं को अपने ज्ञान और कौशल को लगातार अद्यतन रखने के लिए प्रेरित किया।
कार्यशाला के अध्यक्ष एवं कोर्स समन्वयक डॉ. मनीष मौर्य ने बताया कि कार्यक्रम में कुल 36 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। बेहतर प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक छह प्रशिक्षुओं पर एक फैसिलिटेटर नियुक्त किया गया था। प्रतिभागियों को बैग-मास्क वेंटिलेशन, श्वास सहायता, नवजात कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन तथा अन्य जीवनरक्षक तकनीकों का हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला में यूपी नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम के सचिव डॉ. आकाश पंडिता ने लीड इंस्ट्रक्टर की भूमिका निभाई। उनके साथ डॉ. मनीषा मौर्य, डॉ. अनीता सिंह , डॉ. सचिन वर्मा, डॉ. प्रमोद कुमार , डॉ. राहुल जायसवाल तथा डॉ. इप्शिता ने प्रशिक्षक के रूप में प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान किया।
