Salim Dola भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय खुफिया तंत्र को अंडरवर्ल्ड के खिलाफ एक बड़ी सफलता मिली है। डी-कंपनी (D Company) का सबसे खास सिपहसालार और ड्रग्स की दुनिया का बेताज बादशाह माना जाने वाला सलीम डोला (Salim Dola) तुर्की के इस्तांबुल से गिरफ्तार कर भारत ले आया गया है। सुरक्षा एजेंसियों का विमान दिल्ली पालम एयरपोर्ट के टेक्निकल एरिया में उतरा। वहां से उसे कड़ी सुरक्षा में गुप्त स्थान पर रखा गया है।
सलीम डोला की गिरफ्तारी को दाऊद इब्राहिम के वैश्विक साम्राज्य पर अब तक की सबसे बड़ी चोट माना जा रहा है। वह न केवल दाऊद का भरोसेमंद है, बल्कि डी-कंपनी के वित्तीय ढांचे की रीढ़ भी है।
कौन है सलीम डोला
सलीम डोला का असली नाम सलीम मोहम्मद गनी है। मुंबई के डोंगरी इलाके का रहने वाला यह शख्स पिछले कई दशकों से अपराध की दुनिया में सक्रिय था। वह केवल एक अपराधी नहीं, बल्कि एक ‘लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट’ है जो समुद्र और हवाई मार्ग से ड्रग्स की तस्करी में माहिर माना जाता है।
दाऊद से रिश्ता
डोला के पिता भी दाऊद इब्राहिम के लिए काम करते थे। डोला ने कम उम्र में ही डी-कंपनी में अपनी जगह बना ली और धीरे-धीरे दाऊद के भाई अनीस इब्राहिम का सबसे करीबी बन गया।
फरारी
2015-16 के आसपास जब भारत में उस पर शिकंजा कसा गया, तो वह जाली दस्तावेजों के सहारे दुबई और फिर तुर्की भाग गया।
इस्तांबुल में कैसे बिछाया गया जाल
सलीम डोला तुर्की में अपनी पहचान बदलकर रह रहा था। वह वहां से अपना नेटवर्क ऑपरेट कर रहा था। भारतीय खुफिया एजेंसियों (IB) और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने उसके डिजिटल फुटप्रिंट्स का पीछा किया।
इंटरपोल की मदद
भारत ने डोला के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस (RCN) जारी किया था।
लोकेशन ट्रैकिंग
तुर्की की नेशनल इंटेलिजेंस ऑर्गनाइजेशन (MIT) को सूचना दी गई कि डोला इस्तांबुल के एक पॉश इलाके में छिपा है।
छापेमारी
इस्तांबुल पुलिस की नारकोटिक्स यूनिट ने एक गुप्त ऑपरेशन के तहत उसे दबोच लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से कई देशों के फर्जी पासपोर्ट और करोड़ों की विदेशी मुद्रा बरामद हुई है।
5,000 करोड़ का ड्रग्स नेटवर्क और ‘मेफेड्रोन’ किंग
सलीम डोला की गिरफ्तारी का सबसे बड़ा संबंध महाराष्ट्र में पकड़े गए भारी मात्रा में ड्रग्स से है।
पुणे और सांगली केस
2024 में पुणे और सांगली में की गई छापेमारी में करीब 3,000 से 5,000 करोड़ रुपये की ‘मेफेड्रोन’ (MD) जब्त की गई थी।
मास्टरमाइंड
जांच में पता चला कि इस पूरे माल की फंडिंग और रूटिंग का मास्टरमाइंड सलीम डोला था, जो तुर्की में बैठकर भारत के स्थानीय तस्करों को निर्देश दे रहा था।
बेटे की भूमिका
डोला का बेटा ताहिर डोला भी इसी धंधे में शामिल है, जिसे पहले ही एजेंसियों ने रडार पर ले लिया है।
डी-कंपनी के लिए क्यों है यह ‘बड़ा झटका’
सलीम डोला की गिरफ्तारी से अंडरवर्ल्ड को तीन बड़े नुकसान हुए हैं:
फंडिंग रुकी: वह ड्रग्स के पैसे को हवाला के जरिए दाऊद तक पहुँचाता था।
नेटवर्क का खुलासा: डोला के पास उन लोगों की सूची है जो भारत में रहकर डी-कंपनी के लिए काम करते हैं।
लॉजिस्टिक्स फेल: विदेशों से भारत में नशीले पदार्थों की सप्लाई करने वाला मुख्य चैनल अब टूट गया है।
सुरक्षा एजेंसियों की अगली रणनीति
अब भारतीय एजेंसियां सलीम डोला के प्रत्यार्पण (Extradition) या डिपोर्टेशन की प्रक्रिया को अंतिम रूप दे रही हैं। उसे भारत लाने के बाद मुंबई और दिल्ली की पुलिस उससे पूछताछ करेगी। उम्मीद है कि वह दाऊद इब्राहिम के कराची स्थित ठिकानों और उसके अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के बारे में ऐसे राज उगलेगा, जिससे डी-कंपनी का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।