SGPC के प्रतिनिधि मंडल ने की सीएम भगवंत मान की शिकायत ‘गुरुदोखी’ के खिलाफ एफआईआर की मांग

SGPC के प्रतिनिधि मंडल ने की सीएम भगवंत मान की शिकायत ‘गुरुदोखी’ के खिलाफ एफआईआर की मांग

SGPC पंजाब की राजनीति और धार्मिक हलकों में मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने पंजाब पुलिस से मुख्यमंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। SGPC का आरोप है कि एक वायरल वीडियो में दिखाई गई कथित गतिविधियों से सिख समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री भगवंत मान पहले ही इन आरोपों को सिरे से खारिज कर चुके हैं और वायरल वीडियो को फर्जी तथा राजनीतिक साजिश का हिस्सा बता चुके हैं।

क्या है पूरा मामला?

विवाद की शुरुआत एक कथित वायरल वीडियो से हुई, जिसे लेकर SGPC और अकाल तख्त ने गंभीर आपत्ति जताई। SGPC का कहना है कि वीडियो में सिख गुरुओं के चित्रों और धार्मिक प्रतीकों के प्रति आपत्तिजनक व्यवहार दिखाई देता है, जिससे करोड़ों सिखों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। इसी आधार पर संगठन ने मुख्यमंत्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, इस वीडियो की प्रामाणिकता और उसमें दिख रहे व्यक्ति की पहचान को लेकर विवाद बना हुआ है।

SGPC ने DGP को सौंपी शिकायत

SGPC के प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) को लिखित शिकायत देकर मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। शिकायत में धार्मिक भावनाएं आहत करने, संवैधानिक पद के दुरुपयोग और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग शामिल है। SGPC का कहना है कि यह फैसला उसकी कार्यकारिणी और जनरल हाउस में पारित प्रस्तावों के अनुरूप लिया गया है।

 

अकाल तख्त के फैसले के बाद बढ़ा विवाद

इस पूरे घटनाक्रम से पहले अकाल तख्त ने भी मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था। अकाल तख्त ने उन्हें “गुरु दोखी” और “खालसा पंथ विरोधी” घोषित करते हुए उनके आचरण पर सवाल उठाए थे। इसके बाद SGPC ने भी अकाल तख्त के फैसले का समर्थन किया और समुदाय स्तर पर आगे की रणनीति बनाने की घोषणा की। हाल के दिनों में इस मुद्दे पर पंथक बैठक बुलाने की भी घोषणा की गई है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान का पक्ष

मुख्यमंत्री भगवंत मान लगातार इन आरोपों को नकारते रहे हैं। उनका कहना है कि वायरल वीडियो वास्तविक नहीं है और उन्हें बदनाम करने के लिए राजनीतिक षड्यंत्र रचा जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि फोरेंसिक रिपोर्ट से जुड़े विवाद में कुछ लोगों पर दबाव डालकर बयान दिलवाए गए। मान का कहना है कि उनकी सरकार धार्मिक स्थलों और सिख परंपराओं का सम्मान करती है तथा पूरा विवाद राजनीतिक लाभ के लिए खड़ा किया गया है।

राजनीतिक दलों ने भी साधा निशाना

विवाद बढ़ने के साथ विपक्षी दलों ने भी मुख्यमंत्री को घेरना शुरू कर दिया है। शिरोमणि अकाली दल और अन्य संगठनों ने मुख्यमंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की है। वहीं आम आदमी पार्टी का कहना है कि विपक्ष धार्मिक संस्थाओं का राजनीतिक इस्तेमाल कर रहा है और राज्य सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।

शिकायत पर पुलिस कर सकती जांच

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, केवल SGPC की शिकायत दिए जाने से स्वतः एफआईआर दर्ज होना अनिवार्य नहीं होता। पुलिस शिकायत, उपलब्ध साक्ष्यों और लागू कानूनी प्रावधानों का परीक्षण करने के बाद आगे का निर्णय लेती है। यदि एफआईआर दर्ज होती है तो मामले की जांच होगी, जबकि यदि पर्याप्त आधार नहीं मिलता है तो पुलिस शिकायत को बंद भी कर सकती है।

इस बीच SGPC ने संकेत दिए हैं कि वह इस मुद्दे को धार्मिक और कानूनी दोनों स्तरों पर आगे बढ़ाएगी। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री भगवंत मान अपने रुख पर कायम हैं कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं। ऐसे में यह मामला आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति और धार्मिक विमर्श दोनों में महत्वपूर्ण बना रह सकता है।

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