Dabangg Horror उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर योगी सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ दावों के बीच प्रयागराज के फूलपुर थाना क्षेत्र से सामने आया एक मामला राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। हंडिया तहसील के गोसैसी पुर गांव निवासी त्रिलोकी लाल शुक्ल ने स्थानीय माफियाओं द्वारा जमीन कब्जाने और उन्हें घर से बेदखल करने की साजिशों के खिलाफ प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की गुहार लगाई है। यह मामला न केवल एक सामान्य जमीनी विवाद तक सीमित है, बल्कि यह उस खौफनाक स्थिति को दर्शाता है जिसे पीड़ित परिवार इन दिनों दबंगो का तांडव (Dabangg Horror) झेल रहा है।
यह है पूरा मामला
मीडिया क्लब के हर्ष नारायण सभागार में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान त्रिलोकी लाल शुक्ल ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि उनके घर के समीप स्थित आराजी संख्या 151 (आबादी की जमीन) पर क्षेत्र के दबंग व्यक्तियों की बुरी नजर है। पीड़ित का आरोप है कि ये अपराधी किस्म के लोग न केवल उनकी जमीन को हड़पना चाहते हैं, बल्कि वे क्षेत्र में एक ऐसा खौफ (Dabangg Horror) पैदा कर रहे हैं, जिससे आसपास के अन्य लोग भी भयभीत होकर खामोश हैं।
पीड़ित के अनुसार, दबंगों ने न केवल अंबेडकर योजना के तहत बने सरकारी शौचालयों को तोड़ा है, बल्कि प्रभावती देवी की कॉलोनी को भी पूरी तरह से जमींदोज कर दिया है। उनकी क्रूरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने त्रिलोकी लाल शुक्ल के घर की पिछली बाउंड्री वॉल को ढहा दिया है, ताकि पीड़ित का मनोबल पूरी तरह टूट जाए। पीड़ित परिवार का कहना है कि यह उनके लिए सबसे पीड़ा दायक (Dabangg Horror) का एक दौर है, जहाँ उन्हें अपने ही घर में सुरक्षित रहने का अधिकार भी नसीब नहीं हो रहा है।
पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल
त्रिलोकी लाल शुक्ल ने स्पष्ट किया कि पूर्व में जब एसीपी पंकज लवानिया तैनात थे, तब पुलिस द्वारा आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल भेजा गया था। लेकिन, जेल से बाहर आते ही इन दबंगों ने अपनी गतिविधियों को और अधिक आक्रामक बना लिया है। जेल से छूटने के बाद आरोपियों द्वारा जो आतंक मचाया जा रहा है, वह किसी Dabangg Horror की पटकथा जैसा प्रतीत होता है, जहाँ अपराधी प्रशासन को खुली चुनौती देते हुए घूम रहे हैं।
वर्तमान में पीड़ित प्रशासन से मदद की उम्मीद लगाए बैठा है, परंतु जिम्मेदार अधिकारी तमाशबीन बने हुए हैं। पीड़ित का आरोप है कि स्थानीय प्रशासन की इस मूक सहमति ने दबंगों को और अधिक निडर बना दिया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि वे लगातार धमकियों के साये में जीने को मजबूर हैं, और यही Dabangg Horror अब उनके जीवन का कड़वा सच बन गया है, जिससे प्रशासन उन्हें बचाने में विफल रहा है।
बुलडोजर संस्कृति बनाम जमीनी हकीकत
प्रेस वार्ता के दौरान पीड़ित ने शासन की नीतियों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहाँ भू-माफियाओं के खिलाफ बुलडोजर की कार्रवाई का संदेश दे रहे हैं, वहीं फूलपुर में दबंग खुद गरीब और असहाय लोगों की संपत्ति पर अवैध कब्जा करने के लिए दबंगई (Dabangg Horror) का इस्तेमाल कर रहे हैं। पीड़ित का स्पष्ट कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस मामले में हस्तक्षेप नहीं किया, तो उन्हें अनहोनी का डर सता रहा है।
पीड़ित पक्ष की प्रमुख माँगें
त्रिलोकी लाल शुक्ल ने न्याय पाने के लिए शासन से तीन प्रमुख माँगें रखी हैं:
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निष्पक्ष जांच: विवादित आराजी संख्या 151 की राजस्व विभाग द्वारा निष्पक्ष जांच हो ताकि दबंगों की असलियत सामने आ सके।
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सुरक्षा की व्यवस्था: पीड़ित परिवार को इस Dabangg Horror से बचाने के लिए तत्काल पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई जाए।
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कब्जे से मुक्ति: इन दबंगों के अवैध कब्जे से उनकी जमीन को मुक्त कराया जाए और उन पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
यह मामला अब प्रयागराज जिला प्रशासन की संवेदनशीलता और कार्यक्षमता की परीक्षा है। क्या प्रशासन इस पीड़ित परिवार को Dabangg Horror के इस चक्र से मुक्ति दिला पाएगा, या फिर यह मामला फाइलों में दम तोड़ देगा?
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