Hydrogen Train प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह ट्रेन जींद से सोनीपत के बीच चली। इसके साथ ही हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली ट्रेन शुरू करने वाला भारत दुनिया का पांचवां देश बन गया है। इससे पहले जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन में ही हाइड्रोजन ट्रेनें चल रही हैं।
10 कोच वाली यह Hydrogen Train ट्रेन जींद-सोनीपत रूट पर 14 स्टेशनों के बीच अधिकतम 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी। इसका किराया 5 से 25 रुपए के बीच रखा गया है। ट्रेन 89 किलोमीटर का सफर करीब 2 घंटे में पूरा करेगी।

जींद मुख्यालय में तैनात लोको पायलट (पैसेंजर) राजेश कुमार को भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन (Hydrogen Train) के संचालन की जिम्मेदारी मिली है।
राजेश कुमार ने बताया कि हाइड्रोजन ट्रेन (Hydrogen Train) पूरी तरह नई तकनीक पर आधारित है। इसमें पारंपरिक ट्रेनों की तुलना में अधिक पावर है, यह साउंड प्रूफ है और इससे पर्यावरण में किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं होता। इसकी पिक-अप भी काफी बेहतर है, जिससे ट्रेन का संचालन अधिक सुगम और प्रभावी होता है।
उन्होंने बताया कि लोको पायलट का यात्रियों से सीधे संवाद नहीं होता। यदि किसी यात्री को सहायता की जरूरत होती है तो लोको पायलट ट्रेन मैनेजर से संपर्क करता है। इसके बाद ट्रेन मैनेजर पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए यात्रियों तक सूचना पहुंचाता है और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
राजेश कुमार ने बताया कि इस (Hydrogen Train) ट्रेन में हाइड्रोजन फ्यूल सेल लगाया गया है। फ्यूल सेल में करीब 8.5 बार के दबाव से हाइड्रोजन गैस भेजी जाती है, जबकि दूसरी ओर से ऑक्सीजन प्रवेश करती है। दोनों के बीच होने वाली रासायनिक प्रक्रिया से बिजली, जलवाष्प (भाप) और पानी उत्पन्न होते हैं। बिजली ट्रेन को चलाने का काम करती है, जलवाष्प वातावरण में निकल जाती है और पानी नीचे निकल जाता है। यही वजह है कि हाइड्रोजन ट्रेन को पर्यावरण के अनुकूल और शून्य-उत्सर्जन (Zero Emission) तकनीक वाली ट्रेन माना जाता है।

जींद मुख्यालय में तैनात सीनियर असिस्टेंट लोको पायलट हैं गगनदीप सिंह उन्हें भी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन के लिए स्पेशल ट्रेनिंग दी गई है।
गगनदीप सिंह ने बताया कि चेन्नई से आए एक्सपर्ट्स ने इसकी पूरी तकनीक और संचालन प्रक्रिया की जानकारी दी। यह करीब 3200 हॉर्सपावर की अत्याधुनिक ट्रेन है। इसमें आठ ट्रैवल (यात्री) कोच और दो पावर कार हैं। एक पावर कार आगे और दूसरी पीछे लगी है, जिससे ट्रेन को आवश्यक शक्ति मिलती है।
इस (Hydrogen Train) ट्रेन में आधुनिक सुरक्षा सुविधाएं दी गई हैं। आग लगने की स्थिति से निपटने के लिए ऑटोमैटिक फायर एक्सटिंग्विशिंग सिस्टम लगाया गया है। इसके अलावा करीब 26 सेंसर लगाए गए हैं, जो गर्मी, आग और हाइड्रोजन गैस के रिसाव का तुरंत पता लगा लेते हैं। सुरक्षा के मामले में यह ट्रेन बेहद उन्नत और विश्वस्तरीय है।
गगनदीप सिंह ने आगे बताया कि यह मेरे लिए बेहद गर्व और खुशी का क्षण है। भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का हिस्सा बनना अपने आप में एक अलग अनुभव है। रेलवे ने अत्याधुनिक तकनीक से लैस और बेहद शक्तिशाली ट्रेन तैयार की है, जिसे चलाना हमारे लिए सम्मान की बात है।
