Operation Zero Tolerance “726 दिन। 153 मुठभेड़ और 201 ऐसे चेहरे, जो कभी अपराध की दुनिया के बेताज बादशाह बने घूमते थे, आज अस्पतालों के बेड पर कराह रहे हैं या जेल की काल कोठरी में समय काट रहे हैं। बरेली पुलिस ने अपनी रणनीति बदली है—’गोली का जवाब, गोली से’। ये कहानी है ऑपरेशन ज़ीरो टॉलरेंस की, जहां सांप्रदायिक तत्व और अपराधियों के पैर अब कानून की चौखट पर कांप रहे हैं। क्या है बरेली पुलिस का अपराध मुक्त जिले का फॉर्मूला, जिसने असामाजिक तत्वों की कमर तोड़ दी है? देखिए ये खास रिपोर्ट…”
बरेली राजे-महाराजे और शूरवीरों की भूमि रही है। चाहे वो महाभारत काल हो या कठेरिया क्षत्रीय राजा बांस-बरल देव या फिर रोहिला पश्तून ही क्यों न हों। भिटौरा के मैदान में लगी लाट 1754 की भीषण जंग की याद दिलाती है। रोहिला जंगजूओं ने ईस्ट इंडिया कंपनी की फौज को नाको चने चबवा दिए थे।अवध के नवाब की फौज ने ईस्ट इंडिया कंपनी की मदद न की होती तो आज बरेली का इतिहास कुछ और ही होता।
बहरहाल, आज से दो साल पहले यानी 27 जून 2024 को अनुराग आर्य ने बरेली के एसएसपी का कार्यभार संभाला और सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देशों का पालन Operation Zero Tolerance की नीति को अपनाते हुए जिले को अपराध मुक्त बनाने का बीड़ा उठाया है।
अनुराग आर्य उत्तर प्रदेश कैडर के 2013 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं। अनुराग उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के छपरौली (छपड़ोली) गांव के मूल निवासी हैं। उनके माता-पिता दोनों पेशे से डॉक्टर हैं। उनकी माता डॉ. पूनम आर्य एक होम्योपैथिक डॉक्टर हैं और पिता रमेश चंद्र आर्य भी डॉक्टर हैं। उनके परिवार में उनकी पत्नी वनिका सिंह (जो स्वयं एक पीसीएस अधिकारी) हैं। अनुराग आर्य ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई गांव के स्कूल और देहरादून के इंडियन मिलिट्री स्कूल (IMS) से की है। इसके बाद उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से भौतिकी (Physics) में ग्रेजुएशन (BSc Honors) किया है। अनुराग आर्य दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से एमएससी (MSc) फर्स्ट क्लास पास किया है। अनुराग आर्य एक सफल स्पोर्ट्समैन भी रहे हैं वो नेशनल लेवल तक बास्केटबॉल खेल चुके हैं। यूपीएससी (UPSC) परीक्षा पास करने से पहले वे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) में मैनेजर के पद पर भी कार्यरत थे। अनुराग आर्य ने बरेली पुलिस का इंटीग्रेटेड ड्रोन-सीसीटीवी मॉनेटरिंग और कंट्रोल सिस्टम स्थापित किया है। यानी एक रूम में बैठ कर पूरे शहर पर नजर रखने और Operation Zero Tolerance को लागू करने की क्षमता बरेली पुलिस को हासिल है।
726 दिनों का कड़क रिपोर्ट कार्ड
पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले लगभग दो वर्षों में बरेली में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई (Operation Zero Tolerance) का ग्राफ तेजी से ऊपर गया है:
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कुल एनकाउंटर: 153 मुठभेड़।
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201 अपराधी ‘हाफ फ्राई’: पुलिस की जवाबी फायरिंग में 201 बदमाशों के पैर में गोली लगी (199 घायल, 2 ढेर)।
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गिरफ्तारियां: मुठभेड़ों के दौरान 323 शातिर अपराधियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा गया।
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औसत: जिले में औसतन हर तीसरे दिन पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ दर्ज की गई है।
‘शून्य’ की ओर बढ़ते जघन्य अपराध
एसएसपी अनुराग आर्य की रणनीति (Operation Zero Tolerance) का सीधा असर जमीन पर दिख रहा है। हत्या, लूट, डकैती, गैंगस्टर एक्ट और गोतस्करी जैसे जघन्य अपराधों में भारी कमी आई है। पुलिस का यह ‘प्रो-एक्टिव’ मोड उन बदमाशों के लिए चेतावनी है, जो गिरफ्तारी के समय पुलिस पर हथियार उठाते हैं। पुलिस का स्पष्ट निर्देश है—’गोली का जवाब गोली से’।
ऑपरेशन के ‘हॉटस्पॉट’ और थानेवार विवरण
बरेली के विभिन्न थाना क्षेत्रों में पुलिस के Operation Zero Tolerance विवरण कुछ इस प्रकार है:
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इज्जतनगर: 22 अपराधी घायल।
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बारादरी: 19 अपराधी घायल।
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आंवला और भोजीपुरा: 14-14 अपराधी घायल।
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बिथरी चैनपुर: 13 अपराधी घायल।
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देवरनिया: 11 अपराधी घायल।
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बहेड़ी: 10 अपराधी घायल।
बरेली एक महान पहचान जैनों के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ से है। भगवान पार्श्वनाथ को जिस स्थान पर कैवल्य प्राप्त हुआ उसे अहिछत्र कहते हैं। अहिछत्र यानी नाग जिसकी रक्षा करते हों। नागों के बारे में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने लिखा है- क्षमा शोभती उस भुजंग को, जिसके पास गरल हो, उसको क्या जो दंतहीन, विषरहित, विनीत, सरल हो।पूर्वांचल के माफिया मुख्तार अंसारी के ताबूत में आखिरी कील IPS अनुराग आर्य ने ही ठोंकी थी।
26 सितंबर 2025 में इत्तेहाद-ए-मिल्त काउंसिल (IMC) के सरगना तौकीर रजा द्वारा बरेली को सांप्रदायिक हिंसा में धकेलने की एक बड़ी साजिश को अनुराग आर्य ने Operation Zero Tolerance के तहत सूझबूझ और सख्त कार्रवाई से नाकाम कर दिया। तौकीर रजा ने एक विरोध प्रदर्शन की आड़ में भीड़ को उकसाकर शहर में पथराव, गोलीबारी और हिंसा फैलाने की एक हफ्ते पहले से सुनियोजित साजिश रची थी। इस पर त्वरित एक्शन लेते हुए बरेली एसएसपी अनुराग आर्य ने पुख्ता डिजिटल साक्ष्य और वीडियो फुटेज जुटाए, जिसके आधार पर मुख्य साजिशकर्ता तौकीर रजा के खिलाफ 7 अलग-अलग आपराधिक मुकदमे (FIR) दर्ज कर उन्हें तुरंत हिरासत में लेकर जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। इसके साथ ही, ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाते हुए पुलिस कप्तान ने दंगाइयों की संपत्तियों पर बुलडोजर चलवाया, 80 से अधिक उपद्रवियों को गिरफ्तार किया और शहर में दंगा भड़काने की कोशिश करने वाले तत्वों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) तथा गैंगस्टर एक्ट के तहत कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की।ये सभी असामाजित तत्व जेल की सलाखों के पीछे हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट भी जमानत खारिज कर चुका है।
खूंखार अपराधियों का अंत
पिछले दो साल के दौरान बरेली पुलिस ने उन चेहरों को बेनकाब किया जो कभी जिले के लिए सिरदर्द बने हुए थे।
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इफ्तेखार उर्फ शैतान (1 लाख का इनामी): अक्टूबर 2025 में भोजीपुरा पुलिस ने इस इनामी डकैत को मार गिराया था। उस पर 17 संगीन मुकदमे दर्ज थे।
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दोहरा हत्याकांड: मार्च में इज्जतनगर पुलिस ने दोहरे हत्याकांड के आरोपी अफसर खां को मुठभेड़ में ढेर किया। कुछ अपराधी तो ऐसे भी रहे, जिन्हें गंभीर संक्रमण के कारण अपने पैर तक कटवाने पड़े, जिससे अपराधियों में कानून का जबरदस्त खौफ बैठ गया है।
अपराध मुक्त बरेली की ओर
बरेली में कानून का राज कायम है। एसएसपी अनुराग आर्य का मानना है कि पुलिस का काम केवल अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि समाज में भयमुक्त वातावरण बनाना है। यह Operation Zero Tolerance न केवल बरेली के लिए, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक मॉडल बनकर उभरा है। अपराधियों के लिए अब या तो सरेंडर का रास्ता है या फिर पुलिस की जवाबी कार्रवाई का सामना।
